राज्य
05-Jan-2026


सूरत (ईएमएस)| सूरत के गवियर गांव के निकट तापी नदी के मुहाने और अरब सागर के बीच स्थित दुर्गम कडिया टापू पर पिछले पांच वर्षों से सक्रिय एक विशाल डीज़ल चोरी नेटवर्क का सूरत स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने पर्दाफाश किया है। पुलिस टीम ने जान जोखिम में डालकर, कीचड़ और दलदल को पार करते हुए लगातार 18 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया और इस हाईटेक घोटाले को उजागर किया। कडिया टापू भौगोलिक रूप से बेहद कठिन इलाका है। समुद्र तट से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित इस टापू के चारों ओर घनी झाड़ियां और दलदल होने के कारण वहां पहुंचना लगभग असंभव माना जाता है। इसी भौगोलिक कठिनाई का फायदा उठाकर आरोपियों ने वहां एक अस्थायी गोदाम बना रखा था। इस संदर्भ पुलिस को पुख्ता सूचना मिली थी कि इस इलाके में समुद्री रास्ते से अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसी आधार पर डीसीपी राजदीप सिंह नकुम के नेतृत्व में यह विशेष ऑपरेशन शुरू किया गया। आरोपियों की चोरी की पद्धति बेहद संगठित और जोखिम भरी थी। वे आधी रात को छोटी नावों के जरिए समुद्र में लंगर डाले बड़े कंटेनर जहाजों या ऑयल टैंकरों तक पहुंचते थे। जहाजों के ईंधन टैंकों से इलेक्ट्रिक मोटर और लंबी पाइपलाइन की मदद से डीज़ल सीधे अपनी नावों में खींच लिया जाता था। चोरी किया गया यह डीज़ल कडिया टापू पर लाकर प्लास्टिक और लोहे के बैरल में छिपाकर रखा जाता था। बाद में यह गिरोह डीज़ल को बाजार मूल्य से 15 से 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता बेचता था। मछुआरे और झींगा पालन के तालाबों के मालिक इसके मुख्य ग्राहक थे, क्योंकि खेती और झींगा तालाबों में पानी खींचने के लिए भारी मात्रा में डीज़ल की जरूरत होती है। डीसीपी राजदीप सिंह नकुम के अनुसार, पुलिस टीम आवश्यक उपकरणों के साथ टापू पर पहुंची और 18 घंटे तक दलदल में खुदाई की। भारी बैरल को किनारे तक लाना भी एक बड़ी चुनौती थी। फिलहाल पुलिस ने नई भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत आपराधिक साजिश और ज्वलनशील पदार्थों के लापरवाह भंडारण का मामला दर्ज किया है। साथ ही, पुलिस अब राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलुओं की भी जांच कर रही है कि यह गिरोह खुले समुद्र में जहाजों तक आखिर कैसे पहुंच पा रहा था। सतीश/05 जनवरी