- देशभर से सिंधी समाज के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए बिलासपुर (ईएमएस)। नववर्ष का स्वागत चकरभाठा में आस्था, श्रद्धा और भक्ति के साथ 501 पूज्य बहराणा साहब निकालकर किया गया।आयोजन संत सांई श्री लालदास के सानिध्य में संपन्न हुआ, जिसमें देशभर से सिंधी समाज के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए।पूरे कार्यक्रम का सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण किया गया, जिसे हजारों लोगों ने घर बैठे देखा। संत सांई श्री लालदास ने सभी भक्तों को नववर्ष और बहराणा दिवस की शुभकामनाएं दीं।आयोजन को सफल बनाने में बाबा गुरमुख दास सेवा समिति एवं झूलेलाल महिला सखी सेवा ग्रुप के सभी सदस्यों का विशेष योगदान रहा। नया साल होटल-डिस्को में नहीं, झूलेलाल मंदिर में मनाने का आह्वान संत सांई लालदास ने अपने सत्संग और सोशल मीडिया के माध्यम से समाज से आह्वान किया कि नववर्ष को होटल, डिस्को या पर्यटन स्थलों पर नहीं बल्कि भगवान झूलेलाल मंदिर में भक्ति भाव से मनाया जाए। समाज के लोगों ने इस संदेश को आत्मसात करते हुए 31 दिसंबर को चालिहा महोत्सव में हजारों की संख्या में भाग लिया। 40 दिन में 2 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे मंदिर चालिहा महोत्सव के दौरान 40 दिनों में करीब 2 लाख से अधिक श्रद्धालु झूलेलाल मंदिर पहुंचे और भगवान झूलेलाल व अखंड ज्योत के दर्शन किए। इस वर्ष विशेष रूप से चालिहा उत्सव का समापन 31 दिसंबर को हुआ, जिससे नववर्ष का स्वागत बहराणा दिवस के रूप में किया गया। भक्ति संगीत व झूमे श्रद्धालु 1 जनवरी को उत्तम पैलेस में शाम 5 से 7 बजे तक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान झूलेलाल बाबा गुरमुख दास की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण व दीप प्रज्वलन से हुई। इस अवसर पर सूरत गुजरात के गायक प्रेम भारती ने भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। 501 बहराणा साहब की निकाली गई शोभायात्रा 501 पूज्य बहराणा साहब की शोभायात्रा ढोल-नगाड़ों, डीजे और भजनों के साथ निकाली गई। भक्त गाते-नाचते हुए आगे बढ़े। जगह-जगह आतिशबाजी और फूलों की वर्षा से शोभायात्रा का स्वागत किया गया। तालाब पहुंचकर विधि-विधान से पूज्य बहराणा साहब का विसर्जन किया गया, अखंड ज्योत को प्रवाहित किया गया और प्रसाद वितरण हुआ। देश-प्रदेश से पहुंचे श्रद्धालु आयोजन में चकरभाठा, बिलासपुर और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के साथ-साथ मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। जो भक्त यहां नहीं आ सके, उन्होंने अपने-अपने शहरों और घरों में पूज्य बहराणा साहब की पूजा कर बहराणा दिवस मनाया। मनोज राज/योगेश विश्वकर्मा 04 जनवरी 2026