लेख
30-Nov-2025
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एड्स के प्रति सामाजिक कलंक को कम करने के लिए चरित्र निर्माण आवश्यक है। इससे लोग एड्स से प्रभावित लोगों का सम्मान करने और उनके प्रति सहानुभूति करने के लिए अधिक इच्छुक होते हैं।चरित्रवान व्यक्ति एड्स से बचाव के बारे में जागरूकता फैलाते हैं और दूसरों को भी सुरक्षित रहने के लिए प्रेरित करते हैं।वही समुदाय की मजबूत भागीदारी और सहयोग एड्स की रोकथाम और नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।वास्तव में चरित्र निर्माण लोगों को एड्स रोकथाम के लिए सामूहिक जिम्मेदारी लेने के लिए प्रोत्साहित करता है। एड्स की रोकथाम में चरित्र निर्माण की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह व्यक्तिगत रूप में सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करता है, जो एड्स वायरस के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है।आंकड़ो पर गौर करे तो सन 2024 में दुनियाभर में लगभग 630,000 लोग एड्स से संबंधित बीमारियों कारण से मर गए। वही इससे पूर्व सन 2023 में भारत में 2.5 मिलियन से अधिक लोग एचआईवी के साथ जी रहे थे,जो एक चिंताजनक हालत है।हालांकि युनाइटेड नेशन यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि सन 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा माना न जाए।वर्तमान सन 2025 में, एचआईवी संक्रमण को रोकने के लिए नए और बेहतर विकल्प उपलब्ध हो गए हैं। एक उल्लेखनीय प्रगति अधिक प्रभावी प्री-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस दवाओं का विकास हुआ है। इस दवा की एक गोली प्रति दिन खाने से एड्स रोग के उच्च जोखिम रखने वाले लोगों में एचआईवी संक्रमण के जोखिम को काफी कम करती है।जो एक आशाजनक संकेत कहा जा सकता है।एड्स मामलों के लिए यूएन संस्था का कहना है कि सन 2030 तक, सार्वजनिक स्वास्थ्य ख़तरे के तौर पर एड्स महामारी का अन्त करने में मानवाधिकारों की अहम भूमिका बन सकती है।यूएन एजेंसी ने एक दिसम्बर को ‘विश्व एड्स दिवस’ से पहले जारी अपनी एक नई रिपोर्ट में यह निष्कर्ष साझा किया ।यह रिपोर्ट बताती है कि कथित कलंक, भेदभाव और दंडित करने वाले क़ानूनों की वजह से एचआईवी के विरुद्ध लड़ाई में बाधाओं का सामना करना पड़ता है।हालांकि एचआईवी के उपचार व रोकथाम की दिशा में अब तक ठोस प्रगति दर्ज की गई है, मगर मानवाधिकारों के उल्लंघन की वजह से एड्स को लेकर अति-आवश्यक सेवाओं तक पहुँच पाना कठिन साबित हो रहा है।जिसमे समय के साथ बदलाव लाने की आवश्यकता है।बीते सन 2023 में 6 लाख 30 हज़ार लोगों की एड्स-सम्बन्धी बीमारियों की वजह से मौत हुई थी,वही 13 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित होना पाए गए थे। अफ्रीका में हर दिन, 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग में 570 युवतियाँ एचआईवी से संक्रमित होती हैं।पुरुषों की तुलना में उनके संक्रमित होने की दर तीन गुना बढ़ गई है।जबकि विश्व भर में, 93 लाख लोग एचआईवी की अवस्था में जीवन गुज़ार रहे हैं, जिन्हें जीवनरक्षक उपचार तक नहीं मिल पा रहा है।एड्स उपचार के लिए वैज्ञानिक क्षेत्र में आशाजनक प्रगति हासिल की गई है, इंजेक्शन के ज़रिये दी जाने वाली दवाएँ चूंकि लम्बे समय तक रक्त में मौजूद रहती हैं,इसलिए ज्यादा प्रभावी हैं।लेकिन इन दवाओं की ऊँची क़ीमतों और सीमित स्तर पर उत्पादन की वजह से वे आम आदमी की पहुँच से बाहर हैं। जिनीवा स्थित एक मेडिकल युनिवर्सिटी के एचआईवी विभाग की ऐलेक्सांड्रा काल्मि ने कहा कि जीवन की रक्षा करने वाले चिकित्या उपायों व उपचार के साथ मानवीय व्यवहार भी जरूरी है। (लेखक वरिष्ठ सामाजिक चिंतक व स्तम्भकार है) (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 30 नवम्बर/2025