इस्लमाबाद,(ईएमएस)। पाकिस्तान में वर्तमान में चार प्रांतों की जगह 16 प्रांत बनाने की मांग ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। यह मांग इस्तेहकाम पाकिस्तान पार्टी (आईपीपी) ने उठाई है, जिसके प्रमुख नेताओं में पाकिस्तान के संचार मंत्री अब्दुल कलीम खान शामिल हैं। फिलहाल पाकिस्तान चार प्रांतों पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बंटा हुआ है, जबकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को अब तक औपचारिक रूप से प्रांत का दर्जा नहीं मिला है। खान का कहना है कि बड़े प्रांतों के कारण प्रशासनिक असंतुलन पैदा हो रहा है और दूरदराज इलाकों तक सरकारी सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। इसी वजह से उन्होंने देश को 16 प्रांतों में विभाजित करने का प्रस्ताव रखा है। उनका सुझाव है कि प्रांतों के पारंपरिक नाम बदले बिना ही उन्हें क्षेत्रीय आधार पर विभाजित किया जाए, जैसे पंजाब को उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम पंजाब में बांटना। इसी तरह सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा को भी चार-चार हिस्सों में बांटने की बात कही गई है। कलीम खान ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों को “छोटी मानसिकता” से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में एकजुट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मांग को लेकर आंदोलन चलाने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्ताव को सिंध की बड़ी राजनीतिक पार्टी एमक्यूएम का समर्थन मिलना भी इस राजनीतिक रूप से अहम बनाता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव केवल प्रशासनिक सुधार तक सीमित नहीं है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे उपद्रव-प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से असंतोष और हिंसा देखी जाती रही है, जहां अक्सर पंजाबियों को निशाना बनाया गया है। इसतरह में छोटे प्रांत बनाने का विचार स्थानीय प्रतिनिधित्व बढ़ाने और अलगाववादी भावनाओं को कमजोर करने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, 16 प्रांतों का प्रस्ताव पाकिस्तान की राजनीति, प्रशासन और आंतरिक सुरक्षा तीनों पर गहरा असर डाल सकता है, हालांकि इसे लागू करना आसान नहीं होगा। आशीष दुबे / 12 जनवरी 2026