राज्य
03-Sep-2025
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अनंत चतुर्दशी पर बड़ा गणेश मंडल करेगा बप्पा को विदाई मुंबई, (ईएमएस)। गणेशोत्सव मुंबई के सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन का एक अभिन्न अंग है। इस वर्ष गणेशोत्सव के सातवें दिन, यानी 2 सितंबर को, आधी रात तक मुंबई में कुल 54,353 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इनमें सार्वजनिक और घरेलू गणेश प्रतिमाएँ शामिल हैं। मुंबई महानगरपालिका प्रशासन के अनुसार, विसर्जन की पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। गणेशोत्सव को लेकर मुंबईवासियों का उत्साह इस वर्ष भी बरकरार है। विसर्जन जुलूस ढोल-नगाड़ों, गुलाल और गणपति बप्पा मोरया के जयकारों और भक्ति से सराबोर थे। खास तौर पर, सार्वजनिक गणेश मंडलों के जुलूसों ने मुंबई की सड़कों को उत्सवी रूप प्रदान किया। कई मंडलों ने सामाजिक संदेश देने वाले कार्यक्रम भी आयोजित किए। इस वजह से गणेशोत्सव ने एक अलग ही ऊंचाई हासिल की। ​​गणेशोत्सव का उत्साह अभी भी बरकरार है। आने वाले दिनों में और भी सार्वजनिक प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। खासकर दसवीं और ग्यारहवीं के दिन, अनंत चतुर्दशी पर, बड़ी गणेश मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा। इसके लिए, मनपा प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मनपा द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में सातवें दिन घरेलू गणेश मूर्तियों का विसर्जन बड़े पैमाने पर किया जाता है, जबकि सार्वजनिक मूर्तियों का विसर्जन अपेक्षाकृत कम होता है। इसका कारण यह है कि कई सार्वजनिक गणेश मंडल 10 या 11 दिनों तक गणेशोत्सव मनाते हैं। इसलिए, उनकी मूर्तियों का विसर्जन बाद में होता है। दूसरी ओर, घरेलू मूर्तियों का विसर्जन आमतौर पर डेढ़, पांच या सात दिनों के बाद किया जाता है। मनपा प्रशासन ने बताया कि घरेलू गणेश मूर्तियों के विसर्जन की दर अधिक है। मनपा, पुलिस प्रशासन और गैर सरकारी संगठनों ने मिलकर विसर्जन प्रक्रिया के लिए कड़े इंतजाम किए हैं नागरिकों से शाडू मिट्टी से बनी मूर्तियों को कृत्रिम तालावों में विसर्जित करने का आग्रह किया गया। इससे समुद्र और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों पर प्रदूषण का भार कम करने में मदद मिली। गिरगांव चौपाटी, जुहू बीच, वर्सोवा, माहिम, दादर और मुंबई के कई अन्य स्थानों पर विसर्जन की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा, महानगर पालिका ने हर प्रभाग में कृत्रिम तालावें बनाईं। इससे नागरिक आस-पास के स्थानों पर विसर्जन कर सकते थे। इस वर्ष, मोबाइल विसर्जन वैन का भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया। इससे नागरिकों के लिए घर में बनी मूर्तियों का विसर्जन करना अधिक सुविधाजनक हो गया। विसर्जन प्रक्रिया के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए मुंबई पुलिस प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी। विसर्जन स्थल पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। तैराकों और बचाव दल को भी तैयार रखा गया था। इसके अलावा, पूरी प्रक्रिया पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से निगरानी रखी गई थी। इन सभी उपायों के कारण, विसर्जन प्रक्रिया शांतिपूर्ण और सुरक्षित रूप से संपन्न हुई। प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सातवें दिन तक किसी भी दुर्घटना या अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। * पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव पर प्रतिक्रिया महाराष्ट्र सरकार और महानगरपालिका प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण हेतु पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव मनाने की अपील की थी। इसके परिणामस्वरूप, कई गणेश मंडलों और नागरिकों ने शाडू मिट्टी से बनी मूर्तियों का उपयोग किया। मनपा ने कृत्रिम तालावों में विसर्जित मूर्तियों के अवशेषों को उठाने का प्रबंध किया। इसके अलावा, विसर्जन के बाद समुद्र तट और अन्य स्थानों पर सफाई अभियान चलाया गया। इस सफाई अभियान में कई गैर-सरकारी संगठनों ने भाग लिया। इससे विसर्जन स्थलों को साफ-सुथरा रखना संभव हो सका। स्वेता/संतोष झा- ०३ सितंबर/२०२५/ईएमएस