राष्ट्रीय
11-Jan-2026
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कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल के कथित कोयला तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोलकाता उच्च न्यायालय में एक अत्यंत सनसनीखेज याचिका दायर की है। जांच एजेंसी का दावा है कि कोयला तस्करी के जरिए अर्जित अपराध की आय का एक बड़ा हिस्सा, जो लगभग 20 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, हवाला के एक बेहद जटिल और गुप्त नेटवर्क के माध्यम से कोलकाता से गोवा भेजा गया था। ईडी के अनुसार, इस विशाल धनराशि का उपयोग 2021-22 के गोवा विधानसभा चुनावों के दौरान राजनीतिक अभियानों और इवेंट मैनेजमेंट के कार्यों के लिए किया गया। यह पैसा कथित तौर पर एक प्रमुख राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म, इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी के गोवा स्थित कार्यालय तक पहुंचा था। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि ये आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं और अदालत में इनका कानूनी परीक्षण होना अभी बाकी है। जांच एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवैध धनराशि को पकड़ से बचाने के लिए छह अलग-अलग स्तरों पर हस्तांतरित किया गया ताकि कोई सीधा निशान न मिल सके। ईडी की गणना के अनुसार, पूरे कोयला तस्करी सिंडिकेट ने करीब 2,742 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की है। इसी राशि में से 20 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का संबंध गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान हुए खर्चों से जोड़ा जा रहा है। जांचकर्ताओं ने इस मनी ट्रेल की गहराई से पड़ताल की है, जिसकी कड़ी नई दिल्ली स्थित एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल सर्विसेज (एनबीएफसी) कंपनी के पूर्व निदेशक तक जा पहुंची है। आरोप है कि इसी पूर्व निदेशक ने ‘मुन्ना’नामक एक बिचौलिए से संपर्क किया, जिसने आगे हवाला नेटवर्क के अन्य सदस्यों को इस काम में जोड़ा। इस नेटवर्क के माध्यम से पैसा कोलकाता की एक हवाला फर्म के मैनेजर तक पहुंचा, जिसने जांच के दौरान यह स्वीकार किया है कि उसने गोवा में नकद डिलीवरी की व्यवस्था की थी। यह नकदी एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के कर्मचारी को सौंपी गई थी, जो गोवा चुनावों के दौरान कंसल्टेंसी फर्म के लिए काम कर रही थी। ईडी ने अदालत को जानकारी दी कि उस समय फर्म के सह-संस्थापक और निदेशक प्रतीक जैन गोवा में ऑपरेशंस की कमान संभाल रहे थे। इसी कड़ी को जोड़ते हुए 8 जनवरी को नई दिल्ली और कोलकाता में 10 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिसमें प्रतीक जैन का आवास भी शामिल था। एजेंसी का मुख्य आरोप है कि इस पूरी साजिश का केंद्र अनूप माजी के नेतृत्व में होने वाली कोयला चोरी है। आरोप है कि ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के परिसरों से अवैध उत्खनन कर कोयला चुराया गया और उसे पश्चिम बंगाल तथा झारखंड के विभिन्न जिलों की फैक्ट्रियों में नकद भुगतान पर बेचा गया। इस अवैध नकद को आसनसोल के एक गुप्त कार्यालय में जमा किया जाता था और फिर वहां से इसे हवाला के जरिए राजनीतिक फंडिंग के लिए भेजा जाता था। एजेंसी फिलहाल मनी ट्रेल और राजनीतिक फंडिंग के इन सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है। वीरेंद्र/ईएमएस/11जनवरी2026