अंतर्राष्ट्रीय
05-Jan-2026


सियोल(ईएमएस)। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग लगाते हुए दक्षिण कोरिया ने अपना पहला स्वदेशी फाइटर जेट केएफ -21 बोरामे तैयार कर लिया है। साल 2026 इस देश के सैन्य इतिहास में एक सुनहरे अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है, क्योंकि इसी वर्ष से इन विमानों की पहली खेप कोरियन एयरफोर्स को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह लड़ाकू विमान केवल एक मशीन नहीं, बल्कि दक्षिण कोरिया के उस आत्मविश्वास का प्रतीक है, जो उसे अपनी सुरक्षा के लिए अब अमेरिका की बैसाखियों पर निर्भर रहने से मुक्त करेगा। 4.5 जेनरेशन का यह विमान इतना घातक है कि इसकी खबर मात्र से ही पड़ोसी प्रतिद्वंद्वी चीन और उत्तर कोरिया के सैन्य खेमों में हलचल तेज हो गई है। दक्षिण कोरिया ने अपने स्वयं के लड़ाकू विमान का सपना साल 2010 में देखा था। करीब डेढ़ दशक की कड़ी मेहनत, अरबों डॉलर के निवेश और अनगिनत तकनीकी चुनौतियों को पार करने के बाद बोरामे अब अपनी पहली लड़ाकू उड़ान भरने को तैयार है। यह अत्याधुनिक विमान वायुसेना के पुराने पड़ चुके एफ-4 और एफ-5 विमानों की जगह लेगा। दो इंजनों वाले इस मल्टीरोल फाइटर जेट की अधिकतम रफ्तार लगभग 2,300 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो इसे दुनिया के सबसे तेज विमानों की श्रेणी में खड़ा करती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका स्टील्थ डिजाइन है, जो इसे दुश्मन के रडार की नजरों से बचने में मदद करता है। इसमें लगा अत्याधुनिक एईएसए रडार बहुत लंबी दूरी से ही दुश्मन के विमानों को ट्रैक कर उन्हें नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखता है। तकनीकी विशिष्टताओं की बात करें तो केएफ -21 को 4.5 पीढ़ी का विमान माना गया है। हालांकि इसमें फिलहाल पांचवीं पीढ़ी के विमानों की तरह इंटरनल वेपन बे (अंदरूनी हथियार कक्ष) नहीं है और मिसाइलें बाहर की ओर लगी होंगी, लेकिन भविष्य के अपग्रेड में इसे पूरी तरह स्टील्थ बनाने की योजना है। यह विमान अमेरिकी एफ-16 से कहीं अधिक शक्तिशाली है और दुनिया के सबसे महंगे विमान एफ-35 के मुकाबले काफी सस्ता और रखरखाव में आसान है। यही कारण है कि यह उन देशों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है जो कम बजट में उच्च स्तर की सैन्य तकनीक चाहते हैं। वैश्विक रक्षा बाजार में भी बोरामे ने खलबली मचा दी है। जहां भारत का तेजस मार्क 2 और तुर्की का कान अभी विकास और परीक्षण के चरणों से गुजर रहे हैं, वहीं दक्षिण कोरिया का यह विमान 2,000 घंटों से अधिक की सफल उड़ान परीक्षण पूरा कर उत्पादन की स्थिति में पहुंच गया है। इंडोनेशिया पहले ही इस प्रोजेक्ट में भागीदार है, जबकि फिलीपींस, मलेशिया और मध्य-पूर्व के कई देश इसमें गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। दक्षिण कोरिया के के2 टैंक और के9 तोपें पहले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में धूम मचा रहे हैं, अब केएफ-21 के आने से लड़ाकू विमानों के बाजार में अमेरिका और रूस के एकाधिकार को सीधी चुनौती मिलने वाली है। यह विमान न केवल दक्षिण कोरिया की सीमाओं की रक्षा करेगा, बल्कि भविष्य में दुनिया भर के आसमान में कोरियाई तकनीक का लोहा भी मनवाएगा। वीरेंद्र/ईएमएस/05जनवरी2026