लेख
05-Jan-2026
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चीन ने अमेरिका से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करने की मांग की है। दोनों इस समय अमेरिका की हिरासत में हैं। अमेरिकी सेना उन्हें वेनेजुएला की राजधानी काराकस से पकड़कर अमेरिका ले गई थी। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी देश के राष्ट्रपति को इस तरह अपने देश ले जाना गलत है। इस मुद्दे का हल बातचीत से होना चाहिए। इससे पहले भी चीन ने अमेरिका की कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। वही उत्तर कोरिया ने भी वेनेजुएला में अमेरिका की कार्रवाई को गुंडागर्दी बताया है। उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई किसी भी देश की आजादी और संप्रभुता पर किया गया सबसे गंभीर हमला है। आपको बता दे ,अमेरिकी सैनिकों ने 2 जनवरी की रात वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को अगवा कर लिया था। इसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क लाया गया है, जहां उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा गया और फिर अमानवीय जेल में बंद कर दिया गया। उन पर अमेरिका में हथियार-ड्रग्स से जुड़े मामलों में मुकदमा चलाया जाएगा। वेनेजुएला के रक्षा मंत्री व्लादिमीर पाद्रीनो लोपेज ने अमेरिका की कार्रवाई को लेकर कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प का राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ने का फैसला सिर्फ वेनेजुएला के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि यह कदम ग्लोबल ऑर्डर के लिए गंभीर चुनौती है। उनका कहना है कि अगर आज ऐसा वेनेजुएला के साथ किया गया है, तो कल किसी भी देश के साथ ऐसा हो सकता है। उन्होंने इसे खतरनाक मिसाल बताया। वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने अमेरिकी विदेश नीति की भी आलोचना की और कहा कि अमेरिका लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में पुराने उपनिवेशवादी विचार थोपना चाहता है। वेनेजुएला इस सोच को पूरी तरह खारिज करता है। रूस के सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने वेनेजुएला में अमेरिका की कार्रवाई पर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जो कदम उठाए हैं, वे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं। अमेरिका, लैटिन अमेरिका को हमेशा से अपने प्रभाव वाला इलाका मानता रहा है। वेनेजुएला के मामले में भी अमेरिका की नजर वहां के तेल पर है। अमेरिका की सोच दूसरे देशों के संसाधनों पर कब्जा करने की रही है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका की सबसे बदनाम जेलों में से एक मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। इस जेल की हालत इतनी खराब मानी जाती रही है कि कुछ अमेरिकी जजों ने यहां कैदियों को भेजने से तक इनकार कर दिया था। यह जेल सन 1990 के दशक में बनाई गई थी और यहां करीब 1,300 कैदी बंद हैं। आमतौर पर यह जेल उन लोगों के लिए इस्तेमाल होती है, जिनके खिलाफ न्यूयॉर्क की फेडरल अदालतों में मुकदमा चल रहा होता है। यहां गैंगस्टर और ड्रग तस्करों से लेकर सफेदपोश अपराधों के आरोपी तक रखे जाते हैं। मादुरो इस जेल में बंद होने वाले पहले विदेशी राष्ट्रपति नहीं हैं। इससे पहले होंडुरास के पूर्व राष्ट्रपति जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज को भी इसी जेल में रखा गया था। उन पर अमेरिका में कोकीन की तस्करी का मामला चला था। बाद में उन्हें 45 साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन दिसंबर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें माफी देकर रिहा कर दिया। इस जेल में मेक्सिको के कुख्यात सिनालोआ ड्रग कार्टेल के को फाउंडर इस्माइल एल मायो जाम्बाडा भी बंद हैं। इसके अलावा एक कारोबारी की हत्या के आरोपी लुइजी मैनजियोने भी यहीं कैद हैं। कैदियों और उनके वकीलों ने लंबे समय से यहां हिंसा, बदसलूकी और अव्यवस्था की शिकायतें की हैं। साल 2024 में दो कैदियों की हत्या दूसरे कैदियों ने यहां कर दी थी। कुछ जेलकर्मियों पर रिश्वत लेने और जेल के अंदर गैरकानूनी सामान पहुंचाने के आरोप भी लगे हैं। सन 2019 की सर्दियों में यहां बिजली चली गई थी, जिससे यह जेल एक हफ्ते तक अंधेरे और ठंड में डूबी रही थी। ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल पर कब्जा कर लिया है। ड्रग्स कारोबार की आड़ लेकर राष्ट्रपति मादुरो को बंधक बना लिया। उनकी पत्नी और मादुरो पर अमेरिका में मुकदमा चलेगा। अमेरिकी तेल व्यापारी अब वेनेजुएला की तमाम रिफाइनरी संभाल लेंगे। अमेरिका ने एक तरह से वेनेज़ुएला को गुलाम बना लिया है। हरिद्वार के वरिष्ठ पत्रकार कौशल सिख़ौला की माने तो वेनेजुएला के तेल पर निगाह रखने वाले ट्रंप के वेनेज़ुएला आने का खामियाजा भारत को भी उठाना पड़ेगा जो वेनेजुएला से खासे पैमाने पर तेल खरीदता है। ट्रंप की इस कार्रवाई की रूस और चीन सहित दुनियाभर के अनेक देशों ने निंदा की है। लेकिन भारत ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ट्रंप की इस कार्रवाई का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव पड़ेगा। उनकी माने तो ट्रम्प अब अपने ही अमेरिकी देश मेक्सिको को निशाना बनाने की तैयारी में है? उनके शब्दो मे,अमेरिका की जो मंशा है वह चीन की हुआ करती है। चीन तमाम पड़ौसियों को हड़पना चाहता है। नया साल लगते ही तेल के लिए अमेरिका ने धावा बोल दिया। यहां याद रखिए कि वेनेजुएला से कच्चे तेल और एल्यूमिनियम का भारत बहुत बड़ा खरीदार है? तो क्या अमेरिका यहाँ भी भारत को चोट देना चाहता है? कहां तो ट्रंप पूरी दुनिया को शान्ति का संदेश दे रहे थे और कहां पड़ोसियों को अशांत कर दिया , खुद भी अशांत हो गए। ट्रंप की मंशा ख़ोमेनई और किम जोंग को भी इसी तरह उठाने की है। कनाडा से भी ट्रंप खासे खफा हैं। समझ नहीं आता कि ट्रंप मानसिक रूप से ठीक हैं या पूरी तरह हिल गए हैं? इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के तेवर अभी और तल्ख होने बाकी हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार उल्लंघन व हठधर्मिता का यह मामला पूरी दुनिया देख रही है ,जिसे लेकर दुनिया के अन्य देशों को विरोध के स्वर बुलंद करने चाहिए। (लेखक ज्वलंत मुद्दों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार है) ईएमएस / 05 जनवरी 26