* गांधीनगर में दो दिवसीय अंतर्राज्यीय कार्यशाला का शुभारंभ, सुरक्षित प्रवासन और बाल अधिकारों पर मंथन * बाल श्रम उन्मूलन के लिए शिक्षा, पुनर्वास और राज्यों के समन्वय पर जोर, विशेषज्ञों ने साझा किए सफल मॉडल गांधीनगर (ईएमएस)| श्रम, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री कुंवरजी बावळिया ने स्पीपा, गांधीनगर में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर कहा कि श्रम नीति केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित न रहकर प्रत्येक श्रमिक परिवार और उसके बच्चे तक पहुंचनी चाहिए। ‘सुरक्षित प्रवासन और बाल मजदूरी उन्मूलन’ एक सामाजिक, आर्थिक और मानवीय कर्तव्य है, जिसे हम सभी को मिलकर निभाना है। 12 जून – विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के संदर्भ में बाल मजदूरी रोकथाम, बाल अधिकारों के संरक्षण और बच्चों के सर्वांगीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित दो दिवसीय अंतर्राज्यीय चर्चा का आयोजन मंगलवार को स्पीपा, गांधीनगर में श्रम, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री कुंवरजी बावळिया की विशेष उपस्थिति में किया गया। भारत की निरंतर विकास यात्रा में प्रवासी श्रमिकों के असाधारण योगदान की सराहना करते हुए मंत्री श्री कुंवरजीभाई बावळिया ने कहा कि देश के उद्योगों, निर्माण क्षेत्र, सेवा क्षेत्र और कृषि क्षेत्र का विकास प्रवासी श्रमिकों की मेहनत पर आधारित है, जो राष्ट्र निर्माण के वास्तविक आधारस्तंभ हैं। गुजरात जैसे प्रगतिशील और औद्योगिक राज्य में भी विभिन्न राज्यों से लाखों श्रमिक रोजगार के लिए आते हैं और राज्य की आर्थिक प्रगति में सहभागी बनते हैं। मंत्री बावळिया ने जोड़ा कि इस प्रवासन के साथ अनेक चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। जब कोई श्रमिक परिवार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है, तब उनके बच्चों की शिक्षा बाधित होती है, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं और कई बार वे सामाजिक सुरक्षा तथा बाल संरक्षण से वंचित रह जाते हैं। ऐसी परिस्थितियां बाल मजदूरी, बाल तस्करी और शोषण जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म देती हैं। इन गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकार अनेक बहुआयामी एवं सक्रिय प्रयास कर रही हैं। राज्य में बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन के लिए जिला स्तर पर कार्यरत टास्क फोर्स को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाया गया है। इसके अतिरिक्त विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय बढ़ाकर बच्चों के बचाव, पुनर्वास और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया को अत्यंत प्रभावी बनाया गया है। श्रमिकों के ऑनलाइन पंजीकरण, व्यापक जागरूकता कार्यक्रमों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस अवसर पर मंत्री ने दृढ़ विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि बाल मजदूरी का उन्मूलन केवल कानूनों के क्रियान्वयन से संभव नहीं होगा। इसके लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित वातावरण, स्वास्थ्य सुविधाएं और विकास के समान अवसर प्राप्त हों। बावळिया ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि “आइए, हम सभी मिलकर संकल्प लें कि प्रत्येक प्रवासी श्रमिक परिवार को अधिक सम्मानजनक जीवन मिले और प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा तथा उज्ज्वल भविष्य का अधिकार प्राप्त हो।” इस अवसर पर गुजरात राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष धर्मिष्ठा गज्जर ने कहा कि बाल श्रम केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों, सपनों और उनके भविष्य पर सीधा प्रहार है। देश के प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संरक्षण और गरिमापूर्ण जीवन जीने का समान अधिकार है। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 के ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लिए आज के बच्चों का शिक्षित और सुरक्षित होना अनिवार्य है। प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को आत्मसात करना होगा। देश का कोई भी बच्चा मजबूरी में श्रम करने के लिए विवश न हो, इस उद्देश्य से सरकार, सामाजिक नेताओं और स्वैच्छिक संस्थाओं को मिलकर कार्य करना होगा। बाल श्रम और मानव तस्करी के जोखिमों को रोकने के लिए उन्होंने सभी राज्यों से समन्वित और सामूहिक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि हम समय पर सूचनाओं का आदान-प्रदान, बच्चों की ट्रैकिंग व्यवस्था और पुनर्वास प्रक्रिया को अधिक सुदृढ़ बना सकें, तो बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। गुजरात सरकार ने इस दिशा में ‘राज्य कार्य योजना’ तैयार करके एक सराहनीय कदम उठाया है। श्रम आयुक्त के.डी. लाखाणी ने कहा कि बाल मजदूरी केवल कानूनी या आर्थिक प्रश्न नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा व्यापक सामाजिक मुद्दा है। देश के विभिन्न राज्यों से रोजगार की तलाश में प्रवास करने वाले परिवारों के बच्चों को शिक्षा, पोषण और सुरक्षा की सुविधाएं लगातार उपलब्ध रहें, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा अनेक योजनाओं और नीतियों का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा रहा है। कोई भी माता-पिता अपने बच्चे का भविष्य अंधकारमय नहीं देखना चाहता, इसलिए बाल मजदूरी के पीछे मौजूद मूल कारणों को समझना और उनका समाधान करना अत्यंत आवश्यक है। लाखाणी ने आगे कहा कि दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान प्रवासन और बाल मजदूरी के जोखिमों, बाल मजदूरी रोकथाम के लिए कानूनी एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं, बचाव, पुनर्वास और पुनःसमावेशन की प्रक्रियाओं तथा समुदाय आधारित हस्तक्षेपों जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। विभिन्न राज्यों के अनुभवों, सफल मॉडलों और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से बाल मजदूरी मुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रभावी रोडमैप तैयार करना इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है। इस अवसर पर एमजीएलआई के महानिदेशक प्रवीण सोलंकी ने कहा कि बाल मजदूरी कोई अलग समस्या नहीं है, बल्कि इसे सामाजिक-आर्थिक परिप्रेक्ष्य में देखना आवश्यक है। विशेष रूप से जब हमारा देश तीव्र विकास के साथ विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है, तब बाल मजदूरी समाज के लिए एक कलंक है, जिसे समाप्त करने के लिए सरकार और समाज को मिलकर कार्य करना होगा। देशभर में कानून और नियम समान होने के बावजूद विभिन्न राज्यों के परिणाम अलग-अलग होते हैं, इसलिए इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य यह है कि सभी प्रतिभागी खुले मन से अपने अच्छे और बुरे अनुभव साझा करें। कार्यक्रम में यूनिसेफ के सीएफओ डॉ. नारायण गावकर ने कहा कि गुजरात एक अग्रणी औद्योगिक राज्य होने के कारण यहां अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रमिक प्रवास करते हैं। ऐसी स्थिति में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आर्थिक प्रगति बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और स्वास्थ्य की कीमत पर न हो। प्रवासन भले ही रोजगार के अवसर प्रदान करता हो, लेकिन बच्चे जहां भी जाएं, उनके मूलभूत अधिकारों की रक्षा होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ वर्षों से सरकार और विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर बाल मजदूरी रोकने की दिशा में कार्य कर रहा है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए यूनिसेफ द्वारा तीन महत्वपूर्ण पहलुओं पर कार्य किया जा रहा है। पहला; परिवारों को अधिक सशक्त बनाना ताकि बच्चों को प्रवास न करना पड़े और बाल मजदूरी की रोकथाम हो सके। दूसरा; किशोरों को उचित शिक्षा, कौशल और सुरक्षित रोजगार की दिशा में मार्गदर्शन देना। तीसरा; शिक्षा को सबसे बड़ा सुरक्षा कवच मानते हुए बच्चों को निरंतर शिक्षा उपलब्ध कराना। सरदार पटेल लोक प्रशासन संस्थान (स्पीपा) में श्रम, कौशल विकास और रोजगार विभाग, महात्मा गांधी लेबर संस्थान (एमजीएलआई) और यूनिसेफ गुजरात के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस चर्चा सत्र के दौरान विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, नीति निर्माता, बाल अधिकार क्षेत्र में कार्यरत संस्थाएं तथा विषय विशेषज्ञ बाल मजदूरी उन्मूलन के सर्वोत्तम प्रयासों, सफल मॉडलों और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे। इस चर्चा के माध्यम से विभिन्न राज्यों के बीच ज्ञान और अनुभवों के आदान-प्रदान से बाल मजदूरी मुक्त समाज और देश के निर्माण हेतु प्रभावी मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इस अवसर पर गुजरात सहित राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सतीश/16 जून