नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के भरोसेमंद बल्लेबाज राहुल द्रविड़ रविवार 11 जनवरी को 52 साल पूरे हो गए। द्रविड को इस अवसर पर क्रिकेट जगत के साथ ही प्रशंसकों ने भी शुभकामनाएं दी हैं। खेल हस्तियों और संगठनों ने उनके खेल करियर की उपलब्धियों, भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान और उनके शांत स्वभाव की प्रशंसा की है। द्रविड़ अपनी शानदार बल्लेबाजी के कारण कठिन हालातों में भी भारतीय टीम की ढ़ाल बनकर सामने आये। वह टीम के कप्तान भी रहे। वह हमेशा ही एक शांत क्रिकेटर रहे। खेल से संन्यास के बाद कोच और कमेंटेटर के तौर पर भी वह खासे सफल रहे। आईपीएल में भी वह कई टीमों से जुड़े रहे हैं। वहीं एक रिपोर्ट के अनुसार द्रविड़ अपने शुरुआती दिनों में क्रिकेट नहीं बल्कि हॉकी पसंद करते थे। प्लेयर बनने का था. वह स्कूल में हॉकी खेला करते थे। स्कूल टीम में वह सेंटर-हाफ के तौर पर खेलते थे। द्रविड़ राज्य की जूनियर टीम में भी रहे थे। एक दिन कोच ने अचानक ही उन्हें सेंटर-हाफ से हटाकर राइट-हाफ में खेलने भेज दिया। तब उन्हें लगा कि उनके खेल का स्तर अच्छा नहीं है। उन्होंने कहा, “हॉकी टीम में पोजीशन बदलने के बाद मेरे पास क्रिकेट में जाने का विकल्प था।.” इसी कारण उनका ध्यान क्रिकेट की ओर आ गया। इसके बाद उन्हें हॉकी से ज्यादा क्रिकेट में आनंद आने लगा और वह क्रिकेट में ही रम गये। जूनियर लेवल पर धीरे-धीरे उनकी पहचान बनने लगी। इसी दौरान नाम कोच केकी तारापोर की उनकी प्रतिभा का पहचाना और यहीं से उनका खेल में आगे बढ़ने का सफर शुरु हो गया। उन्हें 1990 में पहली बार कर्नाटक राज्य टीम में शामिल किया गया। घरेलू क्रिकेट में डेब्यू के बाद द्रविड़ को छह साल बाद भारतीय टीम में जगह मिल गयी। द्रविड़ ने अप्रैल, 1996 में श्रीलंका के खिलाफ एकदिवसीय में डेब्यू का मौका मिला। जिसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। द्रविड़ ने भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ियों में जगह बनाने के साथ ही भारत के लिए 164 टेस्ट, 344 एकदिवसीय और 1 टी20 अंतरराष्ट्रीय खेलते हुए 52.31 की औसत से 13288 रन बनाए। उन्होंने 63 अर्धशतक और 36 शतक लगाये। टेस्ट में द्रविड़ के नाम 5 दोहरे शतक भी है। वहीं एकदिवसीय में द्रविड़ ने 10889 रन बनाए हैं। इस फॉर्मेट में उनके नाम 83 अर्धशतक और 12 शतक है। उनके खेल की सबसे बड़ी खूबी ये रही कि वह एक भरोसेमंद बल्लेबाज रहे हैं जब भी टीम संकटों में घिरी द्रविड़ ने उसे संभाला। कई शीर्ष गेंदबाज भी उनके सामने विफल रहे। इसी कारण उन्हें भारत की दीवार भी कहा जाता रहा है। ईएमएस 11 जनवरी 2026