नई दिल्ली (ईएमएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर अपनी कड़ी शर्तें रखीं हैं, जिससे वार्ता में बाधा आ रही है। ट्रंप की सोच यह है कि भारत उनकी शर्तों पर राजी हो जाएगा, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। ट्रंप ने विश्व भर के लिए ‘बुली अंकल सैम’ बनने की कोशिश की है, यानी प्रेशर टेक्निक के माध्यम से अपनी मंशा थोपने की नीति अपनाई है। हालांकि, उन्होंने चीन को अब तक नहीं झुका पाया है, जो यह दर्शाता है कि उनकी रणनीति हर देश पर प्रभावी नहीं हो रही। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर वार्ता जारी है, लेकिन अमेरिका की सख्त मांगों के कारण कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया है। ट्रंप ने भारत को 50 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने के लिए 21 दिनों का समय दिया है, जिससे साफ है कि वह वार्ता के लिए गंभीर हैं। यह दौर पूरी तरह ट्रेड डिप्लोमेसी पर निर्भर करेगा कि भारत अपने हितों की रक्षा कैसे करता है। भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने आंतरिक बाजार को मजबूत करे और घरेलू उत्पादों को बढ़ावा दे ताकि अमेरिका की दबावपूर्ण नीतियों का सामना कर सके। भारत को ट्रंप जैसी रणनीतियों का सामना करते हुए न केवल अपने व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखना होगा, बल्कि वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति भी मजबूत करनी होगी। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि भारत अमेरिका के दबावों को कैसे पार करता है और अपनी आर्थिक नीति को किस दिशा में ले जाता है। सतीश मोरे/7अगस्त