राष्ट्रीय
01-Jan-2026
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-इस शहर से जुड़ी हैं पुरानी यादें, छलका लोगों का दर्द- काश बंटवारा न हुआ होता नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत में उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी में बुधवार को पूरा शहर खामोश था। वजह है ढाका में बांग्लादेश की पूर्व पीएम और ‘आयरन लेडी’ बेगम खालिदा जिया ने जैसे ही आखिरी सांस ली। उसका दर्द जलपाईगुड़ी की गलियों में भी महसूस हुआ। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक खालिदा जिया ने जहां बचपन बिताया था यह शहर सिर्फ उनका जन्मस्थान नहीं था, बल्कि यहां उनकी बचपन की यादें, उनकी किलकारियां और स्कूल के वो पुराने दिन आज भी लोगों के दिल और दिमाग में बसते हैं। यहां के लोगों के लिए वह किसी दूसरे देश की नेता नहीं, बल्कि अपने ही घर की बेटी थीं। खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1945 में इसी शहर के नया बस्ती इलाके में हुआ था। जलपाईगुड़ी के बाशिंदे और व्यवसायी पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताते हैं कि खालिदा के पिता, मोहम्मद इस्कंदर, उनके पिता की चाय ट्रेडिंग फर्म ‘दास एंड कंपनी’ में एजेंट के रूप में काम करते थे। खालिदा जिया का जन्म नयाबस्ती वाले घर में हुआ था। 1947 में भारत के विभाजन के बाद उनका परिवार पाकिस्तान नहीं गया, बल्कि वे 1950 के दशक तक यहीं जलपाईगुड़ी में रहे। आज जब उनके निधन की खबर आई, तो पुराने लोगों को वह दौर याद आ गया जब एक छोटी सी बच्ची इस शहर की धूल-मिट्टी में खेला करती थी। जलपाईगुड़ी के इतिहासकार ने खालिदा जिया के शुरुआती दिनों पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि खालिदा की पढ़ाई की नींव इसी शहर में पड़ी थी। उन्हें सबसे पहले नया बस्ती के जोगमाया प्राइमरी स्कूल में भेजा गया था। यहां उन्होंने तीसरी कक्षा तक पढ़ाई की। इसके बाद उनका दाखिला समाज पाड़ा की सुनीतिबाला सदर गर्ल्स स्कूल में कराया गया। बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार से पहले उनके समर्थक और बीएनपी नेता शेर-ए-बांग्ला नगर में दफनाने की जगह पर इकट्ठा हुए। उनका अंतिम संस्कार बांग्लादेश के ढाका में उनके पति जियाउर रहमान के बगल में होगा। इतिहासकार बताते हैं कि उस समय तक उनके अधिकांश रिश्तेदार पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) जा चुके थे। बाद में उनके पिता ने भी वहां जाने का फैसला किया। यह विदाई एक औपचारिक संपत्ति के आदान-प्रदान के तहत हुई थी। मोहम्मद इस्कंदर ने अपनी संपत्ति अमरेंद्रनाथ चक्रवर्ती नामक के व्यक्ति से बदल ली और पूर्वी पाकिस्तान चले गए। दिलचस्प बात यह है कि आज भी चक्रवर्ती परिवार उसी घर में रहता है जहां कभी खालिदा जिया का बचपन बीता था। भले ही लकीरें खींचकर देश बांट दिए गए हों, लेकिन मानवीय रिश्ते सरहदों के मोहताज नहीं होते। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पड़ोसियों के दिलों में आज भी खालिदा जिया के परिवार के लिए एक खास जगह है। खालिदा के पुराने पड़ोसी ने एक भावुक किस्सा बताया। उन्होंने बताया कि अभी कुछ महीने पहले ही खालिदा जिया की भतीजी अपनी बुआ का जन्मस्थान देखने जलपाईगुड़ी आई थीं। पड़ोसी ने बताया कि हमने उस दिन खूब बातें की। हम सोच रहे थे कि अगर देश का बंटवारा न हुआ होता तो कितना अच्छा होता। आज उनके जाने का गम जितना बांग्लादेश में है, उतना ही यहां जलपाईगुड़ी में भी है। सिराज/ईएमएस 01 जनवरी 2026