* “संपत्ति नहीं, संस्कार सबसे बड़ा विरासत” — ग्रामजनों से व्यसनमुक्त और स्वस्थ जीवन अपनाने की अपील गांधीनगर (ईएमएस)| माणसा तालुका के सोलैया गांव में आयोजित रात्रि सभा (खाटला परिषद) में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने ग्रामीणों को प्राकृतिक खेती, पशुपालन, स्वच्छता, नशामुक्ति और बच्चों में संस्कारों के सिंचन जैसे विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने ग्रामीणों से अपने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अच्छे संस्कार, आदर्श विचार, उत्तम शिक्षा और नशामुक्त जीवन को प्राथमिकता देने की अपील की। राज्यपाल ने कहा कि केवल संपत्ति नहीं, बल्कि संस्कार ही सबसे बड़ी विरासत होते हैं। संयुक्त परिवार और आपसी भाईचारे जैसी भारतीय सांस्कृतिक परंपराएं ही हमारी सच्ची शक्ति हैं। सोलैया गांव की यात्रा के पहले दिन राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सोलैया प्राथमिक विद्यालय में रात्रि विश्राम किया। उन्होंने गांव में रहने वाले अनुसूचित जाति परिवार की हीराबेन रमणभाई परमार के घर सादा और सात्विक भोजन किया। इसके पश्चात अंबाजी मंदिर प्रांगण में आयोजित रात्रि सभा में भाग लेकर किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। राज्यपाल ने कहा कि भूमि में यूरिया, कीटनाशकों और रसायनों के अत्यधिक उपयोग से अनाज, फल, सब्जियां और यहां तक कि पेयजल भी प्रदूषित हो रहा है, जिसका मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने किसानों से रसायन-मुक्त प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। पशुपालन पर बोलते हुए राज्यपाल ने बताया कि उन्नत नस्ल के पशु, संतुलित पोषण और सरकार द्वारा उपलब्ध “सेक्स सॉर्टेड सीमेन” के उपयोग से दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी। उन्होंने गाय के दूध, गोबर और गोमूत्र को प्राकृतिक खेती के लिए अमृत समान बताते हुए भूमि की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने पर जोर दिया। इसके साथ ही राज्यपाल ने गांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों, आधार कार्ड, लाइसेंस और भूमि संबंधी कार्यों के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। सोलैया गांव को प्रगतिशील गांव बताते हुए उन्होंने विदेश में रहने वाले ग्रामीणों से भी मातृभूमि और अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहने का आग्रह किया। अंत में उन्होंने ग्रामीणों के स्नेहपूर्ण स्वागत और आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर स्वागत भाषण में जिला कलेक्टर मेहुल दवे ने कहा कि पहले बिना रासायनिक खाद के भी अच्छी फसल और बेहतर स्वास्थ्य संभव था, लेकिन आज रसायनों के अत्यधिक उपयोग से कई स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ गई हैं। इन्हें जड़ से समाप्त करने के लिए राज्यपाल किसानों को लगातार प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यपाल विभिन्न गांवों का दौरा कर स्वच्छता, वृक्षारोपण और नशामुक्ति जैसे विषयों पर प्रभावी मार्गदर्शन दे रहे हैं। सतीश/08 जनवरी