16-Jun-2026
...


पटना, (ईएमएस)। बिहार के राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने राज्य के सभी नवस्थापित 211 प्रखंड स्तरीय डिग्री कॉलेजों में आगामी शैक्षणिक सत्र से उर्दू और मैथिली विषयों की पढ़ाई शुरू करने का निर्देश दिया है। इस फैसले का उद्देश्य छात्रों को अपनी मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं में उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। कुलाधिपति सचिवालय की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया है कि राज्य में हाल ही में स्थापित 211 डिग्री कॉलेजों में फिलहाल नए शैक्षणिक सत्र, जो 1 जुलाई से शुरू होगा, के लिए केवल छह विषयों की पढ़ाई शुरू की जा रही है। इनमें- हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र शामिल हैं। हालांकि राज्यपाल ने निर्देश दिया है कि इन कॉलेजों में अगले शैक्षणिक सत्र से उर्दू और मैथिली विषयों को भी शामिल करने के लिए आवश्यक तैयारियां तत्काल शुरू की जाएं। - क्षेत्रीय भाषाओं को मिलेगा बढ़ावा राज्यपाल के इस निर्णय को बिहार की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बिहार में बड़ी संख्या में छात्र उर्दू और मैथिली भाषा से जुड़े हैं। ऐसे में इन विषयों की उच्च शिक्षा स्तर पर उपलब्धता बढ़ने से विद्यार्थियों को अपनी पसंद और पृष्ठभूमि के अनुरूप अध्ययन का अवसर मिलेगा। - कॉलेजों को करनी होगी आवश्यक तैयारी निर्देश के अनुसार संबंधित विश्वविद्यालयों और कॉलेज प्रशासन को उर्दू एवं मैथिली विषयों के लिए योग्य शिक्षकों की नियुक्ति, पाठ्यक्रम की व्यवस्था तथा अन्य शैक्षणिक संसाधनों की तैयारी सुनिश्चित करनी होगी। ताकि अगले शैक्षणिक सत्र से दोनों विषयों की पढ़ाई सुचारु रूप से शुरू की जा सके। - छात्रों को होगा लाभ शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उर्दू और मैथिली जैसे भाषाई विषयों को शामिल किए जाने से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के छात्रों को उच्च शिक्षा में अधिक विकल्प मिलेंगे। साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को भी नई मजबूती मिलेगी। बहरहाल राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन अब इन निर्देशों के क्रियान्वयन की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की तैयारी में जुट गए हैं, जिससे आगामी सत्रों में छात्रों को इन दोनों भाषाओं में भी स्नातक स्तर की पढ़ाई का अवसर मिल सके।