15-Dec-2025


- राजधानी में कचरे का पहाड़ नगर निगम के लिए बना सिरदर्द भोपाल (ईएमएस)। शहर से निकलने वाले कचरे का पहाड़ नगर निगम भोपाल के लिए सिरदर्द बन गया है। आदमपुर छावनी स्थित नगर निगम की लैंडफिल साइट में लाखों टन कचरे के कई पहाड़ बन गए हैं। जिसमें बार-बार आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। अप्रैल 2025 में ही कचरे में लगी आग 5 दिन तक धधकती रही। जिससे आसपास के 7 गांव के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी, धुंए के कारण उनका सांस लेना भी मुश्किल हो गया था। इस मामले में नगर निगम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई थी। वहीं इससे पहले एनजीटी कचरे में आग की वजह से नगर निगम पर करोड़ो रुपये का जुर्माना लगा चुका है। इसके बाद भी न तो कचरा खत्म हो रहा और न ही इसमें आग लगनी बंद हो रही है। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने बताया कि इसके पहले कचरा निष्पादन की जिम्मेदारी जिन कंपनियों को दी गई थी। उन्होंने सही से काम नहीं किया। साथ ही कचरे में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ीं। कचरा निष्पादन करने वाली एजेंसियों की लापरवाही के कारण नगर निगम को एनजीटी और कोर्ट के चक्कर भी लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब जो भी ठेकेदार या एजेंसी लेगेसी वेस्ट के वैज्ञानिक निष्पादन के लिए सामने आती है, तो उन्हें वहां लगने वाली आग की जिम्मेदारी भी लेनी होगी। जिससे एजेंसी की लापरवाही का खामियाजा निगम को न भुगतना पड़े। आग नहीं बुझने पर रोज 10 लाख पेनाल्टी नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इस बार टेंडर में कई शर्तें जोड़ी गई हैं। इनमें सबसे प्रमुख अग्नि सुरक्षा और धुंए के नियंत्रण की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होगी। यदि कचरे में आग लगती है और दो घंटे तक बुझाई नहीं जाती तो उस दिन 10 लाख रुपये की पेनाल्टी और इसके बाद जब तक आग नहीं बुझती प्रतिदिन 10 लाख की पेनाल्टी वसूली जाएगी। वहीं नई एजेंसी या ठेकेदार को प्रतिदिन 3 हजार टन कचरे का निष्पादन करने का अनुभव होना चाहिए। इसके साथ ही लैंडफिल साइट पर सुरक्षा की जिम्मेदारी भी चयनित एजेंसी को लेनी होगी। 7 साल पहले बंद की गई पुरानी कचरा खंती बता दें कि साल 2017 तक शहर का पूरा कचरा भानपुर खंती में डंप किया जाता था। लेकिन जनवरी 2018 में भानपुर खंती बंद होने के बाद वहां का करीब दो लाख टन कचरा आदमपुर छावनी में वैज्ञानिक निष्पादन के लिए डंप किया गया था। इसका भी अब तक कुछ नहीं हो पाया है। अब यह कचरा यहां सड़ रहा है। इससे निकलने वाली दुर्गंध से आसपास के आधा दर्जन गांव के रहवासी परेशन हैं। वहीं पॉलीथिन उडक़र और कचरे से निकलने वाला लीचेट बहकर जमीन व भूजल को दूषित कर रहा है। 47 साल के बराबर चार साल में इकठ्ठा हो गया कचरा भोपाल नगर निगम द्वारा वर्ष 1970 में भानपुर खंती में कचरा फेंकना शुरू किया गया था। जबकि 2 जनवरी 2018 से कचरा भानपुर खंती की बजाय आदमपुर छावनी भेजना शुरू कर दिया गया। यानि कि 47 साल में यहां चार लाख मीट्रिक टन कचरा इकठ्ठा हो गया था। वहीं आदमपुर छावनी में बीते चार साल में ही 6 लाख मीट्रिक टन कचरा जमा हो गया है। जबकि इसके पहले नगर निगम ने दूसरी एजेंसियों को भी कचरे के निष्पादन का काम दिया था। लेकिन उन्होंने तय टेंडर के अनुसार कचरे का निष्पादन नहीं किया। पीने का पानी और सांस लेने के लिए गुणवत्तायुक्त हवा नहीं पर्यावरणविद सुभाष सी पांडे आदमपुर में कचरा खंती से प्रभावित लोगों और वहां के पर्यावरण के लिए एनजीटी, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी गए। उनकी अपील के बाद ही कचरे में आग लगने पर नगर निगम पर पेनाल्टी लगाई गई थी। पांडे का कहना है कि आदमपुर छावनी में कचरे के ढेर की वजह से आसपास के गांवों की आबोहवा प्रदूषित हो रही है। पन्नी व अन्य कचरा उडक़र खेतों में पहुंचता है, इससे मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है। वहीं इससे निकलने वाल लीचेट से भूजल बुरी तरह दूषित हो रहा है जो अब पीने योग्य नहीं बचा है। हालांकि वह कचरे में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए नगर निगम के कदम की सराहना करते हैं। उनका कहना है कि इसी तरह अन्य पर्यावरणीय क्षति से बचाने के लिए भी निगम को प्रयास करना चाहिए। विनोद / 15 दिसम्बर 25