कोरबा (ईएमएस) एसईसीएल-कोरबा क्षेत्र की सराईपाली खदान में नई ठेका कंपनी द्वारा मिट्टी की परत हटाकर कोयला खनन का काम लेने पश्चात सभी कर्मियों की बहाली नहीं करने का आरोप लगा एचएमएस से संबद्ध कोयला मजदूर पंचायत के बैनर तले निकाले गए कर्मियों ने कोरबा क्षेत्र महाप्रबंधक कार्यालय के मुख्य गेट के सामने सुबह 11 बजे से लगभग साढ़े 5 घंटे धरना प्रदर्शन किया । इसका समर्थन माइंस में नियोजित निजी कंपनी के ठेका कर्मियों ने भी दिया। आंदोलनकारियों ने खदान का काम प्रभावित होने का दावा किया है। कोयला मजदूर पंचायत के पदाधिकारियों के साथ सराईपाली खदान में नियोजित निजी कंपनी के कर्मचारियों ने 9 सूत्रीय मांगों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए इसके विरोध में धरना दिया। एसईसीएल-कोरबा की कोयला खदानों में नियोजित ठेका कंपनियों के कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा की मांग लगातार उठाई जा रही है। खदान की ठेका कंपनियां बदलने पर भी कर्मचारियों को नहीं हटाने और यथावत रखने पर श्रमिक संगठनों ने जोर दिया है। इसके विपरीत सराईपाली खुली खदान में पूर्व में कार्यरत सभी वाहन चालकों, सहायको की पूर्ण बहाली नहीं किए जाने का कोयला मजदूर पंचायत ने आरोप लगाया है। साथ ही ठेका कर्मियों को तय वेतन से कम मेहनताना देने पर एरियर्स सहित भुगतान, सभी ठेका कर्मियों को वेतन पर्ची देने, तय फार्म में टाइम ऑफिस में हाजिरी लगाने, सीएमपीएफ का सदस्य बनाकर नियमित कटौती सहित अन्य मांगों को पूर्ण करने हेतु मांग की गयी। दोपहर लगभग 2.30 बजे कोयला मजदूर पंचायत के प्रतिनिधि मंडल को एरिया सभाकक्ष में वार्ता के लिए बुलाया गया। 7 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल में शामिल कोयला मजदूर पंचायत के केन्द्रीय सचिव संजय कुमार सिंह, केन्द्रीय उपाध्यक्ष गजेन्द्र पाल सिंह तंवर, गेवरा अध्यक्ष राजन कुमार, सदस्य साहेब दास महंत, सहस राम, बसंत कुमार व देवचरण ने प्रबंधन के समक्ष ठेका कर्मियों की मांगों को प्रमुखता से रखा। एसईसीएल-कोरबा क्षेत्र महाप्रबंधक राकेश कुमार गुप्ता, एचआर के.पी. सिंह सहित अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में करीब घंटेभर चली वार्ता के बाद मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने के आश्वासन पर दोपहर 3.30 बजे धरना समाप्त हुआ। कोयला मजदूर पंचायत के केन्द्रीय उपाध्यक्ष गजेन्द्र पाल सिंह तंवर ने कहा कि ठेका कर्मियों की जायज मांगें पूरी होनी चाहिए। लगभग घंटेभर तक चली वार्ता के बाद एक महीने के भीतर मांगें पूरी करने के आश्वासन पर धरना समाप्त किया गया है। सराईपाली खदान में काम कर रहे निजी कंपनी के कर्मचारी भी धरने में शामिल रहकर कार्य बंद रखा। 10 जनवरी / मित्तल