क्षेत्रीय
12-Jan-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीडऩ की रोकथाम के लिए बनाए गए कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीडऩ (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा शिकायत निवारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आज संभाग स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रार्थना सभा कक्ष में आयोजित कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, आंतरिक शिकायत समितियों के पदाधिकारी तथा संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। राज्य स्तरीय संसाधन केन्द्र, महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक एस. के. चौबे ने अपने उद्बोधन में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि पोश अधिनियम के अंतर्गत सभी शासकीय एवं अशासकीय संस्थानों में प्रावधानों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। उन्होंने पोर्टल पर सभी संस्थानों की ऑनबोर्डिंग तथा आंतरिक शिकायत समिति (इंटरनल कमेटी-आईसी) की प्रविष्टि अनिवार्य रूप से कराने पर जोर दिया, ताकि महिलाओं की शिकायतों का त्वरित, निष्पक्ष और सुरक्षित समाधान सुनिश्चित हो सके। जिला कार्यक्रम अधिकारी बिलासपुर सुरेश सिंह ने कहा कि सुरक्षित कार्यस्थल महिलाओं की गरिमा और अधिकारों की रक्षा का आधार है। पोश अधिनियम न केवल शिकायत निवारण का मंच प्रदान करता है, बल्कि संस्थानों में संवेदनशीलता, जवाबदेही की संस्कृति विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सभी विभागों से अधिनियम के प्रावधानों का नियमित अनुपालन करने और कर्मचारियों को जागरूक करने का आह्वान किया। प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में मास्टर ट्रेनर सरवत नकवी ने प्रतिभागियों को अधिनियम की प्रमुख धाराओं की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पोश अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत किसी भी शासकीय/अशासकीय संस्था में जहाँ 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हों, वहाँ आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। समिति का गठन न होने की स्थिति में कार्यालय प्रमुख पर 50,000/- तक के जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने समिति की संरचना, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, समय-सीमा, गोपनीयता तथा पीड़िता के संरक्षण से जुड़े प्रावधानों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में राज्य स्तरीय संसाधन केन्द्र, रायपुर के सहायक संचालक अतुल दांडेकर ने पोर्टल के संचालन एवं तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने पोर्टल पर पंजीकरण, शिकायत अपलोड करने की प्रक्रिया, प्रगति ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग से जुड़े फीचर्स का लाइव डेमो देते हुए बताया कि यह प्लेटफॉर्म शिकायतों के निस्तारण को समयबद्ध, पारदर्शी और मॉनिटर करने योग्य बनाता है। कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जिला पंचायत, शिक्षा विभाग, नगर पालिका निगम, उच्च शिक्षा विभाग तथा जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके अलावा संभाग के सभी जिलों की आंतरिक एवं स्थानीय शिकायत समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्य भी बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिससे विभिन्न संस्थानों में एकरूपता के साथ अधिनियम के पालन को गति मिलने की उम्मीद जताई गई। कार्यक्रम का संचालन परियोजना अधिकारी मिलिन्द द्विवेदी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला-जीपीएम अमित सिन्हा द्वारा किया गया। मनोज राज/योगेश विश्वकर्मा 12 जनवरी 2026