क्षेत्रीय
08-Jan-2026
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- 30 लाख फर्जी कार्ड निरस्त, रईस गटक रहे थे गरीबों का निवाला भोपाल(ईएमएस)। मध्य प्रदेश में सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ गरीबों के लिए आरक्षित मुफ्त राशन पर अमीर और रसूखदार लोग डाका डाल रहे थे। राज्य सरकार द्वारा कराए गए व्यापक भौतिक सत्यापन के बाद प्रदेश भर में करीब 30 लाख फर्जी लाभार्थियों के राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं। इस कार्रवाई से न केवल सरकारी खजाने की लूट रुकी है, बल्कि उन लाखों वास्तविक जरूरतमंदों के लिए रास्ता साफ हो गया है जो लंबे समय से प्रतीक्षा सूची में थे। खाद्य आपूर्ति विभाग की इस जांच रिपोर्ट में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे हैरान करने वाले हैं। सत्यापन के दौरान पता चला कि गलत तरीके से मुफ्त राशन का लाभ लेने वालों में 1500 ऐसे लोग शामिल थे, जो निजी कंपनियों में डायरेक्टर जैसे उच्च पदों पर कार्यरत हैं। इतना ही नहीं, 38 हजार लोग ऐसे पाए गए जो नियमित रूप से इनकम टैक्स फाइल करते हैं और जिनकी वार्षिक आय 6 लाख रुपये से अधिक है। डेटा मिलान के दौरान यह भी सामने आया कि कई लोग संपन्न होने के बावजूद अंत्योदय और बीपीएल श्रेणी का लाभ उठा रहे थे। खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह सत्यापन प्रक्रिया पिछले एक साल से चल रही थी। विभाग ने आयकर विभाग के डेटाबेस और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के साथ राशन कार्ड धारकों की जानकारी का मिलान (क्रॉस चेक) किया, जिससे इस फर्जीवाड़े की परतें खुलीं। विभाग का कहना है कि अयोग्य लोगों की भारी भीड़ के कारण राशन का कोटा फुल हो गया था, जिससे वास्तविक पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित रह जाते थे। इस बड़ी कार्रवाई का सबसे सुखद पहलू यह है कि अब प्रदेश के लगभग 14 लाख नए और पात्र लाभार्थियों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। वर्तमान में मध्य प्रदेश में करीब 1.31 करोड़ राशन कार्ड धारक हैं, जिन्हें 28 विभिन्न श्रेणियों के तहत हर महीने मुफ्त अनाज दिया जाता है। प्रशासन का मानना है कि इस शुद्धीकरण अभियान से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सरकारी संसाधन सीधे उन लोगों तक पहुँचेंगे जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। सरकार अब उन लोगों पर भी कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही है जिन्होंने गलत जानकारी देकर सालों तक गरीबों का राशन हड़पा है। वीरेंद्र/ईएमएस/08जनवरी2026