राष्ट्रीय
01-Jan-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)।पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियों के बीच चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि चुनाव ड्यूटी में लगे किसी भी कर्मचारी को डराने-धमकाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चाहे वह बीएलओ हों, ईआरओ, एईआरओ या ऑब्जर्वर। सभी की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है। गौरतलब है कि बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की थी। इसके बाद पार्टी महासचिव एंव सांसद अभिषेक बनर्जी ने बाहर आकर आयोग पर कई सवाल उठाए। आयोग ने चेतावनी दी कि अगर कोई भी व्यक्ति कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रतिनिधिमंडल को स्पष्ट रूप से बताया कि राज्य सरकार को तुरंत प्रत्येक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को बढ़ा हुआ मानदेय जारी करना चाहिए, जिसे आयोग की मंजूरी मिल चुकी है। साथ ही आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए नए कदम उठाए जा रहे हैं। आयोग का मानना है कि बीएलओ चुनावी व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके अधिकारों व सुविधाओं की अनदेखी चुनावी निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है। टीएमसी प्रतिनिधिमंडल को आयोग ने जानकारी दी कि मतदाताओं की सुविधा के लिए ऊंची आवासीय इमारतों, गेटेड कॉलोनियों और झुग्गी-बस्तियों में भी मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी मतदाता को वोट डालने में परेशानी न हो और मतदान प्रतिशत बढ़े। चुनाव आयोग ने दो टूक कहा कि टीएमसी यह सुनिश्चित करे कि उसके जमीनी स्तर के राजनीतिक प्रतिनिधि या कार्यकर्ता चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को धमकाने में शामिल न हों। आयोग ने चेतावनी दी कि अगर कोई भी व्यक्ति कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी चुनावी कर्मचारी चाहे वह बीएलओ हो या ऑब्जर्वर को डराना गंभीर अपराध माना जाएगा। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई किसी भी तरह की धमकी को आयोग कतई बर्दाश्त नहीं करेगा और दोषियों पर कठोर कदम उठाए जाएंगे। चुनाव आयोग ने कहा कि वह स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वीरेंद्र/ईएमएस/01 जनवरी 2026