- वीजी-जी रामजी बिल से छीना जा रहा ग्रामीणों का काम का अधिकार भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष विभा पटेल ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीजी-जी रामजी ) बिल, 2025 को ग्रामीण भारत के काम के अधिकार पर सीधा हमला करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह योजना यूपीए सरकार द्वारा दिए गए रोजगार के संवैधानिक अधिकार को कमजोर करती है और मनरेगा की मूल भावना को समाप्त करने की कोशिश है। विभा पटेल ने कहा कि मोदी सरकार ने सुनियोजित तरीके से मनरेगा की अवधारणा बदल दी है। सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं किया गया, बल्कि योजना की आत्मा को ही कुचल दिया गया है। काम के अधिकार को पूरी तरह केंद्र सरकार की अनिश्चित मेहरबानी पर छोड़ दिया गया है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों की कानूनी रोजगार गारंटी कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि अब तक मनरेगा पर कुल व्यय का लगभग 90 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन नए प्रावधानों के तहत देश के अधिकांश राज्यों में केंद्र का योगदान घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। शेष 40 प्रतिशत का बोझ राज्यों पर डाला जा रहा है, जो राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर सीधा हमला है। इससे पंचायती राज व्यवस्था और ग्राम सभाओं की भूमिका भी कमजोर होगी। विभा पटेल ने आरोप लगाया कि 100 दिन के रोजगार को 125 दिन करने की बात महज एक दिखावा है, क्योंकि राज्य सरकारों के लिए वित्तीय सहायता की कोई ठोस गारंटी नहीं दी गई है। यह भी तय करने का पूरा अधिकार केंद्र सरकार के पास होगा कि धन का आवंटन किस आधार पर होगा और किन पंचायतों को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश पहले से ही करीब चार लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के बोझ में है और वह अपने बुनियादी दायित्वों को निभाने में असफल नजर आ रहा है। ऐसे में राज्य सरकार नई व्यवस्था में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी कैसे निभाएगी, यह समझ से परे है। विभा पटेल ने चिंता जताई कि खेती के महीनों में इस कार्यक्रम को लागू न करने का प्रावधान खेत मजदूरों की उस ताकत को छीन लेगा, जो उन्हें मजदूरी और काम की शर्तों पर मोलभाव के लिए पिछले एक दशक में मिली थी। उन्होंने कहा कि यह बिल जीवन के मौलिक संवैधानिक अधिकार के तहत मिलने वाले काम के अधिकार को कमजोर करता है और संविधान की मूल भावना के विपरीत है। विनोद / 07 जनवरी 26