लेख
06-Jan-2026
...


2025 में हमने विभिन्न समाचार पत्रों में देश में हुई अलग-अलग घटनाओं का विवरण पढ़ा। इनमें से कुछ घटनाएँ अच्छी थीं और कुछ बुरी थीं। मगर कुछ दिल दहलाने वाली थीं। इनमें ऐसी घटनाएं शामिल थीं जिनमें परिवार के लोगों ने ही अपने परिजनों की हत्या कर दी या करवाई। इस तरह की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है, ऐसा लगता है। एक घटना है चैन्नई की जो तमिलनाडु की राजधानी है। वहां एक परिवार के मुखिया की हत्या उन्हीं के बेटों ने की। किस बात के लिए? ताकि उनके बीमा का धन उनके मरने के बाद उनके बेटों को मिल सके। उन्होंने अपने पिता का भारी भरकम राशि का बीमा करवाया यद्यपि उनकी बहुत आमदनी नहीं थी। हत्या करने के लिए जो तरीका अपनाया गया वह दिल दहलाने वाला था। उनके बेटों ने तीन बार उन्हें मारने की कोशिश की। उन्हें एक कमरे में अकेले सुला दिया जाता था और कमरे में एक जहरीला सांप छोड़ दिया जाता था। बेटों को पूरी उम्मीद थी कि सांप उनके पिता को काटेगा और वे मर जाएंगे। परंतु सांप ने उन्हें काटने से इंकार कर दिया और वे बच गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। चूंकि वो जिंदा बच गए थे इसलिए अस्पताल वालों ने भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया और कुछ दवाई देकर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। उनके लड़कों को लगा कि यह तो गजब हो गया, हमने अपने बाप की हत्या में सफलता नहीं पाई। फिर उन्होंने एक ओर कोशिश की और पिछले वाले सांप से ज्यादा जहरीला सांप कहीं से हासिल किया और एक दिन फिर रात को उस सांप को बाप के कमरे में छोड़ दिया। बेटों के दुर्भाग्य वे फिर बच गए। फिर इन दो बेटों ने एक अत्यधिक जहरीला सांप, सांप पालने वालों से खरीदा। इस बार वे सफल रहे और सांप ने उनके पिता को काट लिया। उनकी करनी का कोई सबूत न बचे इसके लिए बेटों ने दो कदम उठाए। एक तो वे पिता को अस्पताल ले गए और डाक्टरों को रिश्वत देकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट हासिल कर उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया। वह सांप जिसने उन्हें काटा था उसे भी मार डाला। यह बात ज्यादा दिन तक छुपी नहीं रह सकी और उनके दोनों बेटे गिरफ्तार हो गए। ये तो हुई बेटों द्वारा बाप की हत्या। एक बेटी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने बाप की जायदाद पर कब्जा करने के लिए उनकी हत्या करवा दी। उसने भाड़े के हत्यारों को पाँच लाख रूपए दिए। लड़की अपने पिता की हत्या होते देखती रही। यह घटना गुजरात के बड़ोदरा की है। एक और घटना है जिसमें पिता ने अपने बेटों की हत्या करवा दी। पिता को शक था कि वे उन्हें मरवा कर उनकी सम्पत्ति पर समय से पहले कब्जा करना चाहते हैं। पिता ने किराये के हत्यारों को पांच लाख रूपए दिए और अपने पुत्र की हत्या करवा दी। इस तरह की अनेक घटनाएं अखबारों में छप रही हैं। मैंने उनमें से केवल अत्यधिक सनसनीखेज मामलों का उल्लेख किया है। इस तरह की घटनाएं क्यों हो रही हैं? कहीं बाप अपने बेटों की हत्या करवाता है, कहीं बेटी अपने पिता को मरवाती है और कहीं बेटें अपने बाप की हत्या करवा रहे हैं, वह भी सांप से कटवा कर। आखिर यह कौनसा मनोविज्ञान है? यह कौनसी मानसिकता है? वैसे भी देश में इस समय कई प्रकार की हिंसा हो रही हैं। एक धर्म में विश्वास करने वाले लोग दूसरे धर्म में आस्था रखने वाले लोगों की हत्याएं करवा रहे हैं या उनका जीना दूभर कर रहे हैं। अभी ईसाईयों पर हमले किए जा रहे हैं। उनका सबसे बड़ा त्योहार क्रिसमस वे ठीक से न मना सकें इसलिए उनके चर्चो में तोड़फोड की गई। इसी तरह हमारे पड़ोसी बांग्लादेश में हिन्दुओं की हत्या की जा रही है, जिस पर संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव ने भी चिंता प्रकट की है। दूसरे पड़ोसी पाकिस्तान में भी गैर मुसलमानों पर हमले हो रहे हैं और हमारे देश में कई स्थानों से इसी तरह की खबरे आ रही हैं। इन घटनाओं के कारणों पर विचार होना चाहिए। संसद में अनेक समस्याओं पर विचार होता है। मगर अब तो संसद का सत्र भी 4-5 दिनों से ज्यादा नहीं चलता। विधानसभाओं में भी इस तरह की घटनाओं पर विचार होना चाहिए। मगर उनके सत्र भी 4-5 दिन में समाप्त हो जाते हैं। छात्रों की समस्याएं, महिलाओं की समस्याएं, बेटियों की समस्याएं, आए दिन बच्चों की हत्या - इन सब पर भी तो संसद में विचार होना चाहिए? यह घटनाएं क्यों हो रही हैं? इसका कारण क्या है? इन्हें रोका कैसे जा सकता है? (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) ईएमएस / 06 जनवरी 26