लेख
05-Jan-2026
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अमेरिकी आर्मी ने वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है. इस बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी है. उन्होंने साफ कर दिया है कि फिलहाल यूएस वेनेजुएला का शासन संभालेगा. इससे पहले ट्रंप ने हथकड़ी और आंखों पर पट्टी बांधे मादुरो की एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह एक अमेरिकी युद्धपोत पर सवार थे. उधर, लैटिन अमेरिका, यूरोप, रूस और चीन समेत कई देशों ने वेनेजुएला पर अमेरिकी हमलों की निंदा की और तनाव कम करने की अपील की. वहीं, कराकस में अमेरिकी हमले में कम से कम 40 लोगों की मौत की भी खबरें सामने आ रही हैं. यह खेल दरअसल ड्रग्स का नहीं कच्चे तेल के व्यापार का है जहाँ उसे फायदा दिख रहा है क़ोई देश क्या कर रहा है इसपर अमेरिका क्यों दखल देता है ऐ उसके सम्प्रभूता पर गहरा चोट है आप अपने पास क्या रखते क्या खाते है क्या पहनते हैँ क्या कारोबार करते हैँ यह आतंरिक मामला है इसलिए अमेरिका को इसमें दखल नहीं देना चाहिए लेकिन बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है इसलिए वहाँ तेल का सबसे बड़ा निर्यात है अरबों डालर का व्यवसाय है जिसने रूस और चीन के साथ करार किया और अमेरिका को नहीं शामिल किया इसलिए डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ तेल के व्यापार पर अपने नियंत्रण की बात भी कह दि और शासन भी चलाएगा दरअसल अब सभी देशों को इससे सिख लेनी चाहिए यदि आपके पास ताकत है रक्षा का बजट जितना ज्यादा है रक्षा पर जितना हथियार है सब ले लो और परमाणु हथियार जरूर रखो ना कि निर्दोष लोगों को जैसे 1945 में अमेरिका ने हीरोशिमा और नागासाकी पर गिरा कर लाखों लोग को मौत के घाट उतार दिए बल्कि अपने देश के आत्मरक्षा हेतु जरुरी है क्योंकि एटम बम का अब खेल हो रहा है जहाँ नहीं है वहाँ अमेरिका अटैक करेगा और अमेरिका ने जापान पर एटम बम गिराने के बाद ही अपने को सुपर पावर समझता है अतः देश पहले है आत्मरक्षा हेतु यह जरुरी है कि ऐसा हथियार मेरे पास है जो आग बनकर बरसेगा, और देश के ऊपर यदि गलती से आँख उठा कर देखा तो विनाश भी देख लेना भगवान शंकर हमेशा शांत ही रहते हैं ध्यान में लेकिन यदि उनकी शांति भंग हुई तो तांडव भी कर सब बर्बाद करने की ताकत है यही कारण है कि जब भारत ने अमेरिका के दबाब के बाद भी 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण किये तो दूसरा देश डरा था ऐ हमारे वैज्ञानिकों और अटलजी का देश के प्रति निष्ठा थी जिसमें सफलता मिली और भारत को अमेरिका से सतर्क होने की जरुरत है क्योंकि आए दिनों जिस तरह पाकिस्तान और बांग्लादेश में अमेरिका का सपोर्ट आतंकवादी को सजाने के लिए किया वो भारत के ऊपर एक घेरने की रणनीति बना रहा है अमेरिका में खुद 6000 के करीब परमाणु अस्त्र हैं फिर भी परीक्षण करता रहता है केवल डराने के लिए और भारत के आंतरिक मामलों और व्यापार पर निगाहेँ गड़ा रहा है नहीं चाहिए ऐ व्यापार और उसके साथ क़ोई भी परमाणु सयन्त्र लगाने की जरुरत क्योंकि बाद में अमेरिका के सीआईए के एजेंट भी कई देशों में हैं और जब वो रातोंरात वेनेजुएला पर हमला कर उसके राष्ट्रपति को बंधक बनाया उससे ऐ साबित होता है कि हम ही सब कुछ कर सकते हैँ जो अपराध की श्रेणी में है ईरान में भी सीआईए के एजेंट थे और उसके घर में घुसकर बंकर ब्लस्टर बम से उसके परमाणु सयन्त्र को नष्ट कर बजापते ऐ कहना कि अमेरिका जो कर सकता है वो क़ोई नहीं ऐ एक पहले ही धमकी को हकीकत में बदलने की शुरुआत हो गईं थी और सीरिया में सत्ता परिवर्तन में भी अमेरिका का हाथ था आखिर इतना हथियार कौन देगा और अचानक कुछ ही हफ्तों में रिजिम चेंज कारना इसलिए भारत में तमाम टीवी चैनल को अब भारत की किसी भी सत्ता या देश की समस्या को दिखाना नहीं चाहिए क्योंकि इससे विदेशी ताकत हावी होते हैँ और इसका लाभ परोसी दुश्मन देश को मिलता है और यदि सत्ता परिवर्तन चाहिए तो भारत में लोकतान्त्रिक व्यवस्था है उससे आप कर सकते हैँ लेकिन जिसका ना क़ोई सर है ना पैर कि 19 नवंबर 25 को नया प्रधानमंत्री मिलेगा वोट चोरी और अडानी अम्बानी पर व्यान देना ठीक नहीं है ना ही ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल खड़े करना अब हमें शांति से देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जमीनी धरातल पर खासकर रक्षा के क्षेत्र में कार्य करने की आवश्यकता है क्योंकि युद्ध करना आज आसान नहीं है इसमें दूसरे देश भी शामिल हो जाते हैँ और हमारे सेना को हमेशा तारीफ करना चाहिए जो देश की रक्षा करते हैँ जैसा की मालूम है की वेनेजुएला,के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में हेलीकॉप्टर से पहुंचे गए. इसके बाद उन्हें भारी सुरक्षा वाले बख्तरबंद मोटरकेड में ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) के दफ्तर ले जाया गया, क्योंकि मादुरो पर ड्रग तस्करी और नार्को-टेररिज्म के गंभीर आरोप हैं.वेनेजुएला की राजधानी कराकस पर किए गए अमेरिकी हमले के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क लाया गया है. अमेरिका ने इस ऑपरेशन को ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व नाम दिया है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि फिलहाल वेनेजुएला को अमेरिका चलाएगा.वेनेजुएला के पास सेना बहुत है लेकिन न्यूक्लियर हथियार नहीं है इसलिए अमेरिका इसका फायदा उठा रहा है इसमें चीन और रूस अमेरिका से नहीं लड़ेगा क्योंकि उसे मालूम है इससे उसका भी काफी नुकसान होगा और दूसरी तरफ रूस खुद ही यूक्रेन के युद्ध में फंसा है इसलिए वो भी इसमें उलझना नहीं चाहेगा क्योंकि यदि उलझना होता तो ईरान के युद्ध में या सीरीया के तख्तापलट पर ही उलझ जाता लेकिन ऐसा हुआ नहीं वेनेजुएला ने एटम बम क्यों नहीं बनाये क्योंकि उसने डर से सीटीवीटी पर हस्ताक्षर कर दिए थे वेनेजुएला के न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम 1950 के दशक में शुरू हुए थे, लेकिन अभी कोई एक्टिव न्यूक्लियर पावर फैसिलिटी नहीं है। वेनेजुएला की ज़्यादातर न्यूक्लियर साइंस एक्टिविटीज़ वेनेजुएला इंस्टीट्यूट फॉर साइंटिफिक रिसर्च (IVIC) में होती हैं। वेनेजुएला ने 2017 में न्यूयॉर्क में यूनाइटेड नेशंस में TPNW की बातचीत में हिस्सा लिया था और उन 122 देशों में से एक था जिन्होंने इसे अपनाने के पक्ष में वोट दिया था। बातचीत कॉन्फ्रेंस में अपने शुरुआती बयान में, वेनेजुएला ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि मिलकर एक मज़बूत और ठोस फाइनल डॉक्यूमेंट हासिल करेंगे जो न्यूक्लियर हथियारों पर रोक लगाएगा, जो उनके पूरी तरह से खत्म करने की दिशा में एक शुरुआती कदम होगा। अपने आखिरी बयान में, उसने कहा कि न्यूक्लियर हथियारों का कोई भी इस्तेमाल इंसानियत के खिलाफ़ अपराध है, और जोड़ा: कोई भी सुरक्षा सिद्धांत, किसी भी देश का कोई भी राष्ट्रीय हित, कोई भी मिलिट्री ब्लॉक इंसानों की बड़े पैमाने पर हत्या या ग्रह के विनाश को सही नहीं ठहरा सकता। जीवन और शांति का तर्क जीतना चाहिए। 2016 में, वेनेजुएला ने यूनाइटेडन नेशन जनरल असेंबली के उस प्रस्ताव को को-स्पॉन्सर किया था जिसने देशों के लिए न्यूक्लियर हथियारों पर रोक लगाने के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी दस्तावेज़ पर बातचीत शुरू करने का औपचारिक आदेश स्थापित किया, जो उनके पूरी तरह से खत्म करने की ओर ले जाएगा।लेकिन यदि हिम्मत बांध कर कर लिया होता तो अमेरिका का हमला नहीं होता क्योंकि अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होती है और आत्मरक्षा हेतु परमाणु हथियार जरुरी है जिससे डर हो। ईएमएस/05/01/2026