लेख
08-Jan-2026
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(प्रवासी भारतीय दिवस) भारत केवल एक भूगोल नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कारों और साझा स्मृतियों की निरंतर धारा है। यह धारा देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि समय के साथ समुद्रों, महाद्वीपों और संस्कृतियों को पार करती हुई विश्व के कोने-कोने तक पहुँची। इसी वैश्विक विस्तार का मानवीय रूप है प्रवासी भारतीय समुदाय। इन्हीं प्रवासी भारतीयों के योगदान, संघर्ष, उपलब्धियों और भारत से उनके अटूट रिश्ते को सम्मान देने के लिए हर वर्ष नौ जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है। वर्ष दो हजार पंद्रह के बाद से यह आयोजन हर दो वर्ष में एक बार बड़े सम्मेलन के रूप में आयोजित किया जाने लगा है, लेकिन दिवस के रूप में इसका प्रतीकात्मक महत्व निरंतर बना हुआ है। नौ जनवरी की तिथि का अपना ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व है। इसी दिन वर्ष उन्नीस सौ पंद्रह में महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। विदेश की धरती पर रहते हुए उन्होंने सत्य और अहिंसा के प्रयोग किए, रंगभेद के विरुद्ध संघर्ष किया और वहीं से एक ऐसे नेतृत्व का निर्माण हुआ, जिसने आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। गांधीजी का यह लौटना केवल एक व्यक्ति की वापसी नहीं थी, बल्कि यह संदेश था कि विदेश में अर्जित अनुभव, ज्ञान और संघर्ष की ऊर्जा मातृभूमि के उत्थान में कितनी निर्णायक भूमिका निभा सकती है। प्रवासी भारतीय दिवस इसी विचार का आधुनिक विस्तार है। प्रवासी भारतीय दिवस का मूल उद्देश्य भारत और विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के बीच सेतु बनाना है। यह एक ऐसा मंच है जहाँ भावनात्मक जुड़ाव के साथ-साथ विचारों का आदान-प्रदान होता है। प्रवासी भारतीय अपने अनुभव साझा करते हैं, भारत की विकास यात्रा में सहभागी बनने के नए रास्ते तलाशते हैं और भारत सरकार भी उनकी अपेक्षाओं, समस्याओं तथा सुझावों को प्रत्यक्ष रूप से सुनती है। यह आयोजन यह स्पष्ट करता है कि भारत अपने नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों को केवल पासपोर्ट या निवास की परिभाषा में नहीं बाँधता, बल्कि उन्हें अपनी व्यापक राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा मानता है। वर्ष दो हजार तीन में इस सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई थी। उस समय यह महसूस किया गया कि विश्व भर में फैले भारतीय समुदाय ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, शिक्षा, उद्योग, व्यापार, कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। इन उपलब्धियों का लाभ केवल संबंधित देशों तक सीमित न रहे, बल्कि भारत की प्रगति में भी उनका समुचित योगदान सुनिश्चित हो। तभी से प्रवासी भारतीय दिवस एक संवाद, सम्मान और सहभागिता का उत्सव बन गया। हाल के वर्षों में इस आयोजन का स्वरूप और अधिक व्यापक हुआ है। दो हजार पच्चीस में आयोजित अठारहवें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में ‘विकसित भारत में प्रवासी भारतीयों का योगदान’ विषय विशेष रूप से प्रासंगिक रहा। यह विषय इस बात को रेखांकित करता है कि आने वाले वर्षों में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना में प्रवासी भारतीयों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। निवेश, नवाचार, कौशल, वैश्विक संपर्क और सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से प्रवासी भारतीय भारत के विकास लक्ष्य को गति दे सकते हैं। इस सम्मेलन के दौरान विशेष पर्यटक रेल सेवा का शुभारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य प्रवासी भारतीयों को भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना है। इसके साथ ही ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्रदर्शनों के माध्यम से उन भारतीयों की यात्रा को भी सामने लाया गया, जो कभी गुजरात के तटों से निकलकर ओमान, अफ्रीका और अन्य देशों में बसे। यह इतिहास केवल पलायन की कहानी नहीं है, बल्कि साहस, परिश्रम और अनुकूलन की प्रेरक गाथा है। प्रवासी भारतीय दिवस के विमर्श में गिरमिटिया मजदूरों का स्मरण विशेष महत्व रखता है। औपनिवेशिक काल में हजारों भारतीयों को अनुबंधित मजदूर के रूप में फिजी, मॉरीशस, त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे देशों में ले जाया गया। कठिन परिस्थितियों, शोषण और अपमान के बावजूद उन्होंने अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखा। आज उन्हीं के वंशज उन देशों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनका स्मरण हमें यह सिखाता है कि भारतीय पहचान कितनी दृढ़ और जीवंत है। प्रवासी भारतीय दिवस का एक महत्वपूर्ण पक्ष है प्रवासी भारतीय सम्मान। यह सम्मान उन व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने विदेशों में रहते हुए भारत की छवि को सशक्त किया, स्थानीय भारतीय समुदाय के कल्याण के लिए कार्य किया और भारत तथा अपने निवास देश के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत बनाया। यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि का नहीं, बल्कि सामूहिक गौरव का प्रतीक है। इस आयोजन की उपयोगिता अनेक स्तरों पर दिखाई देती है। आर्थिक दृष्टि से देखें तो प्रवासी भारतीय निवेश, प्रेषण और व्यापार के माध्यम से भारत की अर्थव्यवस्था को सशक्त करते हैं। विदेशों से आने वाला धन केवल परिवारों की आजीविका ही नहीं सुधारता, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्यमिता को भी बढ़ावा देता है। बौद्धिक स्तर पर प्रवासी भारतीय अपने ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के अनुभव भारत के साथ साझा करते हैं, जिससे देश में नई सोच और तकनीक का प्रवेश होता है। सांस्कृतिक दृष्टि से प्रवासी भारतीय दिवस भारत की नरम शक्ति को मजबूत करता है। योग, आयुर्वेद, भारतीय संगीत, नृत्य और त्योहारों के माध्यम से भारतीय संस्कृति विश्व में सम्मान प्राप्त कर रही है। प्रवासी भारतीय इस सांस्कृतिक दूत की भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी प्रवासी समुदाय विभिन्न देशों में भारत के पक्ष को समझाने और समर्थन जुटाने में सहायक सिद्ध होता है। युवा प्रवासी भारतीय दिवस इस आयोजन का एक विशेष और दूरदर्शी आयाम है। युवा पीढ़ी, जो विदेशों में जन्मी या पली-बढ़ी है, उसके लिए भारत कभी-कभी केवल एक पारिवारिक स्मृति बनकर रह जाता है। यह विशेष कार्यक्रम उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ता है, भारत की समकालीन वास्तविकताओं से परिचित कराता है और उन्हें यह एहसास दिलाता है कि भारत केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं से भरा देश है। प्रवासी भारतीय दिवस मनाने का महत्व केवल उत्सव तक सीमित नहीं है। यह आत्ममंथन का अवसर भी है। यह भारत को यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि वह अपने प्रवासी समुदाय की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतर पा रहा है। साथ ही यह प्रवासी भारतीयों को भी यह याद दिलाता है कि उनकी पहचान, जिम्मेदारी और योगदान केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं, बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय संदर्भ से जुड़ा हुआ है। आज के वैश्वीकृत युग में जब पहचानें तेजी से बदल रही हैं, प्रवासी भारतीय दिवस स्थायित्व का प्रतीक बनकर उभरता है। यह बताता है कि दूरी भौगोलिक हो सकती है, भावनात्मक नहीं। भारत और प्रवासी भारतीयों का रिश्ता समय, राजनीति और परिस्थितियों से परे है। यह रिश्ता साझा मूल्यों, स्मृतियों और भविष्य के सपनों से बना है। अंततः प्रवासी भारतीय दिवस भारत के उस आत्मविश्वास का उत्सव है, जो अपने बेटों और बेटियों को दुनिया में आगे बढ़ते देखकर गर्व करता है और उन्हें फिर से अपनी विकास यात्रा में सहभागी बनने के लिए आमंत्रित करता है। यह दिवस यह संदेश देता है कि भारत की प्रगति की कहानी अधूरी है, जब तक उसमें प्रवासी भारतीयों की सहभागिता, अनुभव और ऊर्जा शामिल न हो। यही कारण है कि प्रवासी भारतीय दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक आत्मा का उत्सव है। (वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार, स्तम्भकार) (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 8 जनवरी /2026