नई दिल्ली (ईएमएस)। खाड़ी क्षेत्र के दो सबसे शक्तिशाली सहयोगी देश, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), अब यमन की धरती पर एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं। यमन के दक्षिणी रणनीतिक बंदरगाह शहर मुकल्ला पर सऊदी अरब की वायुसेना द्वारा किए गए भारी हवाई हमले ने दोनों देशों के बीच के तनाव को ऐतिहासिक स्तर पर पहुँचा दिया है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद कूटनीतिक पारा इतना बढ़ गया कि यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने यूएई की सेना को देश छोड़ने के लिए महज 24 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दे दिया। इसके जवाब में यूएई ने अपनी बची हुई सैन्य इकाइयों को वापस बुलाने का फैसला किया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र का भू-राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गया है। सऊदी अरब और यूएई के बीच का यह विवाद भारत के लिए किसी कूटनीतिक दुःस्वप्न से कम नहीं है। भारत के इन दोनों देशों के साथ गहरे रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा संबंध हैं। खाड़ी के इन दो पावरहाउस के बीच शत्रुता भारत के पश्चिम की ओर देखो नीति के लिए गंभीर चुनौती है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और लाखों प्रवासियों के हितों के लिए दोनों पर समान रूप से निर्भर है। विवाद की असली जड़ यमन के भविष्य को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग दृष्टिकोण में छिपी है। सऊदी अरब एक एकीकृत यमन और वहां की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है ताकि उसकी अपनी सीमाएं सुरक्षित रहें। इसके विपरीत, यूएई ने दक्षिण यमन में सक्रिय उन अलगाववादियों को बढ़ावा दिया है जो एक स्वतंत्र राष्ट्र या स्व-शासन की मांग कर रहे हैं। यही विरोधाभास अब एक खुली जंग में तब्दील हो चुका है, जिसने खाड़ी सहयोग परिषद की स्थिरता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। तनाव की तत्काल वजह मुकल्ला बंदरगाह पर हुआ वह हवाई हमला है, जिसे सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंजाम दिया। सऊदी अरब का दावा है कि उनके खुफिया इनपुट के अनुसार, मुकल्ला के एक डॉक का इस्तेमाल यूएई समर्थित अलगाववादियों को गुप्त सैन्य सहायता और हथियारों की खेप पहुँचाने के लिए किया जा रहा था। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह हमला क्षेत्रीय सुरक्षा और यमन की अखंडता को बनाए रखने के लिए आवश्यक था। दूसरी ओर, यूएई ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि जिस शिपमेंट को निशाना बनाया गया, उसमें कोई हथियार नहीं थे, बल्कि वह अमीरात की सेना के लिए रसद और दैनिक उपयोग का सामान था। यूएई ने इस हमले को अकारण और अनावश्यक करार दिया है। इस सैन्य टकराव के बाद यमन में सऊदी समर्थित प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख रशद अल-अलीमी ने टेलीविजन संबोधन के जरिए यूएई पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने यूएई के साथ मौजूदा रक्षा समझौतों को रद्द करने की घोषणा करते हुए कहा कि संयुक्त अरब अमीरात दक्षिणी ट्रांजिशनल काउंसिल के अलगाववादियों को राज्य की सत्ता के खिलाफ विद्रोह करने के लिए उकसा रहा है। अल-अलीमी के 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद यूएई ने घोषणा की है कि वह यमन में तैनात अपनी अंतिम आतंकवाद विरोधी इकाइयों को भी वापस बुला रहा है। गौरतलब है कि यूएई ने 2019 में अपनी मुख्य सेना वापस ले ली थी, लेकिन कुछ विशेष इकाइयां अब भी वहां तैनात थीं। वीरेंद्र/ईएमएस 01 जनवरी 2026