नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान दवाइयों और ऑक्सीजन के अवैध भंडारण और वितरण के मामले में भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर समेत अन्य के खिलाफ ड्रग कंट्रोलर की ओर से दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है हाईकोर्ट में जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने फैसला सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। कोर्ट में गौतम गंभीर की तरफ से पेश वकील ने दलील देते हुए कहा कि गौतम गंभीर पूर्व सांसद, पूर्व क्रिकेट कप्तान और मौजूदा कोच हैं। कोविड महामारी के दौरान उन्होंने लोगों की मदद के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाइयां मुफ्त बांटी हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यह बातें इस मामले में बताने का कोई मतलब नहीं है। हाईकोर्ट में जब गौतम गंभीर के वकील ने उनके राजनीतिक और क्रिकेट करियर का जिक्र किया तो कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आप बार-बार नाम और पहचान गिनवा रहे हैं, जैसे यह कोर्ट में कोई असर करेगी। हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट में नाम नहीं, सिर्फ तथ्य और कानून चलते हैं। वकील ने माफी मांगते हुए कहा कि उनका मकसद नेम ड्रॉपिंग करना नहीं था। उन्होंने आग्रह किया कि या तो ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए या हाईकोर्ट उनकी याचिका 8 सितंबर से पहले सुन ले, क्योंकि उस दिन ट्रायल कोर्ट में सुनवाई तय है। बता दें, 2021 में कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली ड्रग कंट्रोल विभाग ने गौतम गंभीर, उनकी पत्नी नताशा गंभीर, मां सीमा गंभीर और फाउंडेशन की सीईओ अपराजिता सिंह के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत शिकायत दर्ज करवाई थी। हालांकि, इस मामले में आरोप यह है कि गौतम गंभीर फाउंडेशन ने कोविड-19 के दौरान बिना वैध लाइसेंस के दवाओं का स्टॉक और वितरण किया। वहीं, अधिनियम की धारा 18(सी) बिना लाइसेंस दवा बेचने या वितरित करने पर रोक लगाती है। साथ ही, धारा 27 के तहत यह अपराध 3 से 5 साल की सजा और जुर्माने से दंडनीय है। अजीत झा/ देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/30/अगस्त/2025