लेख
06-Jan-2026
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आज आत्महत्या की घटना मीडिया में लागातार देखने को मिल रही है जो अधिकतर तनाव के कारण हो रहा है हाल ही में महाराष्ट्र के सांगली शहर के रहने वाले एक स्कूली छात्र ने दिल्ली के एक मेट्रो स्टेशन पर आत्महत्या कर ली. छात्र ने सुसाइड से पहले एक नोट में लिखा था कि वह शिक्षकों की प्रताड़ना से तंग आकर अपनी जान दे दि उधर हरियाणा के सिरसा में जेल वार्डन ने की आत्महत्या. डीएसपी समेत दो अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप. जेल वार्डन सुसाइड लेटर में डीएसपी के नाम सामने आए। एक चौंकाने वाली घटना में दिल्ली के कालकाजी में एक 52 साल की महिला और उसके दो बेटों ने आत्महत्या कर ली। तनाव, टेंशन, एंक्जाइटी, स्टैªस जैसे शब्द आज की भागदौड़ की जिंदगी में प्रायः सुनने को मिल जाते हैं। छोटे-छोटे बच्चे भी ’टेंशन’ का प्रयोग करते हुए देखे जा सकते हैं और बड़े से बड़े व्यक्ति भी। यह तनाव अथवा टेंशन ऐसी क्या चीज है जिसने प्रायः मनुष्य को अपने जाल में जकड़ लिया है। यह तनाव मन से संबंिधत एक स्थिति है जो लगातार बनी रहने पर प्राणघातक हो सकती है।प्राचीन काल में यह तनाव किसी-किसी व्यक्ति में देखने को मिलता था लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि यह अपवादस्वरूप ही किसी में न हो। जिस व्यक्ति में आज तनाव नहीं है, वह व्यक्ति आज समाज के समक्ष आश्चर्य का विषय बन जाता है। अभी कुछ समय पूर्व‘हिंदुस्तान‘ में प्रकाशित एक सर्वे में बताया गया था कि मानसिक रोगियों की संख्या में लगातर वृद्धि हो रही है। ’तनाव जैसे रोग आधुनिक वैज्ञानिक युग की देन है।’ ऐसा कहना अतिशयोक्तिपूण न होगा। जहां वैज्ञानिक युग के नए-नए आविष्कार व्यक्ति में तनाव-वृद्धि में सहायक हो रहे हैं, वहीं उसकी नकारात्मक सोच, अनिंयत्रि़त जीवन-शैली भीतनाव-वृद्धि कर रही है। प्रश्न किया जा सकता है कि नकारात्मक सोच और अनिंयत्रि़त एवं अनियमित जीवन-शैली तो तनाव में वृद्धि करती है किंतु वैज्ञानिक आविष्कार कैसे? आप ही बताइये कि विज्ञान के नित नए आविष्कार जैसे फ्रिज, टेलीफोन, कारटेलीविजन, वाशिंग मशीन, कंप्यूटर, एक से एक फीचर वाले मोबाइल, और भी न जाने क्या-क्या, इन सभी चीजों ने व्यक्ति को सुविधाभोगी बना दिया है। आज के समय में हर व्यक्ति इनको पाना चहता है लेकिन इन्हें पाने के लिए चाहिए पैसा। यदि उसके पास पैसा नहीं है, तो उसके पास ये सब चीजें नहीं होंगी। और यदि वह यह सब पाना चाहता है तो उसे इकट्ठा करना होगा पैसा, पैसे को एकत्रित करने के लिए उसे मारामारी करनी पड़ती है। अगर इस सब बात का एक वाक्य में कहा जाए तो कहा जा सकता है कि भौतिक संसाधनों को इकट्ठा करने के लिए की जाने वाली भागमभाग तनाव वृद्धि का एक बड़ा कारण बन रही है। इसप्रकार लगातार भागदौड़ करने का परिणाम होता है कि वह ढंग से सो नहीं पाता और जब वह सो पाता है, तो सवेरे समय पर उठ नहीं पाता।जब उसकी आंख खुलती है और वह घड़ी देखता है तो वह समय आॅफिस पहुंचने का है। अब उसका तनाव बढ़ने लगता है, समय पर आॅफिस पहुचने के लिए वह काम को जल्दी-जल्दी करने लगता है जिससे कई काम हो जाते हैं और कई आवश्यक और महत्वपूर्ण काम करने भूल जाता है। उन कामों की याद उसे आॅफिस पहुंचने पर आती है लेकिन अब तो कुछ हो ही नहीं सकता, सिर्फ तनाव के। जब ऐसी स्थिति लगातार बनी रहती है, तो अब यह मन से उतरकर शरीर के विभिन्न अंगों पर अपना प्रभाव डालने लगती है। उसका प्रभाव शरीर पर कुछ यों दिखने लगता है-व्यक्ति को भूख नहीं लगती, उसे नींद नहीं आती, मांसपेशियों में जकड़न बनी रहती है, हृदय की धड़कन बढ़ी रहती है, सीने में जब-तब दर्द हो जाता है, बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होती रहती है, खाने-पीने और सोने की आदतों में अजीबोगरीब परिवर्तन आने लगता है, रक्तचाप कम या अधिक होने लगता है, कब्ज की शिकायत हो जाती है, कभी-कभी अस्थमा का आक्रमण हो जाता है, चिडचिड़ापन और क्रोध बढ़ जाता है, सिरदर्द रहने लगता है, कभी-कभी बेहोशी भी आ जाती है। व्यक्ति अगर विद्यार्थी है तो उसका मन पढ़ने से हटने लगता है, वह नर्वस रहने लगता है, एकाग्रता घट जाती है, गैस भी बनने लगती है, काम करने का मन नहीं करता, अकेले रहने का जी चाहने लगता है अथवा वक्त बाहर ही गुजारने का मन करने लगता है। कहने का अर्थ सिर्फ इतना ही है कि मन से संबंध रखने वाला तनाव शरीर को विभिन्न रोगों से ग्रस्त कर देता है।इस बात को भलीभांति अपने मन में बिठा लें। इस बात पर बार-बार चिंतन आपको तनावरहित अवश्य कर देगा। लेकिन हां, अपने कर्तव्य को निष्ठा और ईमानदारी से करें।कभी-कभी पहले प्राप्त असफलता व्यक्ति को निराश करती है, उसमें तनाव की वृद्धि करती है। ऐसे समय में क्या करें? क्या पहले की असफलता को याद करके तनाव में रहें? नहीं आपको ऐसा नहीं करना। ऐसे में आपको तिनका लेकर बार-बार चढ़ने वाली चींटी की कहानी को याद रखना चाहिए। कहानी है-एक बार एक चींटी एक तिनका लेकर दीवार पर चढ़ती है। वह अभी थोड़ी ही दूर चढ़ी थी कि वह नीचे आकर गिर जाती है। वह फिर दोबारा चढती है और इस बार वह पहले से अधिक ऊपर चढ जाती है लेकिन इस बार भी वह फिर नीचे गिर जाती है। ऐसा ही तीसरी, चैथी, पांचवीं, छठी.....बार और न जाने कितनी बार होता है। पर चींटी को भी जिद है कि उसे वह तिनका लेकर ऊपर चढ़ना ही है। एक समय आता है कि चींटी तिनका लेकर चढ़ने में सफल हो जाती है। बार-बार सोचें कि जब चींटी अपने कार्य को सफलतापूर्वक कर सकती है तो आप क्यों नहीं। तो साथियों, असफल होने पर हताश और निराश होने की आवश्यकता नहीं, असफल होने के कारणों पर गंभीरता से चिंतन कर उन्हें दूर करें। फिर दोगुने उत्साह से काम का शुभारंभ करें। एकाग्रचित्त होकर काम करने से काम शीघ्र संपन्न होता है, इस बात का सदा ध्यान रखें। तनाव को अपने जीवन से दूर किया जा सकता .बिल्कुल सकारात्मक है। सबसे पहले व्यक्ति को अपने मन में यह बातबैठानी होगी कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निवास होता है। अतः व्यक्ति का पहला कर्तव्य है कि वह अपना शरीर स्वस्थ रखे। शरीर स्वस्थ रहता है संतुलित भोजन से। इसलिए संतुलित आहार के प्रति व्यक्ति को अपनी रुचि बढानी चाहिए। प्रातः की शुरुआत ही संतुलित और शक्तिवर्धक नाश्ते के साथ होनी चाहिए। यह आहार मन की एकाग्रता को बनाए रखने में भी सहायक होता है।डिब्बाबंद आहार शारीरिक स्वास्थ्य को नष्ट करते हैं क्योंकि इनमें वसा, नमक, कैलोरीज की मात्रा अधिक होती है। अतः इस आहार के स्थान पर फल, दलिया, कार्नफ्लैक्स, साबुदाना जैसे पदार्थों का प्रयोग बढायें। ये आहार आपके पेट को ठीक रखते हैं। गहरी एवं सुखद नींद तनाव को दूर करती है। बिना किसी कारण यदि नींद आने में बाधा आती है ता डाॅक्टर को दिखायें। शारीरिक व्यायाम, योग एवं ध्यान का अपनी दिनचर्या में शामिल करें। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए सुनियोजित एवं सुनिंयत्रित व्ययाम करें। संभव हो तो पार्क में जाकर खेलें अथव घूमें।आपके मन में यह भी विचार आ रहा होगा कि सामान्य दिनचर्या में तो यह सब करना संभव हो सकता है किंतु कुछ विशिष्ट एवं महत्वपूर्ण कार्य आ जाने पर तनावरहित कैसे रहा जा सकता है? इसप्रकार की समस्याओं के निदान के लिए ये उपाय अपना कर देख्ेा जा सकते हैं-दैनिक जीवन के क्रियाकलापों के बीच महत्वपूर्ण कार्य अथवा कोई समस्या आ जाए तो घबरायें नहीं। तसल्लीबख्श कुछ क्षण उस पर विचार करें। एक योजना बनाएं और देखें कि सबसे अधिक महत्वपूर्ण क्या है, उसको करने में क्या-क्या कठिनाईयां आ सकती हैं, साथ ही उनका निदान कैसे किया जा सकता है, इन सब बातों पर विचार करने के बाद ही उस काम को प्रारंभ करें। अपने आत्मविश्वास को डगमगाने न दें। ‘कर्मण्येवाधिकरास्तेमा फलेषु कदाचन‘ अर्थात कर्म करने में ही तुम्हारा अधिकार है, फल में नहीं। ईएमएस / 06 जनवरी 26