- परियोजना में चार प्रमुख टाइगर रिजर्व पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना को आपस में जोड़ा जाएगा भोपाल (ईएमएस)। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एवं राज्य लोक निर्माण विभाग द्वारा संयुक्त रूप से मध्य प्रदेश में देश का पहला राज्य स्तरीय टाइगर कॉरिडोर बनाया जाएगा। इसके जरिये प्रदेश के चार प्रमुख टाइगर रिजर्व पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना को आपस में जोड़ा जाएगा। इस परियोजना पर पांच हजार पांच सौ करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जाएगी। सडक़ों, रेल लाइनों और शहरी विस्तार से जब वन क्षेत्र कट जाते हैं तो वन्य जीवों की प्राकृतिक आवाजाही बाधित होती है। इससे उनके प्रजनन और भोजन चक्र पर असर पड़ता है और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इस परियोजना के तहत कान्हा, पेंच, बांधवगढ़ और पन्ना जैसे प्रमुख टाइगर रिजर्व सहित संरक्षित वन क्षेत्रों के बीच एक सुरक्षित और वैज्ञानिक रूप से डिजाइन किया गया संपर्क मार्ग तैयार किया जाएगा। इससे वन्य प्राणियों का संरक्षण भी होगा और सडक़ों के उन्नयन से विकास की रफ्तार भी तेज होगी। टाइगर रिजर्वों के बीच आवागमन सुगम होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। पूरी परियोजना में वन विभाग का भी सहयोग लिया जा रहा है। बाघ अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों को जोड़ा जाएगा इस टाइगर कॉरिडोर परियोजना से विभिन्न बाघ अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों को आपस में जोड़ा जाएगा ताकि बाघ और अन्य वन्य जीव सुरक्षित रूप से एक वन क्षेत्र से दूसरे वन क्षेत्र में आवागमन कर सकें। यह टाइगर कॉरिडोर करीब ढाई सौ किलोमीटर लंबा होगा। इसमें टाइगर रिजर्वों के प्रवेश द्वारों तक जाने वाली कनेक्टिंग सडक़ों और आसपास के क्षेत्रों का उन्नयन भी किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण परियोजना के अंतर्गत पेंच से सिवनी के बीच एनएच 44 पर मौजूद फोर लेन और पेवर्ड शोल्डर का उन्नयन किया जाएगा। सडक़ हादसों में हर साल सैकड़ों जानवरों की होती है मौत जानकारों का कहना है कि हर साल सैकड़ों की संख्या में सडक़ हादसों में वन्य जीवों की मौत होती है। रेल हादसे हों या सडक़ हादसे, इनमें टाइगर और तेंदुआ जैसे शेड्यूल वन के वाइल्डलाइफ एनिमल भी शिकार होते हैं। इसी वजह से लंबे समय से मध्यप्रदेश में टाइगर कॉरिडोर बनाने की मांग की जा रही थी। अब सरकार इसकी शुरुआत जल्द ही करने वाली है, जिससे वन्य प्राणियों की सुरक्षा हो सके और लोग भी आसानी से सडक़ मार्ग से सफर कर सकें। हालांकि इसके लिए राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार की मदद भी आवश्यक होगी। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी समेत कई अन्य सरकारी एजेंसियों को निगरानी समिति में शामिल किया गया है। विनोद / 05 जनवरी 26