- शिव महापुराण कथा में खुला रहस्य बिलासपुर (ईएमएस)। शनिवार को पत्रकार कॉलोनी में चल रही शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन कथावाचिका ईश्वरी देवी ने दिया। उन्होंने बताया कि ब्रह्माजी द्वारा बोला गया झूठ इतना बड़ा था कि उसका प्रभाव आज भी कलियुग में दिखाई देता है। इसी कारण ब्रह्माजी की पूजा सीमित हो गई और केतकी पुष्प भगवान शिव को अर्पित नहीं किया जाता।कथावाचिका ने बताया कि एक बार ब्रह्माजी और भगवान विष्णु के बीच यह विवाद हुआ कि संसार में कौन श्रेष्ठ है। ब्रह्माजी ने स्वयं को सृष्टिकर्ता बताते हुए श्रेष्ठ कहा, जबकि भगवान विष्णु ने पालनहार होने का दावा किया। विवाद बढऩे पर दोनों के बीच युद्ध की स्थिति बन गई। अग्नि स्तंभ बनकर प्रकट हुए भगवान शिव दोनों देवताओं के विवाद को शांत करने के लिए भगवान शिव अग्नि स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) के रूप में प्रकट हुए। शिव ने कहा कि जो इस ज्योतिर्लिंग का आदि या अंत खोज लेगा, वही श्रेष्ठ कहलाएगा। भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर पाताल की ओर प्रस्थान किया, जबकि ब्रह्माजी हंस का रूप धारण कर आकाश की ओर बढ़े। क्रोधित शिव ने भैरव अवतार में दिया दंड सर्वज्ञ भगवान शिव से यह झूठ छिप न सका। सत्य सामने आने पर शिव अत्यंत क्रोधित हुए और भैरव अवतार को प्रकट कर ब्रह्माजी के पांचवें सिर को काटने की आज्ञा दी। साथ ही शिव ने ब्रह्माजी को शाप दिया कि वे यज्ञों में पूज्य नहीं होंगे, जबकि सत्य बोलने के कारण भगवान विष्णु को प्रत्येक यज्ञ में सत्यनारायण के रूप में पूजे जाने का वरदान दिया।शिव महापुराण कथा के माध्यम से सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया। मनोज राज/योगेश विश्वकर्मा 04 जनवरी 2026