01-Aug-2025
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लंदन,(ईएमएस)। रूस के कमचटका प्रायद्वीप में हाल ही में आए 8.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने दुनिया को हिला दिया है। यह न केवल मानव जीवन और संपत्ति के लिए विनाशकारी रहा, बल्कि प्रकृति पर भी इसका गहरा प्रभाव देखा गया। भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से पहले जानवरों के असामान्य व्यवहार को लेकर वैज्ञानिक लंबे समय से शोध कर रहे हैं, जिसमें सबसे अधिक ध्यान सांपों पर गया है। इतिहास में कई इसतरह के प्रमाण हैं जब भूकंप से कुछ घंटे या दिन पहले हजारों सांप अचानक अपने बिलों से बाहर निकल आए। ये घटनाएं केवल संयोग नहीं हैं, बल्कि इन्हें वैज्ञानिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। सांप आमतौर पर गुप्त रूप से रहने वाले जीव हैं, जो हमेशा ही जमीन के नीचे रहते हैं, विशेष रूप से सर्दियों में जब वे हाइबरनेशन अवस्था में होते हैं। इसके बावजूद, कई बार देखा गया है कि वे भूकंप आने से पहले ठंडे मौसम में भी सांप बाहर आ जाते हैं। इस लेकर वैज्ञानिकों का मानना है कि सांप धरती के भीतर होने वाली छोटी-छोटी कंपन, विद्युत-चुंबकीय तरंगों और गैसों के बदलाव को महसूस कर सकते हैं। इस कारण वे खतरा महसूस करके अपने बिलों से बाहर निकलते हैं, और कभी-कभी खुले में घबराए हुए घूमते दिखाई देते हैं। इसी तरह के कुछ ऐतिहासिक उदाहरण चीन, इंडोनेशिया और भारत जैसे देशों में दर्ज हुए हैं। वर्ष 1920 में चीन के निगशिया प्रांत के हाइयुआन इलाके में जब 8.5 तीव्रता का भूकंप आया, तब भूकंप के कुछ घंटे पहले हज़ारों सांप ठंड के मौसम में भी अपने बिलों से बाहर निकल आए थे। तापमान तब -10 डिग्री सेल्सियस था, जो सामान्यतः सांपों के लिए बिल से बाहर निकलने का समय नहीं होता। इसके बाद 1976 में टांगशान में आए 7.6 तीव्रता वाले भूकंप से एक दिन पहले भी सांपों के झुंड जमीन पर दिखाई दिए थे। इसी तरह 2006 में इंडोनेशिया के जोगजकार्ता में आए भूकंप से पहले रात के समय सांपों को घरों में घुसने की कोशिश करते देखा गया। भारत में 2001 में आए गुजरात के भुज भूकंप के बाद भी बड़ी संख्या में सांप खुले इलाकों में दिखाई दिए थे। कई रिपोर्टों में बताया गया कि राहत शिविरों के पास सांप काटने की घटनाएं सामने आईं, जिससे यह माना गया कि भूकंप के कारण उनके बिल नष्ट हुए थे और वे बाहर आ गए थे। नेपाल और दक्षिण एशिया के अन्य हिस्सों में भी भूकंप और सुनामी के बाद सांपों में इसतरह का व्यवहार दर्ज किए गए। वैज्ञानिक अब इस दिशा में और गहराई से शोध कर रहे हैं कि क्या सांपों जैसे जीवों की मदद से भूकंप की पूर्व चेतावनी दी जा सकती है। हालांकि यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वे इन संकेतों को कैसे समझते हैं, लेकिन उनका व्यवहार इस ओर इशारा जरूर करता है कि प्रकृति में कोई ऐसा तंत्र है, जिसे इंसान अभी पूरी तरह समझ नहीं पाया है। यह रहस्यमयी व्यवहार भले ही आज भी विज्ञान के लिए एक पहेली बना हुआ हो, लेकिन इसमें भविष्य की आपदा चेतावनी प्रणालियों की संभावनाएं जरूर छिपी हैं। आशीष/ईएमएस 01 अगस्त 2025