14-Jun-2026
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16 महीने बाद मिलेंगे जिगरी दोस्त नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत और अमेरिका के उतार-चढ़ाव भरे रणनीतिक संबंधों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आगामी 17 जून को फ्रांस में एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहे हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, फ्रांस में आयोजित होने जा रहे जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंच रहे दोनों वैश्विक नेता वहां एक विशेष द्विपक्षीय वार्ता में भी शामिल होंगे। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे संवेदनशील समय में हो रही है, जब हाल ही में अमेरिकी नौसेना की एक कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत का मामला गरमाया हुआ है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया बयानों को लेकर भारत में विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आखिरी मुलाकात 13 फरवरी 2025 को हुई थी। अब लगभग 16 महीनों के लंबे अंतराल के बाद दोनों नेता एक बार फिर आमने-सामने होंगे। इन 16 महीनों के दौरान दोनों देशों के रिश्तों में ऑपरेशन सिंदूर से लेकर अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए टैरिफ और व्यापारिक संधियों जैसे कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। इससे पहले कई वैश्विक रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया था कि कनाडा में आयोजित जी-7 समिट के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका आने का न्यौता दिया था, जिसे भारतीय प्रधानमंत्री ने उस समय स्वीकार नहीं किया था। ठंडे बस्ते में पड़ी व्यापारिक डील पर होगी चर्चा एक सप्ताह की विदेश यात्रा पर रवाना हो चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के एवियन शहर में 16 और 17 जून को आयोजित होने वाली जी-7 की बैठक में वैश्विक मंच साझा करेंगे। इसी दौरान वह अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा के लिए बैठेंगे। चूंकि वर्तमान में दोनों देशों के बीच कई मोर्चों पर तनातनी और कूटनीतिक बातचीत चल रही है, इसलिए इस बैठक के एजेंडे में कई बड़े विषय शामिल हैं। फिलहाल भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक डील ठंडे बस्ते में है, जिसे दोबारा गति देने की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय नागरिकों के लिए वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाने जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। डैमेज कंट्रोल की कोशिशें दोनों राष्ट्राध्यक्षों की यह मुलाकात इसलिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि हाल ही में अमेरिकी नौसेना के एक हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई थी। इस घटना पर भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी राजनयिक को तलब कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डैमेज कंट्रोल की कवायद के तहत सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया था कि ईरान ने ड्रोन के माध्यम से अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाने का प्रयास किया था, जिसे अमेरिकी नौसेना ने विफल कर दिया। हालांकि, इस घटनाक्रम को लेकर अभी तक अमेरिका, ईरान या भारत की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। फ्रांस के साथ राफेल पर हो सकती है बड़ी डील जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल अमेरिकी राष्ट्रपति से ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य प्रमुख नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मुलाकात मेजबान देश फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ होगी। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी के इस फ्रांस दौरे के दौरान राफेल फाइटर जेट को लेकर एक बहुत बड़ी रक्षा डील पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। माना जा रहा है कि फ्रांस भारत के मेक इन इंडिया मिशन के तहत मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट को भारत में ही विकसित करने पर सहमत हो सकता है। इन आधुनिक फाइटर जेट्स की खासियत यह होगी कि इनमें भारतीय तकनीक से बने हथियारों और मिसाइलों को आसानी से असेंबल और उपयोग किया जा सकेगा। वीरेंद्र/ईएमएस/14जून2026