मामला सिंगोड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का, न डॉक्टर और न दवाईयां, जिला अस्पताल करते हैं रेफर छिंदवाड़ा जबलपुर (ईएमएस)। अमरवाड़ा विकासखंड के ग्राम सिंगोड़ी के स्वास्थ्य केन्द्र राज्य सरकार के सपने पर पानी फेरने में लगा हुआ है। मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए शासन करोड़ों रूपए पानी की तरह बहा रहा है ताकि आम जनों को सुलभ और अच्छा इलाज मिल सके, लेकिन इस स्वास्थ्य केन्द्र के हाल-बेहाल है। इसे विभागीय लापरवाही कहें या फिर स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता। सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। अमरवाड़ा विधानसभा का ३० बिस्तरों वाला बड़ा अस्पताल कहलाने वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में आयुर्वेद चिकित्सकों के भरोसे है। यहां लंबे समय से एबीबीएस डॉक्टर की पोस्टिंग नहीं की गई है। इसके चलते आयुर्वेद चिकित्सक ही मरीजों का इलाज कर रहे है। ऐसे में यदि कोई बड़ी बीमारी फैलती है या बड़ा हादसा होता है तो लोगों को स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाती। उन्हें छिंदवाड़ा या अमरवाड़ा के अस्पतालों का सहारा देना पड़ता है। 10 हजार वर्गफिट में बना सिंगोड़ी ग्राम का स्वास्थ्य केन्द्र के मरीज सुविधाओं के लिए तरस रहे है। ऐसा लगता है कि इस अस्पताल को देखने वाला कोई नहीं है। यहां के हालात कई वर्षो से ऐसे ही बने हुए हैं। सिर्फ नाम का है ३० बिस्तरों का अस्पताल इस स्वास्थ्य केन्द्र की खासियत यह है कि इस स्वास्थ्य केन्द्र में केवल एक ही आयुर्वेद चिकित्सक है। जिस पर पूरे मरीजों का भार है। वे और उनका अमला कभी समय पर नहीं आता और धोखे से यदि कभी आ भी गए तो चले जाते हैं। ऐसे में यहां के मरीज झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराने मजबूर है। ३० बिस्तरों वाले इस अस्पताल में न तो चिकित्सकों की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही यहां मरीजों के लिए पर्याप्त दवाई उपलब्ध है। यहां कोई सडक़ हादसा या कोई घटना अचानक हो जाए तो गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल ले जाने परिजन मजबूर हो जाते हैं। जायजा लेने के बात कहकर नहीं आते अधिकारी सिंगोड़ी स्वास्थ्य केन्द्र के हालात देखते हुए लगता है कि यह अस्पताल सिर्फ नाम के लिए ही बना है। राज्य सरकार भले ही करोड़ों रूपए पानी की तरह लोगों के स्वस्थ्य इलाज के लिए खर्च कर रही हो लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सिंगोड़ी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सरकार के प्रयासों पर पलीता लगाने कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हंै। मरीजों ने यहां चिकित्सक न होने की शिकायत कई बार मुख्य चिकित्सा अधिकारी और बीएमओ तथा जनप्रतिनिधियों से भी की है, लेकिन सभी का एक सा रटारटाया जवाब होता है, वे खुद स्वास्थ्य केन्द्र जाकर जायजा लेंगे और जो कमी है उसे पूरा करेंगे, लेकिन न तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और न ही जनप्रतिनिधि ने अब तक इस अस्पताल की सुध नहीं ली। इसके कारण हालात दिनों-दिन बद से बदतर हो रहे हैं। ईएमएस / 29/08/2025