- सपेरे ने पकड़ा नाग, लेकिन नागिन बनी रहस्य - ताबीज बना परिवार की ढाल? कौशांबी (ईएमएस)। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले से एक हैरान कर देने वाली और डर पैदा करने वाली घटना सामने आई है। यहां 14 वर्षीय किशोरी रिया मौर्य को बीते 40 दिनों के भीतर लगातार 13 बार सांप ने काटा, जिससे न सिर्फ उसका परिवार बल्कि पूरा गांव दहशत में है। हालात ऐसे बन गए हैं कि रिया अब अपने ही घर लौटने से डर रही है और रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर है। यह भयावह कहानी 22 जुलाई से शुरू हुई, जब रिया धान की रोपाई के लिए खेत गई थी। उसी दौरान अचानक एक सांप ने उसके पैर में डंक मार दिया। परिजन आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल ले गए। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने प्रयागराज रेफर किया, लेकिन परिजन उसे मंझनपुर के तेजमती अस्पताल ले गए, जहां इलाज के बाद रिया ठीक हो गई। लेकिन यह तो बस शुरुआत थी। घर लौटते ही सांप ने दोबारा हमला कर दिया। इसके बाद यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले सका और 40 दिनों में 13 बार रिया सांप का शिकार बनी। परिजनों ने हर संभव कोशिश की, अस्पताल में इलाज कराया, झाड़-फूंक करवाई, लेकिन सांप का डर खत्म नहीं हुआ। रिया की हालत बार-बार बिगड़ती रही। हर बार ठीक होने के बाद जैसे ही वह घर लौटती, फिर किसी न किसी तरह सांप उसे काट लेता। डर इस कदर बढ़ गया कि रिया ने घर छोड़ दिया और बुआ के यहां रहने लगी। मां का कहना है कि बेटी अब घर का नाम सुनते ही कांप जाती है। आखिरकार, परिजनों ने सपेरे को बुलाया। सपेरे ने घर में खोजबीन के बाद एक नाग को पकड़ लिया, लेकिन उसका कहना है कि जहां नाग होता है, वहां नागिन भी होती है। नागिन अब भी घर में कहीं छिपी हो सकती है।यही बात रिया के डर को और बढ़ा रही है। उसका साफ कहना है कि “जब तक नागिन नहीं पकड़ी जाएगी, मैं घर नहीं लौटूंगी।” रिया का घर मिट्टी की दीवारों से बना है। ऐसे में सांपों के छिपने की आशंका और ज्यादा है। रिया की मां बताती हैं कि सरकार की ओर से अब तक कोई मदद नहीं मिली। बेटी की पढ़ाई भी पूरी तरह प्रभावित हो रही है और भविष्य अंधेरे में नजर आ रहा है। मां का दावा है कि एक बाबा ने पूरे परिवार को ताबीज दिया है। उनका कहना है कि इसी ताबीज की वजह से सांप अब परिवार के अन्य सदस्यों को नुकसान नहीं पहुंचा रहा। एक महीने पहले मां के पैर में सांप लिपट गया था, लेकिन उसने काटा नहीं। 13 बार मौत से सामना कर चुकी रिया आज भी जिंदा है, लेकिन डर के साए में। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ इत्तेफाक है, या फिर लापरवाही, अंधविश्वास और सिस्टम की चुप्पी ने एक मासूम के जीवन को दहशत में धकेल दिया है?