राज्य
16-Jun-2026


* औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह विफल, श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भाजपा सरकार नाकाम – डॉ. मनीष दोशी अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात प्रदेश कांग्रेस के मीडिया कन्वीनर एवं प्रवक्ता डॉ. मनीष दोशी ने राज्य में लगातार बढ़ रही औद्योगिक दुर्घटनाओं को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि फैक्टरी निरीक्षण के नाम पर केवल भ्रष्टाचार और हफ्ताराज चल रहा है, जिसके कारण श्रमिकों की जान जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि औद्योगिक सुरक्षा से जुड़े नियमों की लगातार अनदेखी किए जाने के कारण गुजरात फैक्टरी दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में पूरे देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है, जो अत्यंत गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि गुजरात में लगभग 31,500 फैक्ट्रियों में 16.93 लाख श्रमिक कार्यरत हैं, लेकिन इन श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए नियमों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं हो रहा है। राज्य सरकार औद्योगिक विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, जबकि जमीनी स्तर पर श्रमिकों की सुरक्षा पूरी तरह उपेक्षित है। डॉ. दोशी ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की भारत में आकस्मिक मृत्यु और आत्महत्या (एडीएसआई) रिपोर्ट-2024 का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2024 में देशभर में 742 फैक्टरी एवं मशीन दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 660 लोगों की मौत हुई। इसका अर्थ है कि देश में औसतन प्रतिदिन लगभग दो श्रमिक फैक्टरी दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि पिछले कुछ वर्षों में दर्ज होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आई है, लेकिन मौतों की संख्या अपेक्षाकृत धीमी गति से घटी है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रत्येक दुर्घटना में जान जाने की आशंका पहले की तुलना में अधिक गंभीर हो गई है। डॉ. दोशी ने बताया कि वर्ष 2024 में फैक्टरी दुर्घटनाओं में सर्वाधिक मौतें गुजरात में हुईं। आंकड़ों के अनुसार - गुजरात – 121 मौतें (देश में सर्वाधिक, लगातार तीसरे वर्ष प्रथम स्थान) राजस्थान – 95 मौतें महाराष्ट्र – 87 मौतें मध्य प्रदेश – 70 मौतें छत्तीसगढ़ – 52 मौतें उन्होंने आरोप लगाया कि जिन श्रमिकों के परिश्रम से गुजरात का पेट्रोकेमिकल, सिरेमिक, हीरा और टेक्सटाइल उद्योग फल-फूल रहा है, उन्हीं श्रमिकों की सुरक्षा को सरकार ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। फैक्टरी निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित रह गया है तथा भ्रष्टाचार और हफ्ता वसूली के कारण सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कराया जाता, जिससे बार-बार जानलेवा हादसे हो रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि राज्य के अनेक औद्योगिक एवं रासायनिक कारखानों में अग्नि सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं। इसके बावजूद फायर विभाग और प्रदूषण नियंत्रण तंत्र के अधिकारी गंभीर दुर्घटना होने के बाद भी समय पर सक्रिय नहीं होते। केवल कुछ दिनों तक दिखावटी कार्रवाई कर मामला ठंडा पड़ने दिया जाता है और बाद में फिर से कथित रूप से हफ्ता लेकर पूरा तंत्र निष्क्रिय हो जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार चुनावी चंदे के नाम पर करोड़ों रुपये के लेन-देन के कारण अवैध और नियमों का उल्लंघन करने वाली फैक्ट्रियों को संरक्षण दे रही है। ऐसी फैक्ट्रियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के बजाय हर बड़ी दुर्घटना के बाद सरकार केवल लीपापोती करती है। डॉ. दोशी ने कहा कि जब किसी दुर्घटना में निर्दोष श्रमिकों की मौत होती है तो सरकार मृतकों के परिजनों को दो-चार लाख रुपये की सहायता देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेती है, जबकि वास्तविक आवश्यकता दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम की है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार मंत्री से लेकर संबंधित अधिकारियों तक सभी की जवाबदेही तय करे तथा जिन औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी फैक्ट्रियों में नियमित और निष्पक्ष निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए तथा श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि भविष्य में किसी भी श्रमिक को सुरक्षा की कमी के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े।