क्षेत्रीय
12-Jan-2026
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गरियाबंद(ईएमएस)। जिले के मैनपुर विकासखंड के आदिवासी बहुल राजापड़ाव इलाके में एक बार फिर ग्रामीणों का आक्रोश सड़कों पर दिखा। 8 पंचायतों के 30 गांवों से पहुंचे 2 हजार से अधिक महिला-पुरुषों ने आज नेशनल हाइवे 130-सी को जाम कर दिया। ग्रामीणों की मांग है कि 20 से अधिक विद्युत-विहीन गांवों में तत्काल बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। हाईवे जाम के चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि ये गांव उदंती-सीता नदी अभयारण्य के कोर जोन में आते हैं, जहां अंडरग्राउंड विद्युतीकरण की प्रशासनिक मंजूरी पहले ही मिल चुकी है, लेकिन बजट के अभाव में अब तक काम शुरू नहीं हो सका। जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा कि मैनपुर ब्लॉक के राजापड़ाव क्षेत्र में यह एक साल में चौथी बार नेशनल हाइवे जाम किया गया है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। प्रदर्शन में शामिल अम्बेडकरवादी समिति के अध्यक्ष पतंग नेताम, जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम और लोकेश्वरी नेताम ने बताया कि राजापड़ाव क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्र है, जहां पेसा अधिनियम-1996 लागू है। ऐसे में यहां निवासरत आदिवासी समुदायों को संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची और पेसा अधिनियम के तहत विशेष संरक्षण और अधिकार प्राप्त हैं। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र की 8 ग्राम पंचायतों में से केवल 3 पंचायतें—अड़गड़ी, शोभा और गोना—आंशिक रूप से विद्युतीकृत हैं, जबकि शेष भूतबेड़ा, कुचेंगा, कोकड़ी, गरहाडीह और गौरगांव के ग्रामीण आज भी 78 वर्षों बाद अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं। यह स्थिति अनुच्छेद 14 (समानता), 21 (सम्मानजनक जीवन), 21-क (शिक्षा का अधिकार) तथा अनुच्छेद 38-39 में निहित सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताई गई। ग्रामीणों ने कहा कि बिजली आज केवल सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, सिंचाई, आजीविका और सूचना तक पहुंच का आधार है। विद्युत का अभाव सीधे तौर पर बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा और किसानों की सिंचाई क्षमता को प्रभावित कर रहा है, जिससे यह मूलभूत मानवाधिकार का विषय बन जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन पंचायतों के लिए पहले विद्युतीकरण की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी और काम भी शुरू हुआ था, लेकिन 2023 के बाद बिना किसी स्पष्ट आदेश के कार्य रोक दिया गया, जो सुशासन, विधि के शासन और प्रशासनिक उत्तरदायित्व के सिद्धांतों का उल्लंघन है। आक्रोशित ग्रामीणों ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे और जब तक बिजली आपूर्ति पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है। सत्यप्रकाश(ईएमएस)12 जनवरी 2026