राष्ट्रीय
30-Nov-2025
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। राजस्थान और मध्य प्रदेश में संदिग्ध कफ सिरप पीने से कई बच्चों की मौत के बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने कफ सिरप की बिक्री पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। नए आदेश के तहत अब डॉक्टर के लिखे पर्चे के बिना कोई भी मेडिकल स्टोर कफ सिरप नहीं बेच सकेगा। साथ ही, हर बिक्री का विवरण एक रजिस्टर में अनिवार्यत: दर्ज करना होगा, जिसमें खरीदार और पर्चा लिखने वाले डॉक्टर का ब्यौरा भी दर्ज करना होगा। सरकारी आदेश के बाद सभी मेडिकल स्टोर और निजी अस्पतालों जहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कफ सिरप की बिक्री होती है, पर विशेष निगरानी रखी जा सकेगी। अनुमान है कि ऐसा करने से न केबल कफ सिरप की अवैध बिक्री पर रोक लग सकेगी, बल्कि अवैध, मिलावटी या निम्न गुणवत्ता वाली दवाओं की बिक्री भी रोकी जा सकेगी। सरकार का कहना है कि इन नियमों से मिलावटी दवाओं की बिक्री, फर्जी कंपनियों का कारोबार तथा कफ सिरप के दुरुपयोग पर रोक लगेगी, जबकि मरीजों को केवल सुरक्षित और डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवा ही उपलब्ध कराई जा सकेगी। गौरतलब है कि साधारण खांसी-जुखाम होने पर सामान्यत: लोग बिना डॉक्टर को दिखाए और पर्चा लिखवाए ही मेडिकल दुकान से कफ सिरप खरीद कर उसका इस्तेमाल करते रहे हैं। बड़ी तादाद में कफ सिरप का इस्तेमाल नशे के लिए भी किए जाने के आरोप लगते रहे हैं। बढ़ती कफ सिरप की मांग के चलते मुनाफाखोर कथित कंपनियां और मेडिकल दुकान वाले निम्न गुवात्ता वाले कफ सिरप भी बेंच रहे थे, जिस कारण मासूमों की मौत का मामला भी सामने आ चुका है। ऐसे में नए नियमों के बाद अब केवल वैध पर्चे पर ही कफ सिरप मिल सकेगा, जिससे बिक्री पर नियंत्रण आसान होगा। यहां बताते चलें कि राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई जिलों में स्थानीय ब्रांड के कफ सिरप पीने से करीब एक दर्जन बच्चों की मौत हुई थी। सिरप में डाइ-इथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) और इथिलीन ग्लाइकोल (ईजी) जैसे खतरनाक तत्व पाए जाने की आशंका जताई गई थी। इसके मद्देनज़र औषधि नियंत्रण विभाग ने सभी राज्यों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हिदायत/ईएमएस 30नवंबर25