बांग्लादेश के एक करोड़ तीस लाख हिन्दुओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है एक बांग्लादेशी चरमपंथी उस्मान हादी की हत्या के बाद तो हिंदुओं के नरसंहार की झड़ी लग गई है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदायों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। सोमवार को देर रात एक हिंदू दुकानदार मोनी चक्रवर्ती की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जो पिछले 24घंटों में इस तरह की दूसरी घटना है। इससे पहले राणा प्रताप बैरागी नाम के युवक को जान से मार डाला। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। शर्मनाक बात यह है कि कथित मानवाधिकार का संरक्षण करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और पश्चिमी दुनिया के किसी देश ने बांग्लादेश में कई जा रही सांप्रदायिक हिंसा दरिंदगी के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठायी है इससे पता चलता है कि दुनिया का रवैया हिन्दुओं के प्रति कितना असंवेदनशील है। यहां यह भी तथ्य गौरतलब है कि हमारे देश की मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले तमाम विपक्षी दलों के नेताओं ने भी कभी इन बर्बर वारदातों के खिलाफ प्रदर्शन या विरोध की जहमत नहीं की है। आपको बता दें चोबीस घंटे में दो हिन्दुओं को कट्टरपंथी मजहबी हत्यारों ने मौत के घाट उतार दिया है। 5जनवरी को रात करीब 10बजे नरसिंग्दी जिले के पोलाश उपजिला के चोर्सिंदूर बाजार में किराना दुकान चलाने वाले हिंदू व्यापारी मोनी चक्रवर्ती पर अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियारों से हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल मोनी को अस्पताल ले जाते समय ही मौत हो गई। तो वहीं, परिवार का कहना है कि मोनी का किसी से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं था। वे शांत स्वभाव का था उनकी पत्नी अंतरा मुखर्जी हाउसवाइफ हैं और उनका 12वर्षीय बेटा अभिक चक्रवर्ती है।इसी दिन जेस्सोर जिले में एक अन्य हिंदू कारोबारी 38 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी की सिर में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी, जो एक समाचार पत्र के कार्यवाहक संपादक भी थे। आप जानते हैं कि इन दिनों बांग्लादेश में कट्टरपंथी उन्मादी हिन्दुओं के खिलाफ खून खराबा कर रहे हैं। आपको पता है कि बंगलादेश में जून, 2024 में शेख हसीना की सरकार के विरुद्ध आरक्षण और नौकरियों आदि में भेदभाव जैसे मुद्दों को लेकर छात्रों द्वारा शुरू किए गए आंदोलन के 3 महीनों बाद अंततः 5 अगस्त, 2024 को शेख हसीना को गद्दी छोड़नी पड़ी और तब से उन्होंने भारत में ही शरण ले रखी है। शेख हसीना के भारत आने के बाद सेना ने जब मोहम्मद यूनुस को देश की सत्ता सौंप दी तो उम्मीद थी कि शायद वह उदारवादी रवैया अपना कर देश में व्याप्त असंतोष दूर करने और वातावरण सामान्य बनाने में सहायता करेंगे। आशा के विपरीत मो. यूनुस ने देश की पाठ्य पुस्तकों से बंगलादेश के मुक्ति संग्राम और बंग बंधु शेख मजीबुर्रहमान से संबंधित अध्याय निकाल देने का आदेश जारी करके देश के मुक्ति संग्राम का इतिहास मिटाने की कोशिशें शुरू कर दीं और सैंकड़ों आतंकवादियों को जमानत देकर या उनके विरुद्ध आरोप वापस लेकर उन्हें जेलों से बाहर कर दिया है। सेना और कट्टरपंथियों के दबाव में आकर यूनुस प्रशासन ने देश में 12 फरवरी, 2026 को चुनाव करवाने की घोषणा की है। इसके साथ ही यूनुस ने शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग पर प्रतिबंध लगाकर उसे क्रियात्मक रूप से चुनावों में भाग लेने से रोक दिया है। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के अगले ही दिन कट्टरपंथी संगठन इन्कलाब मंच के प्रवक्ता और छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी ने ढाका-8 सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी परंतु इसके अगले ही दिन सरेआम एक मोटरसाइकिल सवार ने उसकी हत्या कर दी। दरअसल चुनावों के लिए तय तारीख की घोषणा के साथ ही बंगलादेश में हिंदुओं पर हमले बढ़ गए तथा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दो दिसंबर, 2025 से पिछले लगभग 35 दिनों में बांग्लादेश में कम से कम एक दर्जन हिंदुओं की हत्या की गई है। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद द्वारा आज जारी एक बयान के अनुसार, अकेले दिसंबर में सांप्रदायिक हिंसा की कम से कम 51 घटनाएं दर्ज की गईं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, 19 दिसंबर को शरत चक्रवर्ती ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर देश में हिंसा पर चिंता जताई थी, जिसमें उन्होंने अपनी जन्मभूमि को मौत की घाटी बताया था। एक चश्मदीद और रिश्तेदार प्रदीप चंद्र बर्मन ने इस हमले को सोची-समझी साजिश बताया। उन्होंने कहा, पहले से दुश्मनी थी.. उन्होंने (हमलावरों ने) उनका मोबाइल फोन या मोटरसाइकिल नहीं छीनी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दो दिसंबर, 2025 : 42 वर्षीय सोने के हिंदू व्यापारी प्रांतोष कर्मकार की रात के समय बांग्लादेश के नरसिंगदी जिले के रायपुरा उपजिला में गोली मारकर हत्या कर दी गई।दो दिसंबर, 2025 : 35 वर्षीय हिंदू मछली व्यापारी उत्पल सरकार की सुबह के समय फरीदपुर जिले के साल्था उपजिला में बेरहमी से हत्या कर दी गई।सात दिसंबर, 2025 : 1971 के मुक्ति संग्राम के मुक्तिजोद्धा 75 वर्षीय जोगेश चंद्र राय और उनकी पत्नी सुबोर्ना राय सात दिसंबर की रंगपुर में गला रेतकर हत्या।12 दिसंबर, 2025 : 18 वर्षीय हिंदू ऑटो रिक्शा ड्राइवर शांतो चंद्र दास कुमिला जिले में मृत पाए गए। उनका गला रेतकर शव मक्के के खेत में फेंक दिया गया था।18 दिसंबर, 2025 : मैमनसिंह के भलुका में 27 वर्षीय हिंदू गारमेंट वर्कर दीपू चंद्र दास को इस्लामी भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला।24 दिसंबर, 2025 : राजबाड़ी जिले के 30 वर्षीय हिंदू अमृत मंडल को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। उसके खिलाफ कई मामले दर्ज थे। 29 दिसंबर, 2025 : बांग्लादेश के अर्धसैनिक सहायक बल अंसार वाहिनी के हिंदू सदस्य बजेंद्र बिस्वास को मैमनसिंह जिले में फैक्ट्री में साथी नोमान मियां ने गोली मारी। 3 जनवरी, 2026 : शरियतपुर जिले के हिंदू व्यवसायी खोकन चंद्र दास को घर लौटते समय हमलावरों ने रोककर चाकू मारा, फिर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। 3 जनवरी, 2026 को बंगलादेश के झिनाइदह में हिंदू विरोधी तत्वों ने एक विधवा हिंदू महिला से सामूहिक बलात्कार करने के बाद उसे पेड़ से बांध कर बुरी तरह पीटा और उसके बाल भी काट दिए। 5 जनवरी, 2026 : एक अखबार के 38 वर्षीय कार्यवाहक संपादक और बर्फ फैक्ट्री के मालिक राणा प्रताप बैरागी की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। और अब 5 जनवरी की रात सोमवार को देर रात एक हिंदू दुकानदार मोनी चक्रवर्ती की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जो पिछले 24घंटों में इस तरह की दूसरी घटना थी । कोई गारंटी नहीं है कि यह अमानवीयता दरिंदगी और बर्बरता का सिलसिला यहीं थमेगा। आपको बता दें कि ऐसी घटनाओं पर बंगलादेश की अंतरिम सरकार की चुप्पी उसकी नीयत में खोट का संकेत देती है जिस पर विश्व भर में चिंता व्यक्त की जा रही है। बंगलादेश में जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरवादी ताकतों तथा पाकिस्तान का प्रभाव बढ़ने से वहां के लोगों में भारत विरोधी भावनाएं बढ़ गई हैं और सुरक्षा मामलों में सहयोग भी प्रभावित हुआ है। इस समय राजनीतिक अस्थिरता झेल रहा बंगलादेश कट्टरपंथियों के दबाव में आकर आज आक्रामकता अराजकता और कानून व्यवस्था के सबसे बुरे दौर में पहुंच रहा है जहां से लौटना और कानून व्यवस्था अराजकता पर नियंत्रण पाना अस्थिर सरकार के बूते से बाहर की बात होगी । आखिर भारत सरकार कब तक बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ की जा रही बर्बरता को नजरअंदाज कर सकती है? (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं) (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 9 जनवरी /2026