आज के दौर में जब समाज तेज़ी से बदल रहा है। तब नेतृत्व करने वाले सेलिब्रिटीज की भूमिका केवल दिशा दिखाने तक सीमित नहीं रह सकती है। उन्हें समझना होगा, उनके शब्द, व्यवहार, आचरण और निर्णय का आम लोगों पर गहरा असर होता है। सेलिब्रिटीज चाहे राजनीतिक नेता हो, धार्मिक गुरु हो, प्रोफेसर हो या वैज्ञानिक हो या फिल्मी और खेल जगत की हस्तियां हों। सभी की लोकप्रियता आम लोगों पर गहरा प्रभाव डालती हैं। आम जनता उनका अनुसरण करती है। ऐसे में उनकी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी कई गुना अधिक बढ़ जाती है। जैसे-जैसे उनकी लोकप्रियता बढ़ती है। उसी के साथ उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ती चली जाती है। आज के दौर में मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से नेताओं और सेलिब्रिटीज़ का प्रभाव करोड़ों लोगों तक स्थाई रूप से पहुंचता है। यह लंबे समय तक समाज में बना रहता है। सेलिब्रिटीज यदि किसी विचारधारा जाति धर्म संप्रदाय किसी उत्पाद, अनुचित आचरण का प्रचार करते हैं। उनका यह आचरण समाज को एकजुट करने का नहीं होता है। उनके आचरण में यदि वास्तविकता नहीं होती है। तो उसका असर समाज की सोच और जीवनशैली पर पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, विज्ञापनों में तंबाकू, शराब या जंक फूड गेम्स जिनमें जुये की तरह पैसा लगाया जा रहा था। गेम्स के माध्यम से लोगों को मोबाइल के नशे से बांधा जा रहा है। इस तरह के उत्पाद सामाजिक उन्मुक्तता, नैतिकता के स्थान पर अनैतिक तरीके से पैसे कमाने को बढ़ावा देना, समाज को गलत दिशा में ले जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में हजारों लोगों ने आत्महत्या कर ली। शेयर बाजार और गेम्स में फंसकर परिवार सहित आत्महत्या करने लगे। इसी तरह राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के गैर-जिम्मेदाराना बयान समाज में विभाजन और तनाव को जन्म दे रहे हैं। जिसके कारण सामाजिक अशांति तेजी के साथ बढ़ रही है। धार्मिक और जाति आधार पर जो वेमनष्यता बढ़ रही है। अब उसका असर घर-घर तक पहुंचने लगा है। पति-पत्नी, मां-बेटे, भाई-बहन एवं सामाजिक स्तर पर जिस तरह की हिंसक प्रवत्ति दिख रही है। वह बहुत बड़ी चिंता का कारण बन रहा है। राजनीतिक सामाजिक एवं किसी भी तरह के नेतृत्व की सबसे बड़ी कसौटी यही है। व्यक्ति अपने व्यक्तिगत लाभ के साथ-साथ परिवार एवं समाज के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता मे रखे। नेतृत्वशीलता केवल अपने हित साधन में रहेगी, तो उनकी विश्वसनीयता और नैतिक बल दोनों ही कमजोर हो जाते हैं। कुछ समय के लिए जरूर फायदा हो जाता है। जब स्थितियां सामने आती हैं, तब उन्हें दीर्घकालीन नुकसान ही होता है। आम जनता जिनके ऊपर अघाध विश्वास करती थी, फिर वह कभी उन पर विश्वास नहीं कर पाती है। ईमानदारी, संयम और दूरदृष्टि के साथ नैतिकता के साथ सेलेब्रिटी अपना दायित्व पूरा करते हैं। वह न केवल समाज बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श स्थापित कर, परिवार एवं समाज के बीच यश के साथ बने रहते हैं। भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में यह और भी जरूरी है। जनता का मार्गदर्शन करने वाले लोग अपनी जिम्मेदारियों को समझें। उनकी हर गतिविधि से समाज सीखता है। अगर वे संतुलित, सच्चे और जनहितकारी फैसले लेंगे, तो निश्चित रूप से समाज और राष्ट्र को मजबूती मिलेगी। आध्यात्मिक क्षेत्र में कहा जाता है नेतृत्व करने वाले को इसका 25 फ़ीसदी पुण्य मिलता है, यदि गलत दिशा में ले जाता है, तो 25 फ़ीसदी पाप कर्म का बंध बनता है। भगवान राम के अनुष्ठान में पुरोहित के रूप में रावण ने यज्ञ पूरा कराया था। उस समय राम और रावण के मन में एक पल के लिए भी यह भाव नहीं आया। वह अपने कर्तव्यों से हट जाएं। इसलिए आवश्यक है, नेतृत्व करने वाले लोग अपने प्रभाव और लोकप्रियता की शक्ति को पहचानें। उसका सही दिशा में उपयोग करें। कुल, परिवार, सामाजिक,नैतिक एवं आध्यात्मिक जवाबदेही का पालन करते हुए सच्चा नेतृत्व करें। जनता का विश्वास और सम्मान वही नेता लंबे समय तक पा सकता है। जो स्वयं को मानव समाज के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदार मानकर अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करता है। हजारों लाखों वर्षों का इतिहास गवाह है। यहां कबीर जैसे संतो की पहचान कई पीढियों तक पीढ़ी दर पीढ़ी देखने को मिलती है। आज हमारे पास कबीर नहीं है। लेकिन कबीर पर सारी दुनिया में हजारों पीएचडी हुई हैं। भारत में ही ऐसे हजारों सेलिब्रिटीज पूर्व में रह चुके हैं जो जिंदा रहते हुए। उतने लोकप्रिय नहीं हुए थे, जो मरने के बाद हुए। अब उनकी गाथाएं एक पीढ़ी से आने वाली पीढ़ी तक पहुंच रही हैं। ईएमएस / 29 अगस्त 25