अंतर्राष्ट्रीय
16-Jun-2026
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-अल्पसंख्यक संगठनों ने की धर्म की परवाह किए बिना समान सुरक्षा की मांग ढाका,(ईएमएस)। बांग्लादेश में ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों के नाम बदलने की मांग को लेकर विवाद बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर गाइबांधा जिले में एक हिंदू धार्मिक परिसर के निर्माण कार्य को रोक दिया गया है। इन घटनाओं ने अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़े लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है। बता दें इस हिंदू धार्मिक परिसर की सबसे प्रमुख विशेषता बांग्लादेश की सबसे ऊंची भगवान कृष्ण की प्रतिमा है। करीब 50 फीट ऊंची इस काली प्रतिमा का उद्घाटन 25 नवंबर 2025 को राजशाही में भारत के सहायक उच्चायुक्त मनोज कुमार ने किया था। उद्घाटन के बाद से यह स्थल बांग्लादेश के कई हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। मंदिर समिति की दीर्घकालिक योजना में कई हिंदू देवी-देवताओं की कुल 144 प्रतिमाओं का निर्माण, धार्मिक संरचनाएं और सुंदर कलात्मक स्थापत्य विकसित करना शामिल है। इसके साथ ही सबसे ताजा विवाद बोगरा जिले के शिबगंज उपजिला से जुड़ा है। शिबगंज का नाम लंबे समय से भगवान शिव से जुड़ा माना जाता है। रिपोर्टों के मुताबिक अधिकारियों ने उपजिला का नाम बदलकर “महास्थान उपजिला” करने की प्रक्रिया शुरू की है। इस प्रस्तावित बदलाव ने अल्पसंख्यक अधिकार कार्यकर्ताओं और सांस्कृतिक पर्यवेक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। उनका मानना है कि यह केवल एक नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि देश की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान से जुड़े प्रतीकों को धीरे-धीरे हटाने की शुरुआत है। सूत्रों का कहना है कि शिबगंज का मामला कोई अकेली घटना नहीं है। ऐसी आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं कि भविष्य में लक्ष्मीपुर, शंभुगंज, नारायणगंज, ब्राह्मणबरिया, जयपुरहाट, ठाकुरगांव और गोपालगंज जैसे अन्य स्थानों के नामों पर भी इसी प्रकार का दबाव बनाया जा सकता है। 0हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक राष्ट्रीय नीति घोषित नहीं की गई है, लेकिन इन चर्चाओं ने हिंदू समुदाय में बेचैनी पैदा कर दी है। इसी बीच गाइबांधा जिले के रामचंद्रपुर गांव में स्थित एक विशाल हिंदू धार्मिक परिसर भी विवादों के केंद्र में आ गया है। कट्टरपंथि समूहों के बढ़ते दबाव के बीच परिसर से जुड़े निर्माण कार्य को रोक दिया गया है। यह परिसर बांग्लादेश के सबसे अहम तीर्थ और सांस्कृतिक स्थलों में से एक बनता जा रहा था। सूत्रों के मुताबिक हाल के महीनों में यह परियोजना ऑनलाइन अभियानों और राजनीतिक विवादों का निशाना बन गई है। सूत्रों का कहना है कि इससे भी अधिक चिंता की बात सोशल मीडिया पर अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ बढ़ती भड़काऊ भाषा है। अल्पसंख्यक अधिकार कार्यकर्ता, नागरिक समाज संगठन और धार्मिक स्वतंत्रता के समर्थक सरकार से मांग कर रहे हैं कि वह नफरत फैलाने वाले भाषणों और कट्टरपंथी प्रचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और सभी नागरिकों को उनके धर्म की परवाह किए बिना समान सुरक्षा सुनिश्चित करे। इन घटनाओं के बीच बांग्लादेश में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या बहुलवाद और सह-अस्तित्व की भावना पर स्थापित देश अपनी विविध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रख पाएगा, या बढ़ते सांप्रदायिक दबाव आने वाली पीढ़ियों के लिए देश के सांस्कृतिक स्वरूप को बदल देंगे। सूत्रों के मुताबिक आरोप लगाए जा रहे हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई बांग्लादेश में चल रही हिंदू विरोधी गतिविधियों को समर्थन और वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। सिराज/ईएमएस 16 जून 2026