राज्य
09-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्स की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने दिल्ली पुलिस को जानकारी देने में देरी से संबंधित कार्यवाही से छूट मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन मध्यस्थों को कानून लागू करने वाली एजेंसियों को समय पर सहयोग देना अनिवार्य है। आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा उन्हें सहयोग पोर्टल से जुड़ने से नहीं बचाती। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह न्यायमूर्ति अमित शर्मा की पीठ ने कहा कि एक्स अपराध या पुलिस जांच से जुड़े मामलों में सहयोग पोर्टल से जुड़ने से छूट का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि सूचना तकनीकी अधिनियम की धारा-79 के तहत मध्यस्थों को मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा प्लेटफार्म को पोर्टल में हिस्सा लेने से नहीं बचाती है। पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि मौजूदा सेफ हार्बर प्रविधान एक्स को उस हद तक सुरक्षा नहीं देते कि जिसे वह मानने से मना कर सकें। एक्स प्रविधान का हवाला देकर यह नहीं कह सकता कि अपराध के मामलों में वह शामिल नहीं हो सकता। अदालत ने उक्त टिप्पणी एक्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें उसने दिल्ली पुलिस को जानकारी देने में देरी से संबंधित कार्यवाही से छूट की मांग की थी। अदालत 10 जनवरी 2024 से लापता 19 साल के दिल्ली के एक लड़के से जुड़े बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले से शुरू कर रही है। मामले में हाई कोर्ट पुलिस के प्रयासों की निगरानी कर रहा है। मामले पर सुनवाई के दौरान एक्स ने कहा कि जांच में वह पूरा सहयोग किया है और उसने कर्नाटक हाई कोर्ट में सहयोग पोर्टल से जुड़ने के निर्देश को अलग से चुनौती दी है। हालांकि, अदालत ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में जांच अधिकारियों को हर प्लेटफार्म से अलग-अलग संपर्क करना पड़ता है, जो आपातकालीन स्थितियों में अव्यावहारिक है। पीठ ने टिप्पणी की कि देश के हर पुलिस स्टेशन के हर जांच अधिकारी जानकारी लेने के लिए 30-40 प्लेटफार्म पर नहीं जा सकते। सहयोग पोर्टल को आइटी एक्ट के तहत मध्यस्थाें को नोटिस भेजने और गैर-कानूनी सामग्री को हटाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए तैयार किया गया है। 60 से ज्यादा मध्यस्थ सहयोग पोर्टल से जुड़ चुके हैं।