राष्ट्रीय
06-Jan-2026
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नई दिल्ली(ईएमएस)। अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों में हाल के दिनों में तल्खी देखने को मिली है। अमेरिकी प्रशासन ने भारत द्वारा रूसी तेल के आयात को लेकर अपना रुख कड़ा कर लिया है, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय उत्पादों पर टैरिफ यानी आयात शुल्क बढ़ाने की चेतावनी दी गई है। इसी भू-राजनीतिक गहमागहमी के बीच, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की जामनगर रिफाइनरी को लेकर मीडिया में आई एक रिपोर्ट ने विवाद को और हवा दे दी है। हालिया दावों में कहा गया था कि रूसी कच्चे तेल की बड़ी खेपें रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की ओर बढ़ रही हैं। हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इन खबरों का पुरजोर खंडन किया है और इन्हें पूरी तरह से निराधार और भ्रामक करार दिया है। कंपनी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि पिछले तीन सप्ताहों से उनकी किसी भी रिफाइनरी पर रूसी कच्चे तेल की कोई खेप नहीं पहुंची है। इसके साथ ही, कंपनी ने यह भी साफ कर दिया है कि जनवरी के पूरे महीने में भी रूस से किसी भी तरह की तेल डिलीवरी होने की कोई संभावना या योजना नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि भारत अपनी ऊर्जा और व्यापार नीतियों को अमेरिका की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं ढालता है, तो वे भारतीय सामानों पर बहुत जल्द भारी टैरिफ लगा सकते हैं। व्हाइट हाउस द्वारा साझा किए गए एक ऑडियो संदेश में ट्रंप ने उल्लेख किया कि भारत के साथ व्यापारिक संतुलन बनाना उनकी प्राथमिकता है और यदि आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो इसका भारतीय निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह स्थिति भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर पैदा हुई नई चुनौतियों को रेखांकित करती है। कंपनी ने अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने वाली इन रिपोर्ट्स पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। रिलायंस की ओर से कहा गया कि उन मीडिया दावों में कोई सच्चाई नहीं है जिनमें तीन जहाजों के रूसी तेल लेकर जामनगर की ओर बढ़ने की बात कही गई थी। कंपनी ने जोर देकर कहा कि जिम्मेदार पत्रकारिता के मानकों का पालन किया जाना चाहिए और बिना तथ्यों की जांच किए ऐसी खबरें प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए जो किसी संस्थान की वैश्विक साख को प्रभावित करती हों। इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि लगभग 22 लाख बैरल रूसी उरल्स क्रूड तेल लदे टैंकर जनवरी के पहले सप्ताह में भारत पहुंचने वाले हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत सरकार का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार यह दोहराया है कि वह अपनी विशाल जनसंख्या की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी सुविधा और राष्ट्रीय हित के अनुसार आयात के फैसले लेता रहेगा। वैश्विक स्तर पर तेल की राजनीति और अमेरिका द्वारा अन्य तेल उत्पादक देशों पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति पर दुनिया भर की नजरें टिकी हैं। भारत की नीतियां मुख्य रूप से घरेलू ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं, जो उसे वैश्विक दबावों के बीच एक स्वतंत्र रणनीतिक मजबूती प्रदान करती हैं। फिलहाल, रिलायंस के स्पष्टीकरण और अमेरिका की चेतावनी ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है। वीरेंद्र/ईएमएस/06जनवरी2026