खेल
11-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। सिडनी में इंग्लैंड को हराकर ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर एशेज पर कब्जा बरकरार रखा और क्रिकेट की सबसे पुरानी व प्रतिष्ठित प्रतिद्वंद्विता को नया अध्याय दे दिया। एशेज को सिर्फ एक द्विपक्षीय सीरीज़ कहना इसकी महत्ता को कम करके आंकना होगा। यह मुकाबला डेढ़ सौ साल से भी अधिक पुरानी परंपरा, राष्ट्रीय सम्मान और खिलाड़ियों की शारीरिक व मानसिक सहनशक्ति की अंतिम परीक्षा माना जाता है। हैरानी की बात यह है कि जिस ट्रॉफी के लिए इतनी कड़ी जंग होती है, उसकी वास्तविक कीमत महज़ 7.99 पाउंड, यानी लगभग 968 रुपये आंकी गई है, फिर भी इसकी प्रतिष्ठा किसी विश्व कप या आईसीसी ट्रॉफी से कम नहीं मानी जाती। एशेज ट्रॉफी दरअसल एक छोटा सा कलश है, जिसे 1882 में इंग्लैंड की ऑस्ट्रेलिया से ऐतिहासिक हार के बाद प्रतीकात्मक रूप से बनाया गया था। मान्यता है कि इसमें जली हुई बेल्स की राख रखी गई है। आज विजेता टीम को जो ट्रॉफी सौंपी जाती है, वह मूल कप प्रतिकृति होती है, जबकि असली कलश लंदन के लॉर्ड्स म्यूज़ियम में सुरक्षित है। क्रिकेट इतिहासकारों और बोर्ड से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इसकी भौतिक कीमत बेहद मामूली है, लेकिन इसका भावनात्मक और ऐतिहासिक मूल्य अनमोल है। इस बात का दिलचस्प खुलासा इंग्लैंड के महान तेज़ गेंदबाज़ जिमी एंडरसन ने अपनी आत्मकथा “फाइंडिंग दा ऐज” में किया है। एंडरसन ने 2009 की एशेज जीत के बाद का एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि जश्न के दौरान जब वे और ग्रैम स्वान ट्रॉफी थामे हुए थे, तो उन्हें उसके नीचे कुछ चिपका हुआ महसूस हुआ। ट्रॉफी को पलटने पर पता चला कि उस पर अब भी प्राइज़ टैग लगा था, जिस पर 7.99 पाउंड लिखा हुआ था। जल्दबाज़ी में टैग हटाना तक भूल जाना इस बात का प्रतीक था कि एशेज जीतने की खुशी में खिलाड़ी हर छोटी-बड़ी चीज़ से बेखबर हो जाते हैं। एशेज ट्रॉफी की कम कीमत अक्सर लोगों को चौंकाती है, लेकिन यही इसकी खूबी भी है। इस ट्रॉफी के लिए खिलाड़ी अपना करियर, शरीर और मानसिक संतुलन तक दांव पर लगा देते हैं। महीनों की थकान, चोटों का दर्द और अपार दबाव झेलने के बाद इसे जीतना ही असली पुरस्कार है। यही कारण है कि 7.99 पाउंड की यह ट्रॉफी भावनात्मक और ऐतिहासिक मायनों में क्रिकेट की सबसे महंगी और सबसे कठिन उपलब्धि मानी जाती है। डेविड/ईएमएस 11 जनवरी 2026