अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प आज कल टैरीफ को लेकर चर्चा का विषय बने हुए हैं दरअसल ऑपरेशन सिंदूर के बाद ही राष्ट्रपति ट्रम्प के सीजफायर पर संसद में उनका गुणगान नहीं किया गया और बदले की भावना से रूस से भारत के तेल व्यापार का बहाना बनाकर भारत पर 25परसेंट टैरीफ लगाने का ऐलान कर दिया इससे भारत को चिंता करने की बात नहीं है अटलजी जब प्रधानमंत्री थे तो 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण पर भी आर्थिक प्रतिबंध इससे कहीं अधिक था लेकिन बाद में आर्थिक प्रतिबन्ध को हटाना पड़ा क्योंकि उससे अमेरिका का ही बाजार बन्द हुआ और नुकसान हुआ अब 25 परसेंट लगावो या 100 परसेंट भारत 140 करोड़ जनता का देश है और लोकतान्त्रिक व्यवस्था है अतः हम क्यों डरे भारत एक कृषि प्रधान देश है और हमारे मजदूर वर्ग क़ोई चोरी से नहीं मेहनत से रोटी के लिए खून पसीना एक कर देता है चाहे गर्मी हो या बरसात और एक आकड़ा के मुताबिक भारत के गरीब और मध्यम वर्ग के लोग बीजेपी को सबसे ज्यादा वोट देते हैं हमारा देश भगवान राम के आदर्शो पर चलने वाला देश है किसी भी देश की अपनी आतंरिक मामलों पर दखल देना हरगिज पसन्द नहीं करेगा भारत माता में हमारी पुरी आस्था है और हमारे जवान जुझारू हैं हमारी टेक्नोलॉजी को पुरी दुनिया लोहा मानती हैं अतः कभी भी भारत को किसी भी क्षेत्र में कम आंकना गलत होगा टैलेंटेड लोगो की खान है भारत, तभी अमेरिका के लाख मना करने और उसके सेटेलाईट को मात देकर परमाणु परीक्षण किया और देश में कलाम और चिदंबरम जैसे वैज्ञानिक हुए देश उस समय गर्व से एकता का प्रदर्शन किया और अभी भी भारत को इन सब से चिंता नहीं चैलेन्ज की तरह लेना चाहिए। इसी पर एक कहानी याद आती है एक बार गिद्धों का एक बड़ा झुंड उड़ता-उड़ता एक टापू पर जा पहुँचा। वह टापू समुद्र के बीचों-बीच था, जहाँ शांति ही शांति थी। मछलियाँ, मेंढक और छोटे समुद्री जीवों की भरमार थी। वहाँ गिद्धों को भोजन की कोई कमी नहीं थी। और सबसे बड़ी बात—टापू पर कोई शिकारी जानवर नहीं था। गिद्धों को जैसे स्वर्ग मिल गया हो। आरामदायक जीवन, बिना किसी खतरे के। हर दिन मौज-मस्ती, भरपेट भोजन और चैन की नींद। गिद्धों में अधिकतर युवा थे। उन्होंने वहीं बस जाने का मन बना लिया। वे बोले, “अब जंगल का क्या काम? वहाँ खतरे हैं, मुश्किलें हैं। हम यहीं रहेंगे, यही हमारा भविष्य है।” लेकिन उसी झुंड में एक बूढ़ा गिद्ध भी था। उसने वह जंगल देखा था जहाँ जीवन कठिन था, लेकिन सच्चा था। उसने शिकारी जानवरों से जूझना सीखा था, भूख में उड़ना सीखा था, और गिरकर उठना सीखा था।एक दिन बूढ़े गिद्ध ने सभा बुलाई। उसने कहा, “बेटों, यह टापू तुम्हें मजबूत नहीं बना रहा, यह तुम्हें कमज़ोर कर रहा है। तुम उड़ना भूल चुके हो, पंजे कुंद हो गए हैं, और आँखें आलस की धुंध में धँस चुकी हैं। चलो, लौट चलें जंगल की ओर, जहाँ जीवन कठिन है, लेकिन वो तुम्हें जीवित रहना सिखाता है।” युवा गिद्ध हँस पड़े। एक ने कहा, “बाबा, तुम पुरानी सोच के हो। अब जमाना बदल गया है। हमें आराम मिल रहा है, फिर जंगल क्यों लौटें?” बूढ़े ने बहुत समझाया, लेकिन कोई नहीं माना। वो अकेला ही उड़ गया। समय बीता। कुछ महीने बाद बूढ़े गिद्ध को अपने पुराने साथियों की याद आई। उसने सोचा, “देखूं, सब कैसे हैं।” वह वापस टापू पर लौटा।पर वहाँ जो उसने देखा, उससे उसकी आँखें भर आईं। हर ओर गिद्धों की लाशें पड़ी थीं। कुछ घायल गिद्ध तड़प रहे थे। उसने दौड़कर एक घायल गिद्ध से पूछा, “ये क्या हो गया?” घायल गिद्ध की आँखों में पश्चाताप था। उसने कहा, “बाबा, आपके जाने के कुछ दिन बाद एक जहाज आया। जहाज से कुछ शिकारी कुत्ते इस टापू पर छोड़ दिए गए। पहले तो उन्होंने कुछ नहीं किया, लेकिन फिर उन्हें पता चल गया कि हम उड़ नहीं सकते। हमारे पंजे बेकार हो चुके हैं, नाखून कुंद हो चुके हैं। फिर उन्होंने हम पर हमला किया।।। और एक-एक कर मार डाला। हम चाहकर भी भाग नहीं सके। हमें माफ कर दीजिए, हमने आपकी बात नहीं मानी।।।” बूढ़े गिद्ध ने सिर झुका लिया। वह जानता था, जो होना था, वह हो चुका है।अतः हमें अपने दम पर मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाने की कोशिश में लगे रहना चाहिए भारत आत्मनिर्भर देश है अंग्रेजो को भगाया आजादी में जी रहें हैं हमें किसी देश की धमकी नहीं डरा सकती है।अतः हम खुद ही अपने ताकत और ईमानदारी से मेहनत से उड़ते हैं हमारे पंजे बेकार नहीं हैं, हमारे आदर्श भगवान श्री राम है जिसमें गिद्ध ने भगवान के लिए अपने प्राण भी दे दिए और जटाउ ने तो रावण से सीता माता को रावण से विमान से छुराने के लिए संघर्ष किया और भगवान श्री राम की गोद में अपने प्राण त्याग दिया और उसी के भाई संपात्ति ने रामेश्वरम के धनुषकोटि से भगवान श्री राम के साथ वानर सेना को देखकर अपने भाई का हाल पूछा और राजा सुग्रीव और सभी वानर सेना सीता माता की खोज में निकलें थे और हताश हो गए थे तभी सम्पाती ने चट्टान के ऊपर से देखकर बता दिया की सीता माता लंका में रावण के अशोकवाटिका में बैठी है और तभी उसने ऐ भी कहा गिद्ध की नजर याने देखने की क्षमता अन्य प्राणियों से काफी अधिक होती है भारत एक ऐसा , देश है जो हजारों वर्षों से युद्ध लड़ता आया, जिसने ज्ञान, बलिदान, तप और त्याग की विरासत पाई थी। लेकिन अब वह टापू के गिद्धों की तरह दूसरे देश के झुण्ड में चलने से अच्छा अपना रास्ता चुने जो आत्मनिर्भर भारत गांधीजी का एक सपना था। भारत के वीर सेना के ऊपर ट्रम्प ने उनकी बहादुरी को बिलकुल दरकिनार कर दिया और अब चाहता है कि मेरा सिक्का भारत में चले ऐ देश के स्वाभिमान का प्रश्न है भारत का एक एक नागरिक अपने मातृभूमि से प्यार करता है सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं भारत माता के स्वाभिमान की रक्षा के लिए ऑपरेशन सिंदूर में उनकी भूमिका महान थी जिसे देश पर गर्व है।भारत आजाद है किसी से डरने की चिंता करना नहीं है मीडिया और विपक्ष को अब देश में ऑपरेशन सिंदूर के लिए सेना के प्रति रना सकारात्मक होना चाहिए घटना घटी वहाँ क़ोई सिपाही मौजूद नहीं था और आतंकवादी ने सभी पर्यटक को मार डालें कभी कभी घटना अनजाने में हो जाती है जिसे राज्य सरकार को देखना चाहिए लेकिन उन बीते हुए कल को याद कर किसी पर दोष देकर मीडिया और दूसरे देश में मज़ाक उड़ाते हैं लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद मारे गए पर्यटक को न्याय जरूर मिला जबकी 26/11/2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले में केवल आतंकवादी ही मारे गए और कसाब को इतना दिन तक जिन्दा क्यों रखा और यदि बयान देने और सवाल पूछने के बाद आखिर क्या हुआ। ईएमएस / 01 अगस्त 25