16-Jun-2026


* 2010 से पहले भर्ती करीब एक लाख शिक्षकों पर टीईटी पास करने का दबाव, 20 जून तक जिलों में धरना और ज्ञापन कार्यक्रम अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात में किसानों के आंदोलन के बाद अब शिक्षक भी अपने अधिकारों की मांग को लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं। वर्ष 2010 से पहले भर्ती हुए शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट देने की मांग को लेकर विभिन्न शिक्षक संगठनों ने राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। शिक्षक संगठनों के अनुसार, बुधवार से 20 जून तक राज्य के सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान अलग-अलग तिथियों पर जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपकर सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखी जाएंगी। शिक्षक संघ और शैक्षिक संघ दोनों अपने-अपने स्तर पर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास करेंगे। दरअसल, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले के बाद वर्ष 2010 से पहले नियुक्त लगभग एक लाख शिक्षकों के सामने अपनी नौकरी बरकरार रखने के लिए टीईटी पास करने की चुनौती खड़ी हो गई है। जानकारी के अनुसार, इन शिक्षकों को वर्ष 2028 से पहले टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्ष 2010 से पहले टीईटी परीक्षा की व्यवस्था अस्तित्व में ही नहीं थी और उस समय लागू भर्ती नियमों के तहत ही उनकी नियुक्तियां हुई थीं। ऐसे में वर्षों का शिक्षण अनुभव रखने वाले शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है। इसलिए उन्हें इस नियम से छूट दी जानी चाहिए। शिक्षक नेताओं का मानना है कि लंबे समय से शिक्षा क्षेत्र में सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों को नई शर्तों के आधार पर कठिनाई में डालने के बजाय सरकार को मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। अब आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि शिक्षकों का यह आंदोलन सरकार पर कितना प्रभाव डालता है या फिर किसानों के आंदोलन की तरह यह आंदोलन भी धीरे-धीरे ठंडा पड़ जाता है। सतीश/16 जून