-कई खगोशास्त्रिय घटनाएं ऐसी हैं, जो एक-दूसरे से जुड़ती हैं वॉशिंगटन,(ईएमएस)। सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दुनियाभर में खगोशास्त्रियों के लिए दिलचस्प होता है। इसमें कई घटनाएं ऐसी हैं, जो एक-दूसरे से जुड़ती हैं। सुपर न्यू मून और सूर्य ग्रहण का जिक्र अक्सर एक साथ होता है। इससे यह मान लेना आसान है कि एक घटना अपने आप दूसरी घटना का कारण बनती है। दोनों ही घटनाओं में न्यू मून का चरण शामिल होता है। हर सूर्य ग्रहण की शुरुआत न्यू मून से होती है लेकिन हर न्यू मून सूर्य ग्रहण में नहीं बदलता है। अब ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या 2026 का सुपर न्यू मून सूर्य ग्रहण का कारण बनेगा। इस साल सुपर न्यू मून की घटना दुनिया को देखने को मिलेगी तो क्या फिर इसके चलते सूर्य ग्रहण भी होगा। सुपर न्यू मून तब होता है जब न्यू मून की घटना चंद्रमा के अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे करीब होने के समय होती है। खगोलीय विशेषज्ञों के मुताबिक यह समुद्र में ज्वार-भाटा को प्रभावित कर सकता है। जहां तक सवाल है कि सुपर न्यू मून के सूर्य ग्रहण का कारण बनने का सवाल है तो इसका सीधा जवाब नहीं में है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सुपर न्यू मून सिर्फ यह बताता है कि चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षा में कहां है। सूर्य ग्रहण पूरी तरह से एक अलग वजह पर निर्भर करता है। यह वजह है सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी का एक ही सीध में आना यानी एलाइनमेंट। सुपर न्यू मून अमूमन बिना ग्रहण के गुजर जाते हैं क्योंकि चंद्रमा आमतौर पर पृथ्वी की कक्षा के तल से थोड़ा ऊपर या नीचे चलता है। जब सीध बिल्कुल सही नहीं होती है तो चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर नहीं पड़ती है और कोई सूर्य ग्रहण नहीं होता है। सूर्य ग्रहण तभी हो सकता है, जब न्यू मून की घटना लूनर नोड्स के बहुत करीब हो। ये वे बिंदु हैं, जहां चंद्रमा की कक्षा, सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की कक्षा के रास्ते को काटती है। जब यह सीध बनती है तो सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी तकरीबन पूरी तरह से एक सीध में आ जाते हैं। इसके नतीजे में चंद्रमा सूर्य के कुछ हिस्से या पूरे सूर्य को ढक लेता है और पृथ्वी पर अपनी छाया डालता है, जिससे सूर्य ग्रहण होता है। अगर यह खास ज्यामितीय अलाइनमेंट ना हो तो फिर सिर्फ न्यू मून होता है, ग्रहण नहीं होता। बता दें इस साल 12 अगस्त को होने वाले सुपर न्यू मून के साथ सूर्य ग्रहण होगा। इस स्थिति में न्यू मून लूनर नोड्स के इतने करीब होगा कि सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाएंगे। इस खास संयोग से चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ेगी, जिससे सुपर न्यू मून के साथ सूर्य ग्रहण भी लगेगा। सिराज/ईएमएस 16 जून 2026