14-Jun-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। रेलवे स्टेशन पर अक्सर किसी रिश्तेदार या दोस्त को ट्रेन में बैठाने या लेने के लिए लोग प्लेटफॉर्म टिकट खरीद लेते हैं। लेकिन हाल ही में ऐसी घटना सामने आई जिसने कई लोगों को हैरान किया, जब एक व्यक्ति को वैध प्लेटफॉर्म टिकट होने के बावजूद 500 रुपये का जुर्माना भरना पड़ा। इसके बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर रेलवे का ऐसा कौन सा नियम है, जिसकी जानकारी ज्यादातर यात्रियों को नहीं होती और जो ऐसी स्थितियों में जुर्माने का कारण बन सकता है। रेलवे अधिकारियों (टीटीआई) ने स्पष्टीकरण देकर बताया कि भारतीय रेलवे में प्लेटफॉर्म टिकट का मुख्य उद्देश्य किसी यात्री को ट्रेन में बैठाने या उस लेने के लिए स्टेशन परिसर में जाने की अनुमति देना होता है। यह टिकट व्यक्ति को प्लेटफॉर्म तक पहुंचने का अधिकार देता है, लेकिन इसके साथ कुछ नियम और शर्तें भी जुड़ी होती हैं, खासकर इसकी वैधता अवधि को लेकर शर्त है। अधिकतर लोगों को जानकारी नहीं होती कि प्लेटफॉर्म टिकट आमतौर पर केवल दो घंटे तक के लिए ही वैध होता है। इसका उद्देश्य सिर्फ इतना है कि कोई व्यक्ति अपने यात्री को ट्रेन तक छोड़ सके या ट्रेन से उतरने वाले यात्री को रिसीव कर सके और उसके बाद स्टेशन परिसर से बाहर निकल जाए। यदि कोई व्यक्ति इस निर्धारित दो घंटे की समय सीमा से अधिक देर तक स्टेशन परिसर में रुकता है,तब रेलवे के नियमों का उल्लंघन मानता है। दरअसल रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना और अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती होती है। यदि लोग प्लेटफॉर्म टिकट लेकर घंटों स्टेशन पर बैठे रहें, तब प्लेटफॉर्म पर अनावश्यक भीड़ बढ़ सकती है, जिससे न केवल यात्रियों को परेशानी होती है बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। इसी कारण रेलवे ने प्लेटफॉर्म टिकट के उपयोग को समय-सीमा के दायरे में रखा है। यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का पालन नहीं करता, तब रेलवे अधिनियम के तहत उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों की तरफ से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों का कहना था कि रेलवे को प्लेटफॉर्म टिकट खरीदते समय उसकी समय सीमा स्पष्ट रूप से बतानी चाहिए, ताकि यात्रियों को भविष्य में ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े। वहीं, कुछ लोगों ने नियमों की जानकारी के अभाव को ही समस्या का मुख्य कारण बताया। आशीष/ईएमएस 14 जून 2026