लेख
08-Aug-2025
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उत्तराखंड में बादल फटने से हुई तबाही से देशभर के लोग भावुक दिखाई दे रहे हैं। प्राकृतिक आपदाओं को नहीं रोका जा सकता लेकिन, उनसे होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है, जिसके लिये उत्तराखंड संभवतः तैयार नहीं था। स्तब्ध कर देने वाली बात यह है कि बादल फटने की सूचना के बाद घटना स्थल की ओर दौड़े डीएम और एसपी ही फंसे रहे, जबकि बारिश के मौसम में चिन्हित स्थानों पर टीमें तैनात और सतर्क रहनी चाहिये थीं लेकिन, यह दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि उत्तराखंड के अधिकांश प्रमुख मार्ग भूस्खलन के कारण बंद पड़े हैं। हालांकि तबाही के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बेहद सक्रिय दिखाई दिये और बुधवार को आपदा प्रभावित क्षेत्र में पहुंच कर उन्होंने पीड़ितों का दिल भी जीत लिया लेकिन, दूरगामी सोच और प्रशासनिक चुस्ती का सबक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अन्य सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लेना चाहिये, वे संभावित संकट को लेकर न सिर्फ स्वयं सतर्क हो जाते हैं बल्कि, संपूर्ण मशीनरी को जुटा देते हैं, उनकी सक्रियता के चलते बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोग सामान्य से बेहतर जीवन जी रहे हैं। उत्तराखंड की आपदा और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बेहतर प्रबंधन पर ही चर्चा कर रहे हैं बीपी गौतम... शांत स्वर्ग 20 सेकेंड में बन गया नर्क उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले के गांव धराली में बादल फटने से भारी तबाही हुई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बादल फटा, जिससे खीर गंगा नदी में सैलाब आ गया। पहाड़ से तेजी के साथ नीचे उतरा पानी अपने साथ घरों, होटलों, दुकानों और होम स्टे को बहा ले गया। धराली का मुख्य बाजार पूरी तरह तबाह हो गया है। खेत और बाग भी उजड़ गये हैं। प्रसिद्ध कल्प मंदिर भी मलबे में बह गया है। तमाम लोग लापता बताये जा रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मंगलवार की दोपहर में लगभग 1:50 बजे गांव के ऊपर बादल फटा, जिसके बाद मात्र 20 सेकंड में सब कुछ बदल गया। खीर गंगा नदी का पानी और मलबा मुख्य बाजार की ओर आया, जिससे लोगों ने बचने का प्रयास किया लेकिन, सब कुछ इतनी तीव्रता से हुआ कि बहुत सारे लोग कुछ नहीं कर पाये। प्रलय सा दृश्य था, जिसके बाद सिर्फ चीख-पुकार और आह की आवाजें ही बचीं। वीडियो देखने वालों के दहल गये दिल बादल फटने की घटना और सैलाब के कई वीडियो सामने आये, जो देशभर में फैल गये, जिन्हें देख कर देशभर में उत्तराखंड के लिये प्रार्थनायें होने लगीं। पहाड़ी से खीर गंगा नदी के कीचड़ भरे पानी की तेज धार का वीडियो देख कर लोगों का दिल दहल गया। एक के बाद एक घटना होने से बिगड़े हालात धराली में खीर गंगा में बादल फटने से आये मलबे और पानी के सैलाब ने ही जनजीवन तबाह कर दिया, इसके बाद हर्षिल के निकट तेलगाड में बदल फट गया, इससे जलस्तर बढ़ने और मलबा आने से हर्षिल हेलिपैड मलबे में दब गया। सेना के कैंप में पानी घुस गया, इसके कुछ देर बाद ही सुक्की के निकट अवाना बुग्याल से आने वाले नाला भी उफन गया, साथ ही पहाड़ी से भूस्खलन होने से भागीरथी नदी में तीन नदियों से एक साथ मलबा और पानी अधिक मात्रा में आने पर झील जैसी स्थिति बन गई है। कुछ नहीं पाये तो, करने लगे ईश्वर से प्रार्थना उत्तरकाशी के धराली में आये सैलाब में गांव वालों ने लोगों को सतर्क करने के उद्देश्य से लगातार सीटियां बजाईं, साथ ही चीखे भी पर, सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि लोगों को संभलने का भी अवसर नहीं मिला। जो लोग अपनी आँखों से सब कुछ देख रहे थे और चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे थे, वे अंत में पहाड़ी पर बैठकर अपने ईष्ट देवी-देवताओं से अपनों की सुरक्षा की प्रार्थना भी करते देखे। बकरियों का झुंड बह गया उत्तरकाशी जिले में बडकोट तहसील क्षेत्र के बनाल पट्टी में भारी अतिवृष्टि होने से चपेट में आई करीब डेढ़ दर्जन बकरियां कुड गदेरे में बह गईं। कुड गदेरा उफान पर आने से अफरा-तफरी मच गई। दो शव मिले, 20 लापता उत्तराखंड में आपदा के बाद बुधवार को सेना, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, पुलिस और फायर विभाग की टीमें कड़ी मेहनत करती हुई दिखाई दीं। हेलिकॉप्टर से खोज और बचाव कार्य लगातार चल रहा है, इस दौरान दो शव मिले हैं, जिससे अब मृतकों की संख्या छः हो गई है, वहीं मलबे में फंसे 11 जवानों सहित 13 लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है। सेना के दो घायल जवानों को हेलिकॉप्टर से हायर सेंटर भेज दिया गया है। धराली के आठ स्थानीय युवक, नेपाली मूल के दो व्यक्ति और सेना के 10 जवान सहित 20 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है। आशंका यह भी है कि यह संख्या और बढ़ सकती है। आगरा से पहुंची मदद, एलर्ट पर है बरेली आगरा एयरफोर्स स्टेशन से भी मदद भेजी गई है। सी- 295 और एएन- 32 सहित 5 विमान से आगरा एयरफोर्स स्टेशन से 114 जवान भेजे गये हैं, वे अपने साथ 13.5 टन आपदा राहत सामग्री लेकर गये हैं। ऑपरेशन के लिये बरेली में एमआई 17 और एएलएच एमके- 3 को भी हाईअलर्ट पर रखा गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रहे बेहद सक्रिय उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिला प्रशासन, भारतीय सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ सहित अन्य एजेंसियों से तत्काल वार्ता संपर्क स्थापित कराया और युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू करवाया। प्राथमिकता के आधार पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार व वायु सेना से रेस्क्यू अभियान के लिये दो एमआई और एक चिनूक मांगा गया, क्योंकि लगातार बारिश होने के कारण हेलिकॉप्टरों की उड़ान में बाधा आ रही थी। यूकाडा ने भी बचाव कार्यों के लिये दो निजी हेलिकॉप्टर तैयार रखे, इसके अलावा पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से फोन पर बात की और स्थित से उन्हें अवगत कराया, दोनों ने ही केंद्र की ओर से राज्य की हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया। ग्राउंड जीरो पर उतरे मुख्यमंत्री, रात्रि निवास किया मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं ग्राउंड जीरो पर उतर गये। मौसम की चुनौतियों के बाद भी वे उत्तरकाशी पहुंच गये, उन्होंने हवाई निरीक्षण कर आपदा ग्रस्त क्षेत्र में नुकसान का अनुमान लगाया, वहीं प्रभावितों से मिलकर सरकार की ओर से हरसंभव मदद देने का विश्वास दिया, साथ ही वे कैंप कार्यालय में अफसरों के साथ लगातार संवाद बनाये हुये हैं। मंगलवार को उत्तराखंड सरकार ने आपदा प्रभावित क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्यों में जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करने के लिये अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से उत्तरकाशी जिले में तीन पुलिस अधिकारियों की तैनाती कर दी थी। डॉक्टरों की छुट्टी निरस्त आपदा के बाद चिकित्सा सेवाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सतर्क कर दिया गया। विभाग ने डॉक्टरों की छुट्टी निरस्त करने के साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम आपदा प्रभावित क्षेत्र में तत्काल पहुंचने को कहा गया। घायलों के उपचार के लिये राजकीय मेडिकल कॉलेज दून व एम्स ऋषिकेश में बेड आरक्षित किये गये। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आपदा से हुये नुकसान पर दुःख व्यक्त करते हुये कहा कि स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिये गये हैं। उत्तरकाशी, टिहरी एवं देहरादून के जिला अस्पतालों के साथ ही दून मेडिकल कालेज व एम्स ऋषिकेश उपचार के लिये बेड आरक्षित किये गये हैं। राज्य सरकार आपदा प्रभावित लोगों की हरसंभव सहायता के लिये प्रतिबद्ध है। आपदा के बाद तैयारियों की पोल खुली, डीएम-एसपी ही फंसे धराली जाने को निकले डीएम प्रशांत आर्य और एसपी सरिता डोबाल नेताला के निकट गंगोत्री हाईवे बंद होने के कारण लगभग छः घंटे तक फंसे रहे। बीआरओ की मशीन को हाईवे खोलने के लिये कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, जिससे आपदा से पूर्व की गई तैयारियों की पोल भी खुल गई है। मानसून के दिनों में हर समय मशीनें तैनात करने के निर्देश गये थे। धराली में आई आपदा के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ लेकिन, घटना स्थल तक पर अफसर पहुंच नहीं पाये। देर शाम लगभग साढ़े आठ बजे मार्ग खुल पाया, जिसके बाद डीएम और एसपी घटना स्थल के लिये रवाना हो सके, जबकि भूस्खलन जोन में एब कुछ एक्टिव मोड पर रहना चाहिये था। 10 अगस्त तक है भारी बारिश की संभावना मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक रोहित थपलियाल ने बताया कि 10 अगस्त तक राज्य में भारी बारिश होने की संभावना है। विशेष कर पर्वतीय क्षेत्रों में तेज दौर की बारिश के आसार हैं, इसके बाद भी उत्तराखंड की सरकार और प्रशासन, उतना सतर्क नहीं था, जितना होना चाहिये था। इस बार का दर्द कभी नहीं जायेगा खीर गंगा का जलस्तर बढ़ने से 2023 में भी कई दिनों तक गंगोत्री हाईवे बंद रहा था और दुकानों व होटलों को भारी नुकसान हुआ था, इससे पूर्व 2017-18 में भी खीर गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण होटलों, दुकानों और कई घरों में मलबा घुस गया था, जिसके बाद लोगों का जीवन सामान्य होने में एक वर्ष का समय लग गया था। हालांकि उस समय जनहानि नहीं हुई थी, इस बार आर्थिक नुकसान बड़े स्तर पर हुआ है, साथ ही बड़े स्तर पर जनहानि भी हुई है, इसलिये इस बार संभलने में समय लगेगा लेकिन, अपनों के खोने का दर्द कभी नहीं जा सकेगा। भूस्खलन और मलबा से जाम है उत्तराखंड उत्तराखंड भूस्खलन और मलबा आने से जाम है, यह कहना अतिशियोक्ति नहीं होगा। राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ लगभग 59 सड़कें बंद हैं, इनमें 36 सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों की हैं। पिथौरागढ़ जिले में तवाघाट-घटियाबगड़-लिपुलेख राष्ट्रीय राजमार्ग में मलघट के पास मलबा आया है, जिससे वह बंद है, इसी तरह धारचूला-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग किलोमीटर 56.700 पर बड़े पत्थर आने से बंद है। यमुनोत्री और गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग जगह-जगह पर बंद है। यमुनोत्री हाईवे रानाचट्टी, स्यानाचट्टी व पाली गाड के पास मलबा आने के कारण मार्ग बाधित है, वहीं गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग डबरानी के पास मलबा व पत्थर आने के कारण मार्ग बाधित है। स्यानाचट्टी के पास यमुनोत्री हाईवे का लगभग 25 मीटर हिस्सा धंस गया है। जौलजीबी-मुनस्यारी मोटर मार्ग में कई स्थानों पर बड़े पत्थर आ गये हैं। थल-मुनस्यारी मार्ग के किलोमीटर 166.171 पर मलबा आ गया है। देहरादून जिले में पांच, अल्मोड़ा जिले में एक, बागेश्वर जिले में चार, चमोली जिले में आठ, नैनीताल जिले में एक, पौड़ी जिले में पांच, रुद्रप्रयाग जिले में चार, टिहरी जिले में एक और उत्तरकाशी जिले में 11 सड़कें बंद हैं, जिससे लोगों को भारी समस्या हो रही है, इसीलिये बचाव और राहत पहुँचाने में भी समस्या आ रही है। हालांकि गंगनानी तथा लिंचा ब्रिज क्षतिग्रस्त होने के कारण बैलीब्रिज बनाकर यातायात सुचारू करने के प्रयास किये जा रहे हैं, इसी तरह अन्य स्थानों पर भी टीमें जुटी हुई हैं। संकट से पहले तैयारी शुरू कर देते हैं योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को सबक लेना चाहिये। योगी आदित्यनाथ की विशेषता यह है कि वे संभावित संकटों से निपटने की तैयारी समय से पहले शुरू कर देते हैं। उत्तर प्रदेश के कुछेक जिलों में बाढ़ का खतरा रहता है लेकिन, मुख्यमंत्री ने बाढ़ आने से पहले ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की न सिर्फ मॉनिटरिंग शुरू कर दी बल्कि, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों और राहत विभाग को कड़े दिशा-निर्देश भी जारी कर दिये। उन्होंने टीम-11 में सम्मिलित मंत्रियों को भी बाढ़ प्रभावित जिलों में जाने को कह दिया। उत्तर प्रदेश के 17 जिले, इन जिलों की 37 तहसीलें और 402 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं, जहां एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी के जवान चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग कर रहे हैं। अब तक 343 लोगों के मकानों को नुकसान पहुंचा है, इनमें से 327 लोगों को सहायता राशि भी दी जा चुकी है। 29 लंगरों के द्वारा पीड़ितों को भोजन की सुविधा दी जा रही है। 905 बाढ़ शरणालयों में 11 हजार से अधिक लोगों को शरण दी जा चुकी है, जहां 757 मेडिकल टीमें स्वास्थ्य की जांच कर रही हैं, साथ ही 1193 बाढ़ चौकियों की स्थापना की गई है, जो प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही हैं। मुख्यमंत्री ने साथी मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ को प्रयागराज, मिर्जापुर व बांदा, स्वतंत्र देव सिंह और संजय गंगवार को जालौन, स्वतंत्र देव सिंह और प्रतिभा शुक्ला को औरैया, रामकेश निषाद को हमीरपुर, जयवीर सिंह को आगरा, सुरेश खन्ना को वाराणसी, संजय निषाद को कानपुर देहात, धर्मवीर प्रजापति को इटावा, अजीत पाल को फतेहपुर और दयाशंकर दयालु को बलिया पर नजर रखने का दायित्व सौंपा है। (लेखक, दिल्ली से प्रकाशित हिंदी साप्ताहिक गौतम संदेश के संपादक हैं) ईएमएस/08/08/2025