14-Jun-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। बीते साल भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया को परमाणु युद्ध की आशंका से भयभीत किया था। अब एक नई स्टडी ने चेतावनी दी है कि दोनों परमाणु शक्तियों के बीच एक अपेक्षाकृत छोटा संघर्ष भी वैश्विक तबाही ला सकता है, इससे ओजोन परत को भारी नुकसान होगा और एक अरब से अधिक लोगों को भुखमरी के कारण अपनी जान गंवा सकते है। एक शोधकर्ता के अनुसार, छोटे पैमाने का परमाणु युद्ध भी दुनिया भर में दूरगामी प्रभाव डालेगा। परमाणु विस्फोटों से उत्पन्न तीव्र गर्मी और रेडिएशन लाखों लोगों को तत्काल मार देगा, लेकिन इससे भी बड़ा खतरा न्यूक्लियर विंटर का है। धमाकों और आग से भारी मात्रा में धुआँ वायुमंडल में फैल जाएगा, जिससे सूरज की रोशनी पृथ्वी तक पहुँचने से रुक जाएगी और वैश्विक तापमान में तेज़ी से गिरावट आएगी। शोधकर्ता ने वियना में यूरोपियन जियोसाइंसेज यूनियन की बैठक में अपनी स्टडी के नतीजे पेश किए थे। साल 2007 की एक पूर्व स्टडी ने अनुमान लगाया था कि इस न्यूक्लियर विंटर के कारण भुखमरी से 1 अरब से अधिक लोगों की मौत हो सकती है। इसके अलावा, परमाणु विस्फोट ओजोन परत को भी गंभीर नुकसान पहुँचाएँगे। यह नुकसान अमेरिका और रूस के बीच बड़े परमाणु युद्ध के बराबर होगा। इससे हानिकारक अल्ट्रावायलेट (यूवी) किरणें सीधे पृथ्वी तक पहुँचेंगी, जो पौधों और जानवरों दोनों के लिए घातक होंगी। इसका मतलब है कि तापमान सामान्य होने के बाद भी कृषि पैदावार बुरी तरह प्रभावित होगी। शोधकर्ता और उनकी टीम ने पिछली स्टडीज के अनुमानों के आधार पर भारत-पाकिस्तान परमाणु युद्ध का एक विस्तृत मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल से पता चलता है कि उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) इलाकों में हवा के घूमने के विशेष पैटर्न के कारण, भारत-पाकिस्तान परमाणु युद्ध का कचरा वायुमंडल में ज़्यादा ऊँचाई तक जा सकता है और लंबे समय तक टिका रह सकता है। यह कचरा दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी फैलकर वैश्विक स्तर पर गंभीर परिणाम पैदा करेगा, जो मानवता के लिए एक गंभीर चेतावनी है। आशीष/ईएमएस 14 जून 2026