अलीगढ़ (ईएमएस)। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में राज्य एवं सेवाकर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए अल-दुआ फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (मास फैक्ट्री) पर एक साथ छह ठिकानों पर सर्वे किया। इस कार्रवाई में अरबों रुपये की जीएसटी चोरी सामने आने का दावा किया गया है। प्रारंभिक जांच के बाद फैक्ट्री प्रबंधन ने 1.01 करोड़ रुपये (101 लाख रुपये) अग्रिम जीएसटी के रूप में जमा करा दिए हैं, जबकि विस्तृत जांच अभी जारी है। एसआईबी की यह कार्रवाई लखनऊ मुख्यालय के निर्देश पर की गई, जो करीब एक माह से चल रहे डेटा विश्लेषण और निगरानी का परिणाम बताई जा रही है। जांच में सामने आया कि कंपनी लगातार जीएसटी रिटर्न में मीट उत्पादन में गिरावट दिखा रही थी, जबकि बाजार में अधिक कीमत पर माल बेचा जा रहा था। उत्पादन की कम कीमत दिखाकर और रिटर्न में वास्तविक आंकड़ों को छिपाकर बड़े पैमाने पर कर चोरी की जा रही थी। इस सर्वे में 30 से अधिक अधिकारियों की टीम शामिल रही। ज्वाइंट कमिश्नर रश्मि सिंह राजपूत के नेतृत्व में डिप्टी कमिश्नर एसआईबी अजीत प्रताप सिंह व धीरज प्रताप सिंह, असिस्टेंट कमिश्नर अभिषेक कुमार व शिव कुमार सहित अन्य अधिकारियों ने फैक्ट्री परिसर को घेरकर जांच शुरू की। टीम ने स्लॉटर हाउस, प्रशासनिक कार्यालय, डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेजों और जिंदा पशुओं के गोदामों की गहन जांच की। अधिकारी देर रात तीन बजे तक फैक्ट्री में जमे रहे। जांच के दौरान मेहरावल क्षेत्र में पैकेजिंग मटेरियल का एक अघोषित गोदाम भी मिला, जिसे जीएसटी विभाग में घोषित नहीं किया गया था। इसे भी कर चोरी का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। शुक्रवार तड़के अधिकारियों की टीम रामघाट रोड स्थित जीएसटी भवन पहुंची, जहां संदिग्ध दस्तावेजों का मिलान कर रिपोर्ट मुख्यालय भेजी गई। अल-दुआ फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड तालसपुर के पास स्थित है और इसकी स्लॉटर हाउस क्षमता प्रतिदिन करीब दो हजार पशुओं की बताई जाती है। फैक्ट्री में हलाल बफेलो मीट का उत्पादन, फ्रोजन मीट की तैयारी और निर्यात किया जाता है। यह कंपनी एमके ग्रुप से जुड़ी बताई जा रही है और इसका संचालन हाजी जहीर करते हैं। कंपनी और इसके संचालक हाजी जहीर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। वर्ष 2023 में आयकर विभाग ने इसके कई ठिकानों पर छापा मारा था। इसके अलावा अमोनिया गैस रिसाव जैसी घटनाओं के कारण भी यह फैक्ट्री चर्चा में रही है। हाजी जहीर प्रदेश के टॉप-10 आयकर दाताओं में शामिल बताए जाते हैं, वहीं उनके राजनीतिक संपर्कों को लेकर भी समय-समय पर बहस होती रही है। एसआईबी के अपर आयुक्त एके राम त्रिपाठी ने संकेत दिए हैं कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और दस्तावेजों के गहन विश्लेषण के बाद जीएसटी चोरी की वास्तविक राशि कहीं अधिक हो सकती है।