खाद के लिए सुबह से लग रही कतारें, कड़ाके की ठंड में परिवार सहित पहुंच रहे किसान, महिलाएं और बच्चे भी लाइन में लगे खाद खरीदने और धान बेचने खुले में सो रहे किसान -नर्मदापुरम में धान बेचने 3-4 दिन का इंतजार; मंडी में अलाव नहीं, ओस में भीग रहे कंबल भोपाल/होशंगाबाद/पन्ना//श्योपुर(ईएमएस)। मप्र को अन्न प्रदेश बनाने के लिए किसान रात-दिन एक किए हुए हैं। लेकिन शासन और प्रशासन का असहयोग अन्नदाता के लिए फजीहत का कारण बन रहा है। रबी सीजन की तैयारी कर रहे किसानों को खाद खरीदने और धान बेचने के लिए किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। खाद वितरण केंद्रों और विपणन सहकारी समितियों के खरीदी केंद्रों पर कड़ाके की ठंड के बीच किसान खुले में सोने मजबूर हो रहे हैं। किसानों को 10 से 11 डिग्री तापमान में अपनी ट्रॉलियों पर रात गुजारनी पड़ रही है। रबी सीजन की तैयारी कर रहे किसान कड़ाके की ठंड के बावजूद खाद के लिए घंटों कतारों में खड़े रहे। सोमवार सुबह लगभग पांच बजे से ही खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की लंबी लाइनें लग गईं। इन कतारों में पुरुषों के साथ महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल थे, जो सर्द हवाओं के बीच अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। खाद वितरण में देरी के कारण किसानों में बेचैनी और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। किसानों के अनुसार, समय पर खाद न मिलने से बोवनी और फसल प्रबंधन प्रभावित हो रहा है। ठंड के मौसम में सुबह-सुबह लंबी कतारों में खड़ा होना बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है, फिर भी वे मजबूरीवश केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। इस संबंध में जिला विपणन अधिकारी (डीएमओ) सत्येंद्र सिंह ने जानकारी दी कि 9, 15 और 22 दिसंबर की तारीख वाले किसानों को खाद का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आज लगभग 2000 किसानों को खाद उपलब्ध करा दी जाएगी। प्रशासन टोकन प्रणाली के माध्यम से वितरण को व्यवस्थित रखने का प्रयास कर रहा है, ताकि भीड़ और अव्यवस्था को रोका जा सके।डीएमओ सत्येंद्र सिंह ने आगे बताया कि 29 दिसंबर को 1700 टोकन वितरित किए गए थे और इन टोकन धारक किसानों को 9 जनवरी तक खाद उपलब्ध करा दी जाएगी। प्रशासन का दावा है कि खाद की पर्याप्त उपलब्धता है और सभी पात्र किसानों को चरणबद्ध तरीके से खाद दी जाएगी। वितरण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए केंद्रों पर कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई गई है। 10 डिग्री पारे में खुले में सो रहे किसान नर्मदापुरम में कड़ाके की ठंड के बीच किसान अपनी उपज बेचने के लिए खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं। संभागीय मुख्यालय स्थित अनाज मंडी में नर्मदांचल विपणन सहकारी समिति के खरीदी केंद्र पर अव्यवस्थाओं के चलते किसानों को 10 से 11 डिग्री तापमान में अपनी ट्रॉलियों पर रात गुजारनी पड़ रही है। मंडी में 150 से ज्यादा ट्रॉलियां कतार में खड़ी थीं और किसान फसलों की सुरक्षा के लिए ठंड में ठिठुरते हुए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। यहां अलाव तक की व्यवस्था नहीं है। आंचलखेड़ा के किसान राजू यादव ने बताया कि मंडी में तीन दिन से आया हूं। रात में फसल की सुरक्षा के लिए रोजाना ट्रॉली पर ही सो रहा हूं। ठंड और ओस से बचाव के लिए तीन कंबल डालते हैं। सुबह तक एक कंबल ओस से गीला हो जाता है। वहीं, डोंगरवाड़ा के किसान राकेश कीर ने बताया कि रात में परिसर में अलाव जलाने की कोई व्यवस्था नहीं है। फसल और ट्रैक्टर के सामान चोरी होने का डर रहता है, इसलिए मजबूरन ट्रॉलियों पर ही ठंड में सो रहे हैं। अलाव जलाना समिति की जिम्मेदारी नियमों के अनुसार, उपार्जन केंद्रों पर सीजन के हिसाब से सुविधाएं देना समिति की जिम्मेदारी है। गर्मी में टेंट और ठंड में अलाव व सोने की व्यवस्था होनी चाहिए, जो यहां नजर नहीं आ रही। अनाज मंडी के सचिव रामनाथ इवने का कहना है कि आज से तेज ठंड पड़ रही है, इसलिए सोमवार से अलाव जलाने का कह रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मंडी में फसल बेचने वाले 25-30 किसान ही रोजाना आते हैं और उनकी फसल दिन में बिक जाती है। जबकि परिसर में उपार्जन खरीदी चल रही है, जहां अलाव की व्यवस्था करना समिति का काम है। धान खरीदी पर कमीशनखोरी का आरोप पन्ना जिले के अजयगढ़ में सोमवार को किसानों ने तहसील कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने धान खरीदी केंद्रों पर कमीशनखोरी, अव्यवस्था और उत्तर प्रदेश से अवैध धान खपाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के समाधान की मांग की। किसानों ने ज्ञापन में बताया कि अजयगढ़ क्षेत्र के धान खरीदी केंद्रों पर स्थिति नियंत्रण से बाहर है। कुछ दिन पहले मझगांय के बैरागा केंद्र पर भी किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर प्रदर्शन किया था। उस समय अधिकारियों ने आश्वासन देकर जाम खुलवाया था, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। किसानों का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर खुलेआम कमीशन की मांग की जा रही है। जो किसान कमीशन नहीं दे पाते, उनकी धान की फसल खुले आसमान के नीचे पड़ी खराब हो रही है। इसके साथ ही, बिचौलियों और व्यापारियों की मिलीभगत से उत्तर प्रदेश से लाई गई सस्ती धान को स्थानीय खरीदी केंद्रों पर बेचा जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसानों ने तहसीलदार सुरेंद्र कुमार को ज्ञापन सौंपा। उनकी मुख्य मांगें हैं कि स्लॉट बुक करा चुके किसानों की धान तुरंत खरीदी जाए, खरीदी केंद्रों से बिचौलियों और दलालों को हटाया जाए, और उत्तर प्रदेश से आ रही अवैध धान की कड़ी जांच की जाए। केंद्रों पर भ्रष्टाचार हावी किसान यूनियन के अध्यक्ष कमलेश पटेल बाबा जी ने आरोप लगाया कि कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान अपनी फसल लेकर खड़े हैं, लेकिन केंद्रों पर भ्रष्टाचार हावी है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की धान खरीदी जा रही है, जबकि असली किसानों के स्लॉट समाप्त हो रहे हैं। पटेल ने चेतावनी दी कि यदि यह धांधली नहीं रुकी तो किसान बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। विनोद उपाध्याय / 05 जनवरी, 2026