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16-Jun-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। हाल के दिनों में कांग्रेस पार्टी से अलग हुए धड़ों की संभावित वापसी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जारी हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी और शरद पवार की एनसीपी जैसी पार्टियों के कांग्रेस में विलय की अटकलों के बीच, कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने अपने पुराने सदस्यों और समान विचारधारा वाले दलों को घर वापसी का निमंत्रण दे दिया है। यह पहल विपक्षी एकता को मजबूत करने और आगामी चुनावों में भाजपा के खिलाफ एक सशक्त मोर्चा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने हाल ही में स्पष्ट किया कि जो भी कांग्रेस की विचारधारा में विश्वास रखता है, उसका पार्टी में स्वागत है। उन्होंने कहा कि इसतरह के विलय और घर वापसी से भाजपा की फासीवादी ताकतों के खिलाफ लड़ाई और मजबूत होगी। वेणुगोपाल ने कहा कि जो भी पार्टियां कांग्रेस में शामिल होना चाहती हैं, वे उनसे संपर्क कर सकती हैं। हालांकि, उन्होंने तुरंत स्पष्ट किया कि एआईसीसी के पास फिलहाल विलय का कोई औपचारिक प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और ये सभी बातें मीडिया की अटकलें मात्र हैं। बात दें कि वेणुगोपाल से पहले, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने भी इसतरह की बात कही थी। उन्होंने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत के सुझाव का समर्थन किया था, जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस से अलग हुए क्षेत्रीय दलों को वापस कांग्रेस में शामिल होना चाहिए। पूर्व सीएम गहलोत ने जोर दिया था कि देश में लोकतंत्र खतरे में है और विपक्षी एकता समय की मांग है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस से अलग हुई पार्टियां वापस आती हैं और राहुल गांधी को पूरे दिल से अपना नेता स्वीकार करती हैं, तब इससे देश भर में मतदान का पैटर्न पूरी तरह बदल सकता है। गहलोत का मानना है कि जनता अब नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी का सीधा मुकाबला देखना चाहती है, और यदि विपक्ष इस मोर्चे पर एकजुट होकर राहुल गांधी के पीछे खड़ा होता है, तब आगामी चुनावों की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। आशीष दुबे / 16 जून 2026